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नॉन-एचसीएस से आईएएस चयन प्रक्रिया में  कॉलेज प्रोफेसरो की योग्यता पर सवाल उठाया  

2010 में हूडा सरकार ने दिया क्लास वन का दर्जा, परंतु आज तक सेवा नियमो में  संशोधन नहीं

हालांकि 2014 में मैडिकल अफसरों को ग्रुप-ए बनाने हेतू बने नए सेवा नियम- एडवोकेट हेमंत

चंडीगढ़।  हरियाणा के राजकीय (सरकारी )  कॉलेजो में कार्यरत वरिष्ठ लेक्चरर, जिन्हे बीते कई वर्षो से असिस्टेंट  प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर का पदनाम दिया गया, आज तक वह कानूनी रूप में हरियाणा सरकार के क्लास वन  अर्थात ग्रुप ए अधिकारी नहीं है जिस कारण इनमें से कईयों द्वारा बीते रविवार  9 अगस्त 2020 को हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी ) द्वारा आयोजित नॉन-एचसीएस से आईएएस चयन प्रक्रिया की  शॉर्टलिस्टिंग के लिए आयोजित लिखित परीक्षा में शामिल होने पर भी गंभीर प्रश्न चिन्ह उत्पन्न होता है क्योंकि उक्त परीक्षा  में राज्य सरकार के केवल  न्यूनतम आठ वर्ष की नियमित सेवा वाले ग्रुप ए अधिकारी ही योग्य थे।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने इस विषय पर जानकारी देते हुए बताया आज से  34 वर्ष पूर्व वर्ष अप्रैल,1986 में हरियाणा एजुकेशन राजकीय कॉलेज कैडर के ग्रुप ए और ग्रुप बी  सेवा नियम बनाये गए थे जोकि क्रमशः  मुख्य रूप से प्रदेश के राजकीय कॉलेजो के प्रिंसिपलों और लेक्चररो  के सम्बन्ध में  लागू होते हैं  जिसमे आज तक समय समय पर संशोधन किया जाता रहा है. उपरोक्त ग्रुप ए सेवा नियमो में कॉलेज प्रिंसिपलों के अलावा प्रदेश उच्च शिक्षा निदेशालय में कार्यरत जॉइंट एवं डिप्टी डायरेक्टर का भी  उल्लेख है जबकि ग्रुप बी सेवा नियमो में कॉलेज लेक्चररो के अलावां निदेशालय के अस्सिस्टेंट डायरेक्टर का  उल्लेख है।

हेमंत ने बताया कि हालांकि  आज से ठीक दस वर्ष पूर्व 10 अगस्त, 2010 को  तत्कालीन भूपिंदर हूडा की कैबिनेट द्वारा राजकीय कॉलेजो के वरिष्ठ कॉलेज लेक्चररो अर्थात जो तत्कालीन पे- बैंड तीन में आते थे और जिनकी ग्रेड पे 7000 रुपये थी  ( अब वर्तमान वेतनमान  में एकेडमिक लेवल 11 और उससे ऊपर) उन्हें  एचईएस -1 अर्थात हरियाणा एजुकेशन सर्विस क्लास वन का दर्जा देने का निर्णय  लिया।

जिसके सम्बन्ध में  7 अक्टूबर 2010 को हरियाणा उच्च  शिक्षा विभाग की  तत्कालीन वित्तायुक्त एवं प्रशासनिक सचिव सुरीना राजन, आईएएस द्वारा एक नोटिफिकेशन भी जारी की गयी जिसमे यह उल्लेख है कि ग्रुप बी सेवा नियमो में आने वाले उक्त  कॉलेज  लेक्चररो का  एचईएस -1 का दर्जा मिलेगा परन्तु इसके साथ साथ  यह भी स्पष्ट किया गया वह इस संबंध में कोई   लाभ/सुविधाएं, उच्च वेतनमान आदि  क्लेम नहीं करेंगे और साथ ही उनके  कार्यो और जिम्मेदारियों  में भी इसके दृष्टिगत कोई परिवर्तन नहीं होगा  एवं वो अपने उच्च अधिकारियों के अधीनस्थ  पूर्ववत की भाँति वैसे ही कार्य करते रहेंगे जैसे वह  पहले करते रहे  हैं. इस नोटिफिकेशन में यह भी स्पष्ट  उल्लेख हैं कि  इस सम्बन्ध में हरियाणा एजुकेशन  (कॉलेज कैडर) ग्रुप बी सेवा नियम,1986 और हरियाणा एजुकेशन  (कॉलेज कैडर) ग्रुप ए   सेवा नियम,1986 में अलग अलग तौर पर उपयुक्त संशोधन कर दिए जाएगा।

