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नवंबर तक सरकारी स्कूलों में 12वीं के स्टूडेंट्स को मिलेंगे स्मार्ट फोन
नवंबर तक सरकारी स्कूलों में 12वीं के स्टूडेंट्स को मिलेंगे स्मार्ट फोन

पंजाब कैबिनेट का फैसला : नवंबर तक सरकारी स्कूलों में 12वीं के स्टूडेंट्स को मिलेंगे स्मार्ट फोन

1.73 लाख स्मार्ट फोन बांटने का रास्ता साफ

चंडीगढ़। पंजाब कैबिनेट ने बुधवार को सरकारी स्कूलों में पढ़ते वाले स्टूडेंट्स (जो इस वर्ष कोविड महामारी के मद्देनजर ऑनलाइन ढंग से 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं) को नवंबर महीने तक 1,73,823 स्मार्ट फोन बांटने का फैसला किया है। इससे पहले 50 हजार फोनों की पहली खेप राज्य सरकार को हासिल हो चुकी है और इनका वितरण जल्द ही शुरू किया जायेगा। इन फोनों में कई स्मार्ट फीचर जैसे कि टच स्क्रीन, कैमरा और पहले से मौजूद सरकारी ऐप्लीकेशनों जैसे कि ‘ई-सेवा ऐप, जिसमें स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा मंजूरी प्राप्त 11वीं और 12वीं कक्षा का ई-पाठ्यक्रम शामिल होगा, को शामिल किया गया है।

एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि दूसरी खेप जल्द ही हासिल कर ली जायेगी और इन स्मार्ट फोनों के वितरण की सारी प्रक्रिया नवंबर महीने तक पूरी कर ली जायेगी। कैबिनेट द्वारा इस बात का नोटिस लिया गया कि अकादमिक वर्ष 2020-21 के पहले चार महीने कैंपस में नियमित रूप से लगने वाली क्लासों के बिना ही गुजर गए हैं और जबकि प्राईवेट स्कूल ऑनलाइन क्लासें ले रहे हैं तो सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों खासकर 12वीं कक्षा में पढऩे वालों को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।

‘पढ़ाई का न हो नुकसान’
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि हमने कुछ दिन पहले स्मार्ट फोने बांटने का ऐलान कर दिया था। परन्तु अब 12वीं कक्षा के सरकारी स्कूलों में पढ़ते विद्यार्थियों और छात्राओं जिनके पास ऑनलाइन क्लास लगाने के लिए सहायक होने वाले स्मार्ट फोन नहीं हैं, दोनों को ही स्मार्ट फोन बांटे जाएंगे। ऐसा यह यकीनी बनाने के लिए किया गया है कि कोविड महामारी के समय के दौरान इन विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान न हो।

मुलाजिमों को स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में लाने को मंजूरी
आयुषमान भारत-सरबत सेहत बीमा योजना को एक साल के लिए बढ़ाते हुए पंजाब मंत्रिमंडल द्वारा बुधवार को राज्य सरकार के कर्मचारियों, पैंशनरों और प्राईवेट क्षेत्र , बोर्ड और निगमों समेत गैर सरकारी संगठित क्षेत्रों के मुलाजिमों को भी स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में लाने का फैसला किया गया।

स्वास्थ्य एवं परिवार क्ल्याण विभाग को कहा गया है कि इस स्कीम के घेरे में नये वर्गों को शामिल करने के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार करे जिससे 42.27 लाख गरीब और अन्य परिवारों को प्रति परिवार पाँच लाख रुपए का बीमा कवर दिया जायेगा। मंत्रीमंडल के फैसले के अनुसार स्कीम अब 20 अगस्त 2020 से 19 अगस्त 2021 तक बढ़ा दी गई है।

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की मीटिंग के बाद प्रवक्ता ने बताया कि इस समय स्कीम अधीन 42.27 लाख परिवार कवर किये गए हैं जबकि 2011 के सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना के अनुसार 14.86 गरीब परिवारों की पहचान की गई है। बाकी बचते 16.30 लाख परिवार स्मार्ट राशन कार्ड धारक और 11.30 लाख जे.फॉर्म धारक किसान, तोल पर्ची वाले गन्ना काश्तकार, निर्माण कामगार, मान्यता प्राप्त पत्रकार और छोटे व्यापारियों के परिवार हैं।
जिक्रयोग्य है कि मंत्रीमंडल द्वारा आयुषमान भारत-सरबत सेहत बीमा योजना की 20 अगस्त 2020 से 19 अगस्त 2021 तक बढ़ाने की अगली नीति योजना को टैंडर्ड प्रीमियम 1100 रुपए प्रति परिवार प्रति साल पर मंजूरी दे दी गई जो टैंडरिंग प्रक्रिया के द्वारा चुनी गई इफको-टोकीयो जनरल इंश्योरैंस कंपनी लिमिटेड द्वारा दिया गया है।

