एससी/एसटी विधेयक संसद से पारित
Thursday, October 18, 2018
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एससी/एसटी विधेयक संसद से पारित

एससी/एसटी विधेयक संसद से पारित

नई दिल्ली। एसटी/एससी संशोधन विधेयक 2018 को वीरवार को राज्यसभा ने मंजूरी दे दी। यह विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हो गया है। अब यह राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए जाएगा। विधेयक पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते ही यह कानून का रूप ले लेगा। इस मौके पर सरकार ने कहा कि वह अच्छी नीयत, अच्छी नीति और अच्छी कार्ययोजना के साथ इन वर्गों के हकों के संरक्षण के लिए प्रयासरत है।
विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले ही संबोधन में स्पष्ट कर दिया था कि उनकी सरकार गरीबों, पिछड़े लोगों की सरकार होगी। उन्होंने कहा कि पिछले चार साल में हमने वैसा करके भी दिखाया है और इस संबंध में किसी को कोई आशंका नहीं करनी चाहिए।

मंत्री के जवाब के बाद उच्च सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को पारित कर दिया। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है। गहलोत ने कहा कि वह अच्छी नीयत, अच्छी नीति और अच्छी कार्ययोजना के साथ कठोर प्रयास कर इन वर्गों के हकों के संरक्षण के लिए प्रयासरत है। इसमें उन्हें सफलता भी मिली है। चर्चा के दौरान कई सदस्यों ने विशेष अदालतों के गठन की मांग की थी। इस पर उन्होंने कहा कि विधेयक में विशेष अदालतों की स्थापना का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि 14 राज्यों ने 195 विशेष अदालतें गठित की हैं।

गहलोत ने विपक्षी सदस्यों के इस दावे को नकार दिया कि सरकार विभिन्न दबावों में यह विधेयक लाई है। उन्होंने कहा कि यह सरकार शुरू से ही इन वर्गों के लोगों के हकों के संरक्षण के लिए प्रयासरत रही है। उन्होंने कहा कि इस सरकार की शुरू से ही इन वर्गों के प्रति प्रतिबद्धता थी। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के एक आदेश के बाद विधेयक लाए जाने की पृष्ठभूमि का भी जिक्र किया और कहा कि जिस मंशा से मूल कानून बनाया गया था, उसे बहाल करने के लिए यह विधेयक लाया गया है।

इससे पहले चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस की कुमारी शैलजा ने कहा कि देश में दलितों के खिलाफ अपराध में वृद्धि हो रही है और हर 15 मिनट पर दलितों के खिलाफ कोई ने कोई अपराध होता है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि यह दलित हितैषी नहीं है औ इसकी कथनी व करनी में अंतर है। उन्होंने मांग की कि इस कानून को नौवीं अनुसूची में शामिल किया जाना चाहिए, नहीं तो इसे बार बार अदालतों में चुनौतियां दी जाएगी।

भाजपा के किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि संसद से पारित कानून को न्यायपालिका ने बदल दिया। उन्होंने न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए स्थापित कालेजियम व्यस्था पर आपत्ति जताते हुए इसे खत्म करने की मांग की। उनकी एक टिप्पणी पर कांग्रेस सहित कई अन्य दलों ने आपत्ति जतायी और इस वजह से दोपहर करीब ढाई बजे बैठक 10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। बैठक फिर शुरू होने पर सभापति एम वेंकैया नायडू ने उनकी टिप्पणी के एक हिस्से को कार्यवाही से निकाल दिया और फिर सदन सुचारू रूप से चला।

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