कई जटिलताओं से जूझ रहे समय से पूर्व हुए नवजात का फोर्टिस मोहाली में सफलतापूर्वक इलाज - Arth Parkash
Tuesday, November 13, 2018
Breaking News
Home » हेल्थ » कई जटिलताओं से जूझ रहे समय से पूर्व हुए नवजात का फोर्टिस मोहाली में सफलतापूर्वक इलाज
कई जटिलताओं से जूझ रहे समय से पूर्व हुए नवजात का फोर्टिस मोहाली में सफलतापूर्वक इलाज

कई जटिलताओं से जूझ रहे समय से पूर्व हुए नवजात का फोर्टिस मोहाली में सफलतापूर्वक इलाज

 गर्भावस्था के 5 महीन के बाद पैदा हुआ था और जन्म के समय उसका वजन सिर्फ 560 ग्राम था

चंडीगढ़। एक अनूठे मामले में, कई जटिलताओं के बावजूद फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली में एक प्री-टर्म (समय से पूर्व हुए बच्चे) बच्चे का सफलतापूर्वक इलाज किया गया। बच्चा 6 नवंबर 2017 को गर्भधारण के 23 सप्ताह (गर्भावस्था के 5 और आधे महीने) पर सी-सेक्शन के माध्यम से पैदा हुआ था और जन्म के समय उसका वजन सिर्फ 560 ग्राम था। यह पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर समेत पूरे क्षेत्र में जीवित बचाया गया पहला 23 सप्ताह का बच्चा है।

डॉ. स्वप्ना मिश्रा, एडीशनल डायरेक्टर, ऑबस्ट्रेटिक्स एंड गाइनोकोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली, ने मीडिया के साथ बातचीत करते हुए कहा कि ”एक 36 वर्षीय, 22 सप्ताह की गर्भवती महिला इमरजेंसी में अस्पताल आई थी, जिसे रक्तस्त्राव और लीकेज हो रही थी। उसके पास पहले कोई बच्चा नहीं था। उसे मधुमेह और हाइपोथायरायडिज्म था। यह बहुत ही शुरुआती गर्भावस्था थी, लेकिन माता-पिता खराब परिणाम की 70 प्रतिशत संभावना के बावजूद गर्भावस्था को जारी रखने के इच्छुक थे। माता-पिता कंजर्वेटिव मैनेजमेंट के लिए सहमत हुए। 20 दिनों के बाद, महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया। नियोनटाल आईसीयू टीम ने बच्चे की देखभाल की।

इस बारे विस्तार से जानकारी देते हुए डॉ. सुनील कुमार अग्रवाल, कंसल्टेंट, नियोनैटोलॉजी, फोर्टिस अस्पताल, मोहाली ने बताया कि ”श्वेता का बच्चा 6 नवंबर 2017 को गर्भधारण के 23 सप्ताह (गर्भावस्था के 5 और आधे महीने) पर सी-सेक्शन के माध्यम से पैदा हुआ था और जन्म के समय उसका वजन सिर्फ 560 ग्राम था। जन्म के समय उनके फेफड़ों का विकास काफी कम हुआ था, इसलिए उसे प्रसव के तुरंत बाद वेंटिलेटरी सपोर्ट पर रखा गया। उसके बाद उसे लेवल 3 नीकू में शिफ्ट कर दिया गया।

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि ”जीवन के पहले 2 महीनों के लिए हर रोज एक नई मुश्किल के साथ नई चुनौती सामने आती थी। कभी उसकी फेफड़ों की स्थिति खराब हो जाती है, कभी दिल में एक नली (पीडीए) समस्या पैदा करती है।

समय पर दूध पचाने में कठिनाई होती है और कभी-कभी इंफेक्शन भी समस्या पैदा करती थी। लेकिन बेहतर मेडिकल मदद और देखभाल के साथ, धीरे-धीरे बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार दिखना शुरू कर दिया और हम उन्हें 105 दिनों के जीवन में वेंटिलेटर से हटा सकते थे। उसके बाद भी उसे बहुत कम मात्रा में ऑक्सीजन की आवश्यकता होती थी और हम बच्चे को 140 दिनों के जीवन में डिस्चार्ज कर सकते थे। अस्पताल से डिस्चार्ज के समय उसका वजन 2.9 किलोग्राम था और ऑक्सीजन प्राप्त कर रहा था, जो उसके घर पर भी एक महीने तक जारी रही।

अस्पताल से छुट्टी के बाद भी उसका सफर आसान नहीं था। उसे फीडिंग से संबंधित समस्याओं, सांस संबंधी रोगों आदि के लिए छह-सात बार अस्पताल में भर्ती किया गया। लेकिन अब वह 5 किलो वजन का है और स्वस्थ है और एक योद्धा के रूप में उसने सभी ल?ाइयों पर विजय प्राप्त की। यही कारण है कि हम कहते हैं कि वह एक सच्चा योद्धा है और सही में एक चमत्कारिक बच्चा है।

जीवन के 23 सप्ताह में, नवजात के अधिकांश अंग ठीक से विकसित नहीं होते हैं और ऐसे समय से पहले के शिशुओं के जीने की संभावना बहुत कम होती है, कई माता-पिता और यहां तक कि डॉक्टरों का मानना है कि ये बच्चे जीवित नहीं रह सकते हैं। इसलिए, कई बार इन बच्चों को एग्रेसिव गहन देखभाल नहीं दी जाती है। लेकिन चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के साथ, माता-पिता ऐसा करने की इच्छा रखते हुए ऐसे माइक्रो प्रीमैच्योर्स की एग्रेसिव देखभाल की पेशकश की जा सकती है। हालांकि, डॉक्टरों के मुताबिक, ऐसे बच्चों को उनके विकास और न्यूरोडिफार्ममेंटल एसेसमेंट के लिए लंबे समय तक फॉलोअप की आवश्यकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Share