प्रीमियम की कुल अनुमानित कीमत 1100 रुपए प्रति परिवार प्रति साल के हिसाब से 464.98 करोड़ रुपए बनती है। इस रकम का भुगतान केंद्र, राज्य सरकार और हिस्सेदार विभागों (पंजाब मंडी बोर्ड, भवन एवं निर्माण वर्कर क्ल्याण बोर्ड, आबाकारी और कर विभाग, पनमीडिया) द्वारा क्रमवार 98.07 करोड़ रुपए, 244.17 करोड़ रुपए और 122.18 करोड़ रुपए साझे रूप से किया जायेगा।

घरेलू उत्पाद का 2 प्रतिशत अतिरित ऋण प्राप्त करने के लिए लाइसेंस नवीनीकरण की स्वचालित सुविधा की मंजूरी
वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान राज्य के सकल घरेलू उत्पदा के 2 प्रतिशत तक अतिरिक्त ऋण प्राप्त करने के योग्य बनने और व्यापार करने को और आसान बनाने के लिए कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व में पंजाब सरकार द्वारा उद्योगों के लिए लाइसेंस नवीनीकरण और इलेक्ट्रॉनिक / डिजिटल माध्यम के जरिये रजिस्टरों के रख-रखाव के लिए स्वचालित सुविधा की आज्ञा का फैसला लिया गया है।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंस के द्वारा पंजाब मंत्रिमंडल की बुधवार को हुई मीटिंग के दौरान फैक्ट्रीज ऐक्ट,1948 और पंजाब फैक्ट्री नियम 1952 में आवश्यक संशोधनों को मंजूरी दी गई।नये नियमों के अनुसार, लाइसेंस का डिजिटल तौर पर स्वचालित विधि के द्वारा एक वर्ष के लिए नवीनीकरण किया जायेगा, यदि लाइसेंस के विवरणों में पिछले वर्ष जारी /नवीनीकृत लाइसेंस की अपेक्षा या सरकार द्वारा निर्धारित अन्य शर्तों में कोई बदलाव नहीं है। यह फैसला भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा 2020-21 में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद के 2 प्र्रतिशत तक अतिरिक्त ऋण प्राप्त करने के लिए योग्यता की खातिर जारी निर्देशों के अनुसार है जिसके अंतर्गत राज्य द्वारा विशेष राज्य स्तरीय संशोधनों को 31 जनवरी, 2021 तक लागू किया जाना लाजिमी है।

व्यापारिक संस्थानों के लिए जरुरी सर्टीफिकेटों /लाइसेंसों का स्वचालित तौर पर नवीनीकरण इन संशोधनों में से एक है। प्रवक्ता ने बताया कि 2 प्रतिशत अतिरिक्त ऋण प्राप्त करने के लिए स्वचालित मंजूरियां मुहैया करवाने के लिए नियमों में बदलाव अनिवार्य थे।

कोविड के विरुद्ध लड़ाई में राज्य ने खर्च की गई 501.07 करोड़ की राशि मंजूर
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व में मंत्रीमंडल ने आज कोविड-19 महामारी के विरुद्ध लड़ाई में राज्य सरकार द्वारा अब तक खर्च की गई 501.07 करोड़ की राशि को मंजूरी दे दी है। यह खुलासा करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि 501.07 करोड़ रुपए में से 76.07 करोड़ रुपए स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रबंधन और खरीद समिति द्वारा विभिन्न उपकरणों की खरीद और राहत पर खर्च किए गए हैं जबकि 425 करोड़ रुपए अलग-अलग विभागों द्वारा स्टेट डिजासटर रिस्पांस फंड और बजट स्रोतों में से महामारी के प्रबंधन और इस पर काबू पाने के लिए खर्च किए गए।

अलग-अलग विभाग द्वारा खर्च किए गए 425 करोड़ संबंधी विस्तार में जानकारी देते हुए प्रवक्ता ने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार क्ल्याण विभाग द्वारा 131.99 करोड़, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान द्वारा 36.16 करोड़ रुपए, ट्रांसपोर्ट द्वारा 3.77 करोड़, सूचना एवं लोक संपर्क विभाग द्वारा 10.12 करोड़, ग्रामीण विकास द्वारा 10.11 करोड़, सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास द्वारा 14.04 करोड़, लोक निर्माण विभाग द्वारा 45.05 करोड़, जेल विभाग द्वारा 0.11 करोड़ रुपए, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा 78.2 करोड़ रुपए, डिप्टी कमीश्नरों द्वारा राज्य में कोविड केयर सेंटरों के विकास, संचालन और रख-रखाव के लिए 12.65 करोड़ रुपए, जलापूर्ति एवं स्वच्छता विभाग द्वारा 4.86 करोड़, गृह विभाग द्वारा 3.62 करोड़, स्थानीय निकाय द्वारा 8.79 करोड़ और डिप्टी कमीश्नरों द्वारा 65.22 करोड़ खर्च किए गए हैं।

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