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अब छोटी उम्र में ही दिल की बीमारियां लग रही हैं : एचके बाली

पंचकूला (कोमल रमोला)। पारस अस्पताल पंचकूला द्वारा ‘वल्र्ड हार्ट डे’ पर स्थानीय यवनिका गार्डन में करवाई गई वॉकाथान में बारिश के बावजूद करीब 400 से अधिक लोगों ने शिरकत की। म्नगर निगम पंचकूला के कमिशनर राजेश जोगपाल ने इस वॉकाथान को झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस प्रोग्राम में चंडीगढ़ तथा पंचकूला की सीनियर सिटीजन एसोसिएशन, भारत विकास विकास परिषद, वूमैन क्लब, गुड मार्निंग क्लब, एसबीआई, निमा तथा आईएसए के मैंबर्स के अलावा एनसीसी कैडिटों तथा सतलुज स्कूल के बच्चों ने हिस्सा लिया।

पारस अस्पताल पंचकूला के कार्डियक साइंस विभाग के चेयरमैन व प्रसिद्ध दिल के रोगों के माहिर डाक्टर एच.के.बाली ने इस अवसर पर पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए कहा कि भारत 35 साल से अधिक उम्र के लोगों में दिल के दौरे की बीमारी में दुनिया भर में सबसे ऊपर है। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लयू.एच.ओ.) की रिपोर्ट के अनुसार दिल की बीमारियां मौत तथा विकलांगता का सबसे बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि अब छोटी उम्र में ही दिल की बीमारियां लग रही हैं तथा 25 साल की उम्र के नौजवान दिल के दौरे का शिकार हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि खून की मुख्य नाडिय़ां (कॉरर्नी आर्टरी) की बीमारी में 10 से 15 प्रतिशत इजाफा हो गया है तथा यह 40 साल की उम्र में होने लग पड़ी हैं।

डा. एच.के.बाली ने यह भी बताया कि भारत में अब दिल की बीमारियां, संक्रामक बीमारियों से ज्यादा जानलेवा बन गई हैं। उन्होंने बताया कि ताजा आंकड़ों के अनुसार 30 प्रतिशत शहरी तथा 15 प्रतिशत ग्रामीण आबादी उच्च रक्तचाप (बल्ड प्रैशर) की समस्या से पीडि़त हैं। दिल की बीमारियों में इजाफे से मौत दर में भी इजाफा हो रहा है।

दिल के रोगों के विभाग के सीनियर कंस्लटेंट डा. कपिल चैटर्जी ने बताया कि टाइप-2 डायबिटिज (शुगर) के कारण दिल की बीमारियों में साधारण लोगों के मुकाबले 2-3 गुणा जोखिम बढ़ जाता है। भारत में शुगर के मरीजों की गिनती करीब 5 करोड़ 8 लाख है, जो कि पूरी दुनिया में सबसे अधिक है।

सीटीवीएस के डायरेक्टर डा. राणा संदीप सिंह ने इस अवसर पर बातचीत करते हुए कहा कि वल्र्ड हार्ट फैडरेशन के आंकड़ों के अनुसार दिल की बीमारियों के कारण 80 प्रतिशत बे-वक्त मौतें हो रही हैं, जिनको चार मुख्य बातों पर काबू पाकर बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इन चार मुख्य कारकों में अनहेल्दी भोजन, तंबाकू का प्रयोग, शारीरिक अभ्यास की कमी तथा तनाव शामिल हैं। उन्होंने बताया कि भारत में दिल की बीमारियों के कारण मौतों की गिनती 1990 में 13 लाख से बड़कर 2016 में 28 लाख हो गई है। उन्होंने बताया कि भारत में 3 लाख ब’चे दिल के जमांतरू (जन्म से) नुक्स का शिकार होते हैं।

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