हेमंत ने आगे बताया कि  आज  पूरे  दस वर्ष बीत जाने के बाद भी उक्त दोनों  अर्थात न तो वर्ष 1986 के ग्रुप बी और न ही ग्रुप ए  सेवा नियमो में उपयुक्त संशोधन  किया गया है जो कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. अब ऐसा भूलवश हुआ है या किसी और वजह से  यह जांच करने योग्य है हालांकि  इस सम्बन्ध में एडवोकेट   होने के नाते उनका   स्पष्ट कानूनी मत है कि मात्र एक  सामान्य  नोटिफिकेशन से ही किसी प्रदेश सरकार के  पद को ग्रुप बी से ग्रुप ए अर्थात क्लास टू से क्लास वन घोषित नहीं किया जा सकता एवं इस आशय में आवश्यक आधिकारिक ओपचारिकताएँ पूरी कर  सम्बंधित सेवा नियमो में उपयुक्त संशोधन करना करना कानूनन आवश्यक है. उन्होंने यह भी बताया कि  भारत के संविधान के अनुच्छेद 309 के परन्तुक के  अनुसार  केंद्र और राज्य सरकार की हर सेवा के वर्ग और कार्यो के लिए सेवा नियम बनाने आवश्यक हैं।

इस सम्बन्ध में हेमंत ने  एक उदाहरण देते हुए बताया कि वर्ष 2014 में  जब प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हरियाणा  सिविल मेडिकल सर्विस (एचसीएमएस) कैडर के मेडिकल ऑफिसर्स (जूनियर डॉक्टरों ) को ग्रुप ए अर्थात क्लास वन का दर्जा दिया गया तो इसके लिए उनके पुराने वर्ष 1978 सेवा नियमो को समाप्त कर उन्हें भी  जुलाई,2014 में बनाये गए नए एचसीएमएस ग्रुप ए सेवा नियमो में शामिल किया गया जिसके बाद ही उन्हें ऐसा दर्जा प्राप्त हो सका।

अब चूँकि हरियाणा के राजकीय (सरकारी ) कालेजों में कार्यरत वरिष्ठ लेक्चररो अर्थात वर्तमान में  वरिष्ठ असिस्टेंट प्रोफेसरो और एसोसिएट प्रोफेसरो  को ग्रुप ए घोषित करने के सम्बन्ध में उन पर वर्तमान रूप में लागू सेवा ग्रुप बी नियमो में न तो आज तक उपयुक्त संशोधन किया गया है और न ही उन्हें ग्रुप ए सेवा नियमो में शामिल कर उसमें उन्हें शामिल किया गया है, इसलिए कानूनी एवं तकनीकी रूप से वह हरियाणा सरकार की ग्रुप ए वर्ग सेवा के अधिकारी  नहीं कहे जा सकते हैं.  वैसे भी  चूंकि उक्त 7 अक्टूबर 2010 को जारी नोटिफिकेशन में स्पष्ट उल्लेख है कि एचईएस-1 दर्जा मिलने के बावजूद वह उसका कोई लाभ क्लेम नहीं करेगें।

इस प्रकार उनका ग्रुप ए अधिकारी  के रूप में नॉन-एचसीएस से आईएएस चयन प्रक्रिया में आवेदन करना और उच्च शिक्षा विभाग  द्वारा उनके  आवेदन को उनके  ग्रुप ए अधिकारी  के रूप में प्रमाणित करके एचपीएससी को भेजने, जिस कारण वह  सब उक्त लिखित परीक्षा में शामिल हुए,  इस सब पर भी गंभीर प्रश्न उठते हैं. हेमंत ने बताया कि वर्तमान उच्च शिक्षा के वर्तमान  सेवा नियमों के अनुसार केवल राजकीय कालेजों के  प्रिंसिपल और विभाग के मुख्यालय में कार्यरत ज्वाइंट डायरेक्टर और डिप्टी डायरेक्टर ही ग्रुप ए हैं और केवल वह ही नॉन-एचसीएस से आईएएस परीक्षा में आवेदन और चयन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए कानूनन योग्य हैं. बीते कल हुई परीक्षा में उच्च शिक्षा विभाग से कुल 96 उम्मीदवार के रूप में योग्य थे जिनमे से कई वरिष्ठ असीसैट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर रैंक के है।

हेमंत ने बीते माह 8 जुलाई को विभाग के प्रधान सचिव, अंकुर गुप्ता, महानिदेशक अजीत बालाजी जोशी और अन्य को ईमेल याचिकाएं भी भेजी थीं  परंतु आज तक उन्हें इस सम्बन्ध में कोई जवाब प्राप्त हुआ हुआ.

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