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अन्य देशों के आयात शुल्क पर फिर भड़के ट्रंप

नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत अन्य देशों में कई अमेरिकी उत्पादों के लिए बेहद ऊंची आयात शुल्क की फिर आलोचना की है। भारत को बेहद ऊंची शुल्क दरों को आड़े-हाथों लेते हुए ट्रंप ने कहा कि वे भी भारतीय उत्पादों पर समान शुल्क लगाना चाहते हैं। भारत का उदाहरण देते हुए उन्होंने हर उस देश को खरी-खोटी सुनाई, जो अमेरिका में बिना शुल्क के सामान भेजने के बावजूद अमेरिकी सामानों पर बड़ा शुल्क लगाते है। उनका कहना था कि अगर भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में समान स्तर का शुल्क नहीं भी लगाया गया, तो भी कम से कम इतना जरूर होगा कि वे किसी भी उत्पाद को अमेरिका में बिना शुल्क के प्रवेश नहीं करने देंगे। वाशिंगटन डीसी के अर्ध-शहरी इलाके मेरीलैंड में कंजर्वेटिव पॉलिटिकल एक्शन कॉन्फ्रेंंस (सीपीएसी) को संबोधित करते हुए उन्होंने कई मोर्चे पर भारतीय नीतियों से एतराज जताया। राष्ट्रपति के रूप में अब तक के सबसे लंबे और दो घंटे से ज्यादा के भाषण में ट्रंप भारत को बहुत ज्यादा शुल्क लगाने वाला बताते रहे। उन्होंने कहा, ‘भारत बेहद उच्च शुल्कों वाला देश है। वह बहुत ज्यादा शुल्क वसूलता है।

ट्रंप ने एक बार फिर मशहूर अमेरिकी बाइक ब्रांड हार्ले डेविडसन का उदाहरण देते हुए कहा कि जब अमेरिका अपनी एक बाइक भारत भेजता है, तो वहां 100 फीसद का शुल्क लगाया जाता है। लेकिन जब भारत से हम बाइक का आयात करते हैं, तो उस पर हम कोई शुल्क नहीं लेते। अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना था कि होना यह चाहिए कि हम भी भारतीय उत्पादों पर उतना ही शुल्क लगाएं, जितनी वह हमारे उत्पादों पर लगाता है। लेकिन अगर ऐसा नहीं भी हुआ, तो इतना जरूर होगा कि हम बिना शुल्क के कोई सामान नहीं आने देंगे।

पिछले कई मौकों की तरह इस बार भी ट्रंप ने भारत जैसे कई देशों के आयात पर समान शुल्क नहीं लगा पाने के पीछे सीनेट सांसदों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि जिन देशों में अमेरिकी उत्पादों पर बहुत ज्यादा शुल्क है, उनके यहां से आने वाले सामानों पर जब भी शुल्क लगाने की बात आती है, तो कई सीनेटर इसके विरोध में माहौल बनाने लगते हैं।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व को भी निशाने पर लिया। राष्ट्रपति ने कहा कि डॉलर की मजबूती के चलते अमेरिका की स्पर्धात्मकता प्रभावित हो रही है और यह सब यूएस फेडरल रिजर्व की गलत नीतियों की वजह से हो रहा है।

यूएस फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल की तीखी आलोचना करते हुए ट्रंप ने कहा, ‘फेडरल रिजर्व में एक ऐसे भद्र पुरुष बैठे हुए हैं, जो डॉलर का बेहद महबूत हो जाना पसंद करते हैं।Ó राष्ट्रपति ने कहा कि वे खुद भी मजबूत डॉलर के तलबगार हैं। लेकिन वह मजबूती ऐसी हो जो देश के विकास में सहायक हो। मैं इतना मजबूत डॉलर नहीं चाहता कि इससे अन्य देशों के साथ कारोबार में हमें मुश्किलें आने लगें।

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