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पवन बंसल ने जीता हाईकमान का भरोसा

कांग्रेस ने पंजाब और चंडीगढ़ को लेकर अपने 7 लोकसभा उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। इनमें से ज्यादातर नाम वहीं हैं, जिनके लिए शुरू से चर्चा चल रही थी और जिन्हें टिकट का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। पंजाब में चार मौजूदा सांसदों पर पार्टी ने भरोसा जताया है वहीं चंडीगढ़ में पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल ने पार्टी हाईकमान का भरोसा जीता है। बंसल के सामने इस बाद दो प्रमुख दावेदार थे लेकिन इसके बावजूद पार्टी ने उनके बैकग्राउंड और काम को तरजीह दी, इसके बाद चंडीगढ़ में मुकाबला कमजोर नहीं रहा है। माना जा रहा था कि बंसल को टिकट न देने की सूरत में कांग्रेस जिस भी उम्मीदवार को खड़ा करती वह भाजपा उम्मीदवार के सामने कमजोर ही रहता। यहां बसपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन को अपना उम्मीदवार बनाया है, धवन ने भाजपा से पाला बदल कर बसपा को ज्वाइन किया था, अब उनका कहना है कि कांग्रेस ने बंसल को टिकट देकर उनका काम आसान कर दिया है। हालांकि संभव है इसी तरह की बातें भाजपा उम्मीदवार की तरफ से भी कही जाएं। बयानों के इन तीरों के बावजूद इतना तय है कि इस बार चंडीगढ़ में फिर राजनीति का चरम देखने को मिलेगा।

पंजाब में पार्टी ने अमृतसर, गुरदासपुर, जालंधर, लुधियाना, पटियाला और होशियारपुर सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए हैं। ये सभी सीटें हमेशा चर्चित रही हैं और यहां हैवीवेट उम्मीदवारों को ही जगह मिलती रही है, इस बार भी पार्टी ने ऐसा ही किया है। पटियाला से मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की पत्नी परनीत कौर को फिर से टिकट तय था, पिछली बार यहां से आम आदमी पार्टी ने जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार न आप का वह जलवा है और न ही पार्टी के अंदर जोश। संभव है इससे महारानी परनीत कौर की राह आसान हो गई है। गौरतलब है कि अमृतसर से पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिंद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू को टिकट देने की चर्चा थी, उन्होंने चंडीगढ़ में भी अपना प्रचार अभियान चलाया हुआ था और वे यहां से चुनाव लडऩा चाहती थी, लेकिन पार्टी ने उन्हें न चंडीगढ़ से टिकट दिया है और न ही अमृतसर से। हालांकि अभी 13 में से 6 सीटों पर ही उम्मीदवार घोषित किए गए हैं, लेकिन पहली सूची में नाम नहीं होने से यह माना जा रहा है कि सिद्धू परिवार पार्टी हाईकमान की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया है। पाकिस्तान के साथ भारत के संघर्ष और कैबिनेट मंत्री सिद्धू के पाक के प्रति नरम बयानों की छाया इसकी वजह मानी जा रही है। उनके संबंध में अंतिम समय में फैसला हुआ, जब पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने उनके नाम का विरोध किया।

बताया गया है कि कांग्रेस के टिकटों के सिलेक्शन में एआईसीसी प्रदेश कांग्रेस के तर्कों से सहमत नहीं हुई, यही वजह है कि बाकी सीटों पर उम्मीदवारों के नाम की घोषणा नहीं हो सकी है। गुरदासपुर सीट पर पार्टी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ को उतारा है, उन्होंने यहां से भाजपा सांसद फिल्म अभिनेता विनोद खन्ना के निधन के बाद हुए उपचुनाव में पार्टी उम्मीदवार को भारी वोटों से हराया था, यह उसी का इनाम है कि पार्टी ने फिर से उन्हें उम्मीदवार बनाया है। लुधियाना से रवनीत सिंह बिटटू फिर पार्टी उम्मीदवार हैं, पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पौत्र रवनीत सिंह बिटटू साल 2014 में कांग्रेस विरोधी लहर के बावजूद चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे। खैर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच टिकटों को लेकर वैचारिक मतभेद की भी चर्चा है। कहा जा रहा है कि खडूर साहिब, फिरोजपुर, संगरूर, श्री आनंदपुर साहिब ऐसी सीटें हैं, जिन पर फैसला नहीं हो सका। आनंदपुर साहिब सीट से प्रदेश कांग्रेस किसी हिंदू को टिकट देने के हक में है, लेकिन हाईकमान इससे सहमत नहीं है, यहां से मनीष तिवारी को टिकट देने की चर्चा थी, लेकिन अब यह मुश्किल लग रहा है।

गौरतलब है कि चंडीगढ़ सीट पर देश भर की नजर रहती है, वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा ने किसी भी स्थानीय नेता को टिकट न देकर फिल्म अभिनेत्री किरण खेर को चुनाव लड़ाया था, इसकी वजह गुटबाजी को खत्म करना भी था, मोदी लहर में किरण खेर ने जीत भी हासिल की, हालांकि पांच साल उनके शहर में न रहने आदि के आरोप लगते रहे वहीं पार्टी के अंदर भी विरोध जारी रहा, बावजूद इसके शहर में व्यापारियों, कर्मचारियों और यातायात की समस्या के समाधान के लिए फलाईओवर आदि के निर्माण को मंजूरी दिला कर उन्होंने काफी गुडविल हासिल किया है। फिलहाल भाजपा की चुनाव समिति ने यहां के लिए उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, लेकिन पूर्व सांसद सत्यपाल जैन और प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन भी टिकट के लिए दावेदारी कर रहे हैं, ऐसे में पार्टी संभव है उम्मीदवार के चयन में फूंक-फूंक कर कदम रख रही हो। कांग्रेस उम्मीदवार पवन बंसल रेलगेट मामले में सीबीआई से क्लीन चिट हासिल कर चुके हैं, वे 2014 के चुनाव में भी उम्मीदवार थे, लेकिन तब से अब तक काफी पानी बह चुका है, प्रदेश कांग्रेस की उनके पीछे एकजुटता भी उनके पक्ष में जाती है। ऐसे में देखना है भाजपा क्या कदम उठाती है।

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