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धार्मिक कट्टरता का आतंकवाद खत्म हो

फ्रांस में दो हफ्ते के दौरान दो भीषण आतंकी हमले यह बताते हैं कि आतंकवाद अब पूरी दुनिया में अपनी दहशत कायम कर चुका है। फ्रांस में एक टीचर का दोष इतना था कि एक पत्रिका में छपे पैगंबर के कार्टून को बच्चों को दिखा दिया था। इसके बाद एक चर्च में एक महिला का सिर कलम कर दिया गया।

वहीं दो और लोगों को इसी प्रकार मौत के घाट उतार दिया गया। अपराधी ने ऐसा करने से पहले धार्मिक नारे लगाए। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे ‘इस्लामिक आतंकवाद’ की संज्ञा देते हुए इसके खिलाफ युद्ध का ऐलान किया। यह मामला वास्तव में बेहद संगीन है, और इसकी आंच भारत तक भी पहुंच गई है।

देशभर में फ्रांस के राष्ट्रपति के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं, वहीं अब फ्रांस के उत्पादों के बहिष्कार का मुस्लिम समाज के नेताओं ने आह्वान किया है। इस पूरे घटनाक्रम में भारत सरकार का फ्रांस के साथ खुलकर सामने आना उस दर्द को बांटने जैसा है, जोकि वह आजादी के बाद से ही अपने पड़ोसी देश की ओर से भुगत रहा है।

धार्मिक आधार पर भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ था, इसके बाद भारत जहां एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र बन गया वहीं पाकिस्तान एक धार्मिक कट्टरपंथी देश। इसके बाद से धर्म के नाम पर पाकिस्तान आतंकवाद का जैसा नंगा नाच कर रहा है, उसे देखकर भी अनदेखा कर दिया जाता है। पूरे विश्व में जितने भी आतंकी संगठन संचालित हैं, उनके सरगना एक धर्म विशेष से जुड़े लोग हैं।

इन लोगों की आलोचना करने के बजाय हम इनके बुरे कृत्यों का समर्थन करते हैं, भारत समेत किसी भी अन्य देश में फ्रांस में हुई नृशंस हत्याओं का गैर मुस्लिम समाज ने विरोध नहीं किया है, अपितु फ्रांस सरकार की अपने यहां ऐसी वारदातों की रोकथाम के लिए उठाए जा रहे कदमों की आलोचना ही की जा रही है। आखिर इसे धार्मिक कट्टरता नहीं कहा जाएगा तो और क्या कहेंगे।

बेशक, किसी भी धर्म का अमर्यादित चित्रण, व्याख्या जनभावनाओं को भडक़ाने वाला और कानूनी रूप से अनुचित ही समझा जाएगा लेकिन इसमें भी शासन-प्रशासन के जरिए शिकायत और आगे की कार्रवाई की गुंजाइश होनी चाहिए। यह कहां का न्याय है कि बदले की आग में जलते हुए किसी का सिर ही कलम कर दिया जाए।

दरअसल, फ्रांस में जो भी वारदातें घटी हैं, वे बेहद शर्मनाक और मानवता पर कलंक हैं। आज विश्व में धर्म के नाम पर जो उग्र विचारधारा कायम हो गई है, वह खतरनाक है। आज इसके निशाने पर सिर्फ फ्रांस नहीं है, अपितु दूसरे वे देश भी हैं जहां धर्मनिरपेक्षता कायम है। इस घटनाक्रम के बाद तुर्की के राष्ट्रपति ने जिस प्रकार का घोर कट्टरतावादी और गैरजिम्मेदाराना बयान दिया था, वह अब इतिहास में दर्ज हो चुका है।

आखिर पूरे विश्व में मुस्लिम समाज के लोग इतने भयभीत क्यों हैं, दुनिया में अनेक धर्म हैं। अपनी-अपनी रवायतों के अनुसार लोग उनसे बंधे हुए हैं और जीवन यापन कर रहे हैं। इतनी कट्टरता आखिर किसको फायदा पहुंचाती है। भारत में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ जिस प्रकार के प्रदर्शन पूरे देश में देखने को मिले थे, वे हैरान करने वाले थे। कानून के खिलाफ बुजुर्ग, बच्चे, महिलाएं हर कोई सडक़ पर था।

क्या इसे भी धार्मिक कट्टरता का उदाहरण नहीं माना जाना चाहिए। इस कानून के जरिए भारत ने अगर गैर मुस्लिमों को नागरिकता देना चाहा है तो इसमें क्या गलत है। अब फ्रांस के खिलाफ तुर्की, पाकिस्तान, बांग्लादेश से लेकर लेबनान और अन्य मुस्लिम देशों में गुस्सा उबल रहा है, जबकि इसकी पूरी तरह अनदेखी की जा रही है कि इस मसले का हल शांतिपूर्ण तरीके से एवं न्यायपूर्ण तरीके से निकाला जाए।

यह भी एक सवाल है कि अगर गैर मुस्लिम धर्मों के किसी प्रतीक, गुरु, देवी-देवता पर ऐसी टिप्पणी हो जाती है तो क्या वे भी हिंसक होकर किसी का सिर कलम कर देते हैं? भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में तो साधुओं की निर्मम हत्या हो जाती है लेकिन इसके बाद भी सरकार कार्रवाई करने से पैर पीछे खींचती रहती है, हालांकि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे करवा दिए जाते हैं। इसे हठधर्मिता और कट्टरपने की हद ही कहा जाना चाहिए।

वैसे भी प्रत्येक धर्म के गुरु दुनिया को इंसानियत, प्यार-सौहार्द जैसे सबक ही देते आए हैं। यह उनके अनुसरणकर्ताओं पर है कि वे इस सीख को किस प्रकार से लेते हैं। अगर धर्म सच्ची शिक्षाओं पर आधारित है तो कोई कितनी भी बुराई कर ले, उसको कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा, तब उस धर्म के मानने वालों का यह डर कोई वजूद नहीं रखता है कि उनके धर्म पर हुए हमले से उनका अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा।

वास्तव में धर्म की ठेकेदारी लेकर रखने वाले लोग ही ऐसे अपराधों का आधार तैयार करते हैं जिसमें किसी का सिर कलम कर दिया जाए। धर्म के अंदर तो सागर से भी ज्यादा गहराई होती है, उसका आदर्श किसी की जान लेना नहीं अपितु जान बख्शना और सही राह दिखाना होता है। खैर, ऐसी सीख उन्हीं के लिए हो सकती है जोकि इतनी रहमदिली रखते हैं। जो नहीं समझते उनके खिलाफ निर्णायक लड़ाई का वक्त आ चुका है। पूरी दुनिया में आतंकवाद जोकि किसी भी प्रकार का है, के खिलाफ समान सोच के देशों को एकजुट होना चाहिए और उसका खात्मा करना चाहिए।

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