Home » हरियाणा » काला आंब के लोग नरकीय जीवन जीने को मजबूर

काला आंब के लोग नरकीय जीवन जीने को मजबूर

वर्षा के मौसम में हालात और खराब, महामारी फैलने का डर

नारायणगढ़। मारकंडा नदी के तट पर स्थित गांव काला आम्ब (डेरा) के लोग नरकीय जीवन जीने के लिए मजबूर हो रहे। करीब 12800 की जनसंख्या वाले गांव में स्वच्छता सेवाएं ना के बराबर हैं, काला आम्ब को अगर गन्दगी की नगरी कहा जाये तो कोई अतिश्योक्ति नही होगी। जहां काला आम्ब में खाली प्लाटों में गन्दगी की भरमार है। वहीं बरसात के दिनों में खाली प्लाटों में पानी खड़ा होने से महामारी फैलने का खतरा भी पैदा हो गया है। ग्रामीणों द्वारा ग्राम पंचायत व उच्चाधिकारियों को बार-बार शिकायतें देने के बावजूद काला आम्ब में दिन बा दिन बढ़ रही समस्याओं का कोई समाधान नही हो पा रहा हैं। यहीं नहीं साढ़ौरा रोड पर स्थित शिवालिक कालोनी में जाने के लिए रास्ता कच्चा हैं, बरसात के दिनों में लोगों का सड़क से अपने घर में जाना किसी जंग जीतने से कम नहीं हैं। अगर उच्चाधिकारी काला आम्ब गांव का दौरा करें तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत व मनोहर लाल सरकार की स्वच्छ हरियाणा स्वस्थ हरियाणा के नारे की पोल खुलती नजर आयगी।

सुनीता भण्डारी व गीता शर्मा ने कहा कि गलियों व नालियों की सफाई ना होने के कारण खाली प्लाट में जहां गन्दगी के ढेर लगे रहते हैं वहीं बरसात के मौसम में खाली प्लाटों में पानी जमा हो जाता हैं जिस कारण मच्छारो की भरमार हो गई जिस चतले महामारी फैलने का खतरा बना हुआ हैं। उनकी मांग हैं कि प्रशासन जल्द से जल्द शिवालिक कालोनी काला आम्ब में व अन्य कालोनियेां में स्वच्छता अभियान चलाकर व फोगिंग करवाकर उन्हें राहत प्रदान करे।

जब इस बारे सरपंच अशोक सैनी से बात की गई तो उन्होंने माना हैं कि काला आम्ब में सफाई को लेकर परेशानी आ रही हैं उन्होंने बताया कि उनके पास एक ही सफाई कर्मी हैं और गांव में 8 कालोनियें हैं और उनके पास प्राप्त धन राशि भी नही हैं जो थोडी बहुत सरकार से आती हैं वह कालाआम्ब का क्षेत्र बडा होने के कारण पर्याप्त नही हैंं। सफाई कर्मचारियों की संख्या बढाने बारे पुछा गया तो उन्होंने बताया कि उनके गांव जनसंख्या करीब 2800 मुल निवासियों की व 10 हजार संख्या किरायेदारो की हैं और वोट करीब 1200 हैं जिस कारण उनकी मुल निवासीयों की जनसंख्या 2800 होने के कारण उन्हें बीडीपीओं विभाग द्वारा अन्य सफाई कर्मचारी रखने की मन्जुरी नही हैं। गलियों से उच्ची बनी नालियों के जवाब पर उनका कहा था कि उन्होंने गलियों व नालियों का सही निर्माण करवाया था लेकिन मकान मालिकों ने स्वयं ही नालियों को गलियों से उपर बना दिया हैं। उन्होंने कहा कि करीब 7 कालोनों की दशा सुधारने के लिए करोड की राशि की आवश्यकता हैं जिसे प्रत्येक कालोनी में जरूरत अनुसार विकास करवाया जा सके।

हालात पहले से भी बदतर

शिवालिक कालोनी वासी गीता शर्मा ने बताया कि यहां पर वें 20-25 साल से रह रही हैं ओर कालोनी के हालत जो वर्षो पहले थे आज भी हालात सुधरने की बजाये बिगडते जा रहे हैं। उनका कहना था कि पंचायत द्वारा जो गलियें बनाई कई हैं उनमे पानी की निकासी सही ना होने के कारण बरसात के मौसम में पानी गलियों में खडा रहता हैं और उनका घरो से निकलना दुश्वार हो जाता हैं।

गली बनवाने का सपना संजाये चल बसे बुजुर्ग

मीडिया से बात करते हुए सुनीता भण्डारी व गीता शर्मा ने बताया कि वैसे तो काला आम्ब में बनी सभी कालोनियों समस्याओं का अम्बार लगा हैं लेकिन वार्ड नम्बर 4 में पडने वाली शिवालिक कालोनी की हालत सबसे खराब हैंं। सुनीता भण्डारी ने बताया कि वे इस कालोनी में करीब 28 साल से रह रही हैं और उनकी गली कच्ची हैं व खाली पडे प्लाटो में गन्दगी की भरमार है व बरसात के दिनों में तो स्थिति ओर खराब हो जाती हैं जिसको लेकर उन्हें कई बार ग्रांम पंचायत व उच्चाधिकारियों से गुहार लगाई लेकिन उनकी समस्या का कोई समाधान नही हुआ। उनका यह भी कहना था कि जिन लोगों ने मकान बनाकर किराये पर दिए हुए हैं उनके घर की गलियें पक्की बन चुकी हैं लेकिन 28 साल से वे यहां अपने परिवार के साथ अपने स्वयं के मकान में रह रही हैं लेनिक आज तक उनकी गली पक्की नही बनी। सुनीता का यह भी कहना था कि जब उनके पिता जी जीवित थे तो उन्होंने कई बार गली को बनवाने का अनुरोध किया लेकिन आज तक नही बनी हैं

Check Also

सदैव राष्ट्र का हिस्सा बन अटल जी अशरीरी रूप से देश के प्रगति पथ को आलोकित करते रहेंगे: गहलावत

चेयरपर्सन व कार्यकर्ताओं ने वाजपेयी की फोटो पर पुष्पांजलि कर उन्हें दी श्रद्धांजलि राई। पूर्व …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Share
See our YouTube Channel