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पंजाब मंत्रिमंडल: आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए घरों के निर्माण के लिए नयी नीति को मंजूरी

पंजाब मंत्रिमंडल: आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए घरों के निर्माण के लिए नयी नीति को मंजूरी

Punjab Cabinet: चंडीगढ़। पंजाब मंत्रिमंडल ने आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों (ई.डब्ल्यू.एस.) के लिए मकान निर्माण संबंधी नयी नीति को आज मंजूरी दी ।

इससे ऐसे वर्गों के लिए 25 हज़ार से ज्यादा मकानों के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। इस नीति के अंतर्गत डेवलपर्स और ई.डब्ल्यू.एस हाऊसिंग के लिए प्रोजैक्ट क्षेत्र का पांच फ़ीसदी निर्माण अपेक्षित होगा। इन घरों का निर्माण उचित आकार के स्थानों में किया जायेगा जिसमें सामाजिक बुनियादी ढांचा मुहैया कराया जा सके ।

इस आशय का निर्णय मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।
इस नयी नीति के अंतर्गत घरों के निर्माण ब्रिकलैस तकनीक के द्वारा होगा जिसके लिए योग्य प्रोजैक्ट प्रबंधन एजेंसियों (पी.एम.एज़) की सेवाएं ली जाएंगी।

ग्रामीण युवकों के लिए मिनी बस परमिट नीति का ऐलान

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने समय सीमा रहित मिनी बस परमिट पॉलिसी का ऐलान किया है । इसके अंतर्गत ग्रामीण नौजवानों के लिए ऐसे परमिट अप्लाई करने के लिए कोई समय-सीमा नहीं है। इस मौके पर कैप्टन सिंंह ने ड्राइविंग लाइसेंस की घर-घर डिलीवरी समेत राज्य परिवहन विभाग के हाई-टेक इंस्टीट्यूट की आधारशिला रखी।

मुख्यमंत्री ने ‘घर-घर रोजग़ार और कारोबार’ मिशन को आगे बढ़ाते हुये ग्रामीण युवाओं के लिए 3000 मिनी बस परमिटों के वितरण की वर्चुअल शुरुआत की और सांकेतिक रूप में पाँच लाभार्थियों को परमिट दिए। उन्होंने कहा कि आज तीन हजार परमिट सौंपे जा रहे हैं और आगे भी 8000 और परमिट जारी होंगे जिससे साल के अंत तक 11000 परमिट बाँटे जाएंगे और इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजग़ार के मौके पैदा होंगे।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने ट्रांसपोर्ट विभाग को सभी बस परमिटों के आवेदनों की प्राप्ति और अगली प्रक्रिया के लिए अगले तीन महीनों में उपयोगकर्ता-अनुकूल ऑनलाइन सुविधा सृजन करने की हिदायत की जिससे इस प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जा सके।

परिवहन मंत्री रजि़या सुल्ताना और विभाग के अधिकारियों को बधाई देते हुए कैप्टन सिंह ने कहा कि उन्होंने ग्रामीण नौजवानों के लिए रोजग़ार के मौके पैदा करने, महिलाओं और बच्चों के लिए यात्रा को और ज्यादा सुरक्षित बनाने, यात्रियों और पैदल चलने वालों के लिए वाहनों की सुरक्षित यातायात यकीनी बनाने, वाहनों के प्रदूषण को घटाने और सरकारी सेवाओं की घर-घर पहुँच जैसे उद्देश्यों की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।

उन्होंने कहा कि 15.50 करोड़ रुपए की लागत से व्हीकल लोकेशन ट्रेकिंग (जी.पी.एस.) डिवाइस प्रोजैक्ट महिलाओं और बच्चों के लिए यात्रा को और ज्यादा सुरक्षित बनाएगा। पनबस की 100 प्रतिशत बसों और पी.आर.टी.सी. की 50 प्रतिशत बसों में पहले ही ऐसे उपकरण लगाए जा चुके हैं और अगले छह महीनों के अंदर सभी पी.आर.टी.सी. बसों में यह उपकरण लगा दिए जाएंगे। प्राईवेट बसों में भी जल्द ही जी.पी.एस. सिस्टम लगाए जाएंगे।

पंजाब की जेलों में सुरक्षा मज़बूत करने तथा अपराध पर काबू पाने के लिए प्रिज़न एक्ट में संशोधन

पंजाब मंत्रिमंडल ने जेल एक्ट 1894 में संशोधन करने को मंजूरी दी है ताकि जेलों में कैदियों द्वारा अंजाम दिए जाने दंगा-फ़साद, जेल से भागना और जेल अनुशासन और नियमों का उल्लंघन जैसे अपराधों के लिए सख़्त सज़ा दी जा सके और जेलों की सुरक्षा मज़बूत की जा सके।

इस आशय का फैसला मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया । यह संशोधन करने के लिए एक बिल विधानसभा के बजट सत्र में लाया जायेगा। उपरोक्त एक्ट में नये दंडात्मक प्रावधानों को जोडऩे के लिए जेल विभाग द्वारा पेश किये गये प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी गई जिससे जेलों की सुरक्षा मज़बूत की जा सके और कैदियों द्वारा मोबाइल फोनों का प्रयोग, जेलों में दंगा-फ़साद, जेल अमले की मारपीट, जेल को नुक्सान पहुंचाना और जेलों से भागने के अलावा नशीले पदार्थ रखने जैसे जुर्मों पर काबू पाया जा सके।

जेल अनुशासन का उल्लंघन करने के अपराध में कम-से-कम तीन साल की कैद और अधिक से अधिक सात साल या जुर्माने के प्रावधानों को मंज़ूरी दी गई है।

अन्य फैसले में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और मैडीकल शिक्षा एवं अनुसंधान विभागों के कामन काडर का विभाजन करने की मंजूरी दी । इसका उद्देश्य दोनों विभागों की कंट्रोलिंग आथारिटी और नियमों के विभाजन के द्वारा इन दोनों विभागों के बीच काडर के मामलों के साथ विवाद के हल में तेजी लाना है।

ज्ञातव्य है कि पंजाब के अस्तित्व के समय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और मैडीकल शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग एक ही विभाग थे और साल 1945 के नियम सांझे थे। बाद में मैडीकल शिक्षा एवं अनुसंधान और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अलग-अलग हो गए ।

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