परमात्मा कर्ता है या अकर्ता : निरंकारी बाबा जी
Saturday, December 15, 2018
Breaking News
Home » धर्म / संस्कृति » परमात्मा कर्ता है या अकर्ता : निरंकारी बाबा जी
परमात्मा कर्ता है या अकर्ता  : निरंकारी बाबा जी

परमात्मा कर्ता है या अकर्ता : निरंकारी बाबा जी

कुछ विद्वान और संत परमात्मा को अकर्ता और उसकी शक्ति से प्रकृति को कत्र्ता मानते हैं। कुछ सवाल भी करते हैं कि परमात्मा कर्ता है या अकर्ता?परमात्मा अकर्ता है, पर कर्ता भी है, वास्तव में परमात्मा सुप्रीम एनर्जी (सर्वोच्च शक्ति) है, चेतन सत्ता है, एक ऐसी सत्ता, जो सृष्टि के कण-कण में इस प्रकार व्याप्त है कि इसके बिना कहीं एक पत्ता भी नहीं हिल सकता। इस परम सत्ता का विधान भी इसी की तरह अटल और निष्पक्ष है। यही कारण है कि परमात्मा के इस विधान ने कर्म करने की जो स्वतन्त्रता मनुष्य को प्रदान की हुई है, उसमें यह चेतन सत्ता किसी प्रकार भी बाधक नहीं बनती। इस प्रकार परमात्मा कर्ता होते हुए भी अकर्ता हो जाता है।

अब प्रश्न उठता है कि जब परमात्मा चेतन सत्ता है, तो वह हमें गलत काम करने से क्यों नहीं रोकता? हम जानते ही हैं कि आज वैज्ञानिकों ने सिद्ध कर दिया है कि एनर्जी स्वयं कोई काम नहीं करती, हालांकि सभी काम उसी के द्वारा होते हैं। एनर्जी के साथ जो इन्सटु्रमेन्ट लगाया जाता है, उपकरण लगाया जाता है, काम वह करता है। जैसे बिजली एक एनर्जी है। यह स्वयं कुछ नहीं करती, परन्तु इसके साथ अगर हीटर लगा दें तो गर्मी देने लगती है और कूलर लगा दें तो ठण्डक मिलने लगती है। यह ठण्डक, गर्मी या रोशनी आदि बिजली पर नहीं, इसके साथ जुड़े उपकरणों पर निर्भर करती है। भले ही ये सभी बिजली के कारण ही चलते है, लेकिन ये जो काम करते हैं, बिजली का उसमें कोई दखल नहीं। बिजली तो सबमें एक ही है। क्या आप यह चाहते हैं कि बिजली गर्मी दे तो ठंडक देने से इन्कार कर दे? ऐसा नहीं हो सकता।

इसी तरह की यह चेतन सत्ता है। यह स्वयं कुछ नहीं करती, इसके साथ जो जीव रूपी धारण उपकरण लगा होता है, उसके सूक्ष्म गुणों यानी इन्द्रियों, मन, बुद्धि, चित और अहंकार इत्यादि के द्वारा कर्म होते हैं। जीव को शक्ति तो यही चेतन सत्ता प्रदान करती है, लेकिन अपने गुणों में विचरते हुए वह स्वतंत्र रूप से कर्म करता है। उसमें यह सत्ता कोई दखल नहीं देती। जीव जैसा कर्म करता है, निरंकार-दातार के विधान के अनुसार वैसा ही फल भोगता है। कर्म की स्वतन्त्रता के इसी विधान के कारण यह सत्ता हमें कुछ भी करने से रोकती नहीं।

कुछ इंसान यह समझते हैं कि सन्तों महापुरुषों को कर्म का फल नहीं मिलता, तो क्या परमात्मा का विधान सबके लिए एक सा नहीं? ऐसी बात नहीं है। परमात्मा का विधान तो सब पर लागू होता है। जो कर्ता है, उसे कर्म का फल अवश्य भोगना पड़ेगा। चूंकि ब्रह्मज्ञानी में कर्ताभाव नहीं रहता, वह ईश्वरीय इच्छा में रहता है, उसने सब कुछ निरंकार-दातार को अर्पण किया होता है, इसलिए वह कर्मल के बंधन में नहीं आता। जैसे किसी के हाथ में लाठी हो और वह किसी को मार बैठे, तो लाठी का चालान नहीं होता, उसे कोई सजा नहीं मिलती। उस लाठी से अगर वह किसी की जान बचा लेता है तो भी लाठी को कोई इनाम नहीं मिलता। जो कर्म करता है, जिसमें कर्ताभाव है, वह अवश्य इस विधान के अन्तर्गत आता है।

ब्रह्मज्ञानी तो निरंकार-दातार के साथ जुड़ा होता है, उसने अपना सर्वस्व निरंकार को अर्पण किया होता है। इसलिए वह जो भी कर्म करता है, ईश्वरीय इच्छा को पूरा करने के लिए करता है। क्योंकि ईश्वरीय इच्छा कल्याण करने वाली है, सबका भला करने वाली है, इसलिए ब्रह्मज्ञानी के कर्म भी सबका भला करने वाले ही होते हैं, कल्याणकारी ही होते है। जब तक वह दातार से जुड़ा है, उससे बुरा कर्म हो ही नहीं सकता, और जब उससे कोई बुरा कर्म होता है, उस समय समझ लेना चाहिए कि वह निरंकार-दातार से जुड़ा हुआ नहीं। यह कर्म उसके अपने अहम् की करनी है। उसका फल ज्ञानी को भी अवश्य भोगना पड़ता है।

जग में रहते हुए, यहां समाज के जो भी कर्तव्य हैं, परिवार का पालन-पोषण आदि इन्हें ज्ञानी अनासक्त भाव से करता है। भक्त को तो कहा ही गया है कि वह कर्मयोगी होता है। इसके साथ कर्म भी जुड़ा हुआ है और इसके साथ योग भी जुड़ा हुआ है। ज्ञानी कर्म से कभी मुख नहीं मोड़ते, अपने जो फर्ज हैं, उनको अवश्य निभाते हैं, लेकिन ध्यान इस मालिक के साथ ही जुड़ा रहता है। कर्ता इसी को मानते हैं। दिलो-दिमाग जब इसकी तरफ लगा रहता है, तो भक्त को स्थिरता प्राप्त रहती है, क्योंकि जिसका आसरा लिया है, वह अडोल है। इसको भूल कर, इसको बिसार कर इस संसार में इन्सान न जाने क्या-क्या करता रहता है। यह आसरा (परमात्मा) जिस-जिस ने भी लिया है, वही वास्तव में पूर्ण भक्त बना है। जो समाज में, पानी में कमल की तरह, न्यारा रहा है, वही भक्त है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Share