Saturday, September 21, 2019
Breaking News
Home » पंजाब » प्रताप बाजवा को नहीं पता कि वह क्या बोल रहा : कैप्टन

प्रताप बाजवा को नहीं पता कि वह क्या बोल रहा : कैप्टन

सीबीआई से बरगाड़ी केस वापस लेने का मामला

चंडीगढ़ पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने बरगाड़ी बेअदबी केस सी.बी.आई. से वापिस लेने के नाजुक और संवेदनशील मामले पर कांग्रेसी सांसद प्रताप सिंह बाजवा द्वारा एडोवेकट जनरल (ए.जी.) कार्यालय पर राज्य सरकार और विधानसभा के सदन को गुमराह करने के लगाऐ दोषों को सिरे से रद्द कर दिया है। शुक्रवार को यहां जारी बयान में कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने बाजवा द्वारा मीडिया के एक हिस्से में दिए बयान को आड़े हाथों लेते हुये कहा कि वह या तो इस मामले से अनजान है या फिर जानबुझ कर शरारत की गई है और उन्होंने इसको पूरी तरह आधारहीन बताया।

सी.बी.आई. केस वापस लेने के मामले संबंधी मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह फ़ैसला विधानसभा के सदन द्वारा लिया गया था जो मेरिट के आधार पर और एडवोकेट जनरल कार्यालय की सिफारशों के अनुसार था। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार द्वार पंजाब के हितों को ध्यान में रखते हुये केंद्रीय एजेंसी से केस वापस लेने सम्बन्धी सदन में प्रस्ताव लाने से पहले ए.जी. कार्यालय की सलाह माँगी गई थी।

उन्होंने बताया कि इस सम्बन्धी ए.जी. की सिफारशें या रिपोर्ट को सदन में पेश नहीं किया गया था बल्कि इस सम्बन्धी मेरिट के आधार पर सहमति के साथ स्वतंत्र फ़ैसला लिया गया था। उन्होंने कहा कि बाजवा को इसका कोई ज्ञान या जानकारी नहीं कि ए.जी. ने क्या सिफ़ारिश की थी। एम.पी. द्वारा लगाऐ गए दोष सरासर बेबुनियाद और तथ्यों के बिना हैं। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि यह स्पष्ट है कि सांसद ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के फ़ैसले को जाँच की ज़रूरत नहीं समझी जबकि सी.बी.आई. से केस वापस लेने संबंधी राज्य सरकार के फ़ैसले की कानून हैसियत को अदालत ने भी कायम रखा।

हाईकोर्ट ने 25 जनवरी, 2018 को दिए फ़ैसले में साफ़ तौर पर सी.बी.आई से जांच वापस लेने में राज्य सरकार की कार्यवाही की कानूनी हैसियत को कायम रखा था और यहाँ तक कि एस.आई.टी. में भरोसा ज़ाहिर किया था। मुख्यमंत्री ने इस बात की तरफ भी ध्यान दिलाया कि सी.बी.आई. ने इस फ़ैसले को चुनौती नही दी। इस कारण इस कार्यवाही की कानूनी हैसियत के सम्बन्ध में अब कोई सवाल पैदा नहीं होता। मुख्यमंत्री ने बाजवा की तरफ से लोगों को गुमराह करने के इरादों के साथ बयानों के द्वारा गलतफहमियां पैदा करने की की गई कोशिशों की सख्त आलोचना की। अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा,”तत्काल केस में राज्य पुलिस द्वारा एफ.आई.आरज़Ó पहले ही दजऱ् की जा चुकी हैं और साल 2015 में जारी किये गये नोटिफिकेशन सी.बी.आई से स्पष्ट रूप में बयान की गई एफ.आई.आरज़Ó के अलावा केस दर्ज करने की आम शक्तियां नहीं हैं। इस कारण नोटिफिकेशन के अमल को वापस लेने की सहमति का सवाल नहीं उठता। दोरजी मामले में जारी हुए नोटीफिकेशनों के संदर्भ में स्पष्ट विभिन्नताएं देखी जा सकती हैं।

Check Also

उद्योग विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने दिए मुख्यमंत्री राहत कोष में 8 लाख 25 हजार रुपए

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री ने मुख्यमंत्री को चैक सौंपा चंडीगढ़। पंजाब के उद्योग एवं वाणिज्य …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Share
See our YouTube Channel