श्रीराम जन्म व ताड़का वध देख अभिभूत हुए श्रद्धालु: विशाल ड्रामेटिक रामलीला चंडीगढ़ - Arth Parkash
Saturday, December 15, 2018
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श्रीराम जन्म व ताड़का वध देख अभिभूत हुए श्रद्धालु: विशाल ड्रामेटिक रामलीला चंडीगढ़

श्रीराम जन्म व ताड़का वध देख अभिभूत हुए श्रद्धालु: विशाल ड्रामेटिक रामलीला चंडीगढ़

चंडीगढ़: मलोया (चंडीगढ़) में चल रही विशाल ड्रामेटिक रामलीला में श्रीराम जन्म, विद्या अध्ययन तथा ताड़का वध की लीलाएं दिखाई गई। श्रीराम की किलकारी गूंजते ही दर्शक भाव विभोर हो उठे। भगवान श्री राम द्वारा ताड़का का वध करने पर रामलीला पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। लीलाओं को देख दर्शक रोमांचित हो उठे।  राजा दशरथ ने संतान प्राप्ति के लिए यज्ञ किया। अग्निदेव ने उनकी तीनों रानियों को संतान प्राप्ति का वरदान दिया। इसके बाद राजा की तीनों रानियों ने चार पुत्रों को जन्म दिया। संतानों के जन्म के उपलक्ष्य में बधाई लीला और इसके बाद विद्या अध्ययन और ताड़का वध की लीला का मंचन हुआ। ताड़का वध देखने के लिए आधी रात तक क्षद्धालुओं की भीड़ रही। रामलीला में राम – राहुल वर्मा, लक्ष्मण – राकेश,  भरत – अंकित,  शत्रुघ्न – लकी तथा  दशरथ का अभिनय नवीन ने किया। ये रामलीला मंच पीछे 28 सालों से डायरेक्टर सुशील सिंगला व अशोक चौहान द्वारा चलाया जा रहा है।

हिन्दू धर्म के महत्वपूर्ण माने जाने वाली धार्मिक किताब रामायण में सनातन धर्म की ऐसी कई कथाएँ दर्ज की हुई हैं, जो बड़ी दिलचस्प हैं। त्रेता युग में हुई रामायण काल की सम्पूर्ण घटना श्रीराम और उनके चरित्र से जुड़े कई पहलुओं पर लिखी गयी । एक ताड़का नाम की राक्षसी थी उस समय ऋषि मुनियों द्वारा संपन्न किये जाने वाले यज्ञ में हमेशा व्यवधान डाल कर उनका यज्ञ कभी पूरा नहीं होने देते थी। राक्षस उनके यज्ञ कुंड में कभी मांस के टुकड़े डाल देते थे या फिर कभी उसमे रक्त फेक देते थे। जब राक्षसों का आतंक बहुत बढ़ गया तो सभी ऋषि मुनि एकत्रित हो कर उस समय के वरिष्ट ऋषि विश्वामित्र के समक्ष अपनी समस्या लेकर पहुचे।

उस समय ऋषि विश्वामित्र अयोध्या के प्रमुख ‘राजा दशरथ’ के पुत्र राम और लक्ष्मण को आयुध शिक्षा दे रहे थे। जब सभी ऋषि वहां पहुचे और अपनी व्यथा सुनाई तो उन ऋषियों की बात सुन कर दोनों युगल राजकुमार राम और लक्ष्मण ने कहा कि महर्षि आप अपना यज्ञ पूरा कीजियें हम आप के यज्ञ की रक्षा करेंगे। दोनों राजकुमार यज्ञ की रक्षा करने लगे और सभी ऋषि वरिष्ट ऋषि विश्वामित्र के साथ यज्ञ पूर्ण करने लगे।

यज्ञ के दौरान ही वहाँ अत्यधिक बड़े आकार और कुरूप चेहरें वाली राक्षसी ताड़का पहुची। और यज्ञ को भंग करने की कोशिश करने लगीतब श्री राम जी ने वहां तड़का का वध किया । इस तरह महर्षि विश्वामित्र के सानिध्य में रह कर श्रीराम और लक्ष्मण ने सभी ऋषियों की राक्षसों से रक्षा की। ताड़का नाम की यह राक्षसी पहले स्वर्ग की अप्सरा हुआ करती थी लेकिन एक श्राप के चलते वह राक्षसी बन गयी। राक्षसी ताड़का सुकेतु यक्ष की पुत्री थी।  

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