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संपादकीय

चीन के बाद पाक भी बैकफुट पर

Pak is also on the backfoot

Pak is also on the backfoot : चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के सुधरने की उम्मीद पर सवाल उठना लाजिमी है। हालांकि बीते दिनों लद्दाख के पैंगोंग झील इलाके से चीन ने जिस प्रकार पीछे कदम रखे हैं, वह भारत की कुटनीति और रणनीति की जीत है। इस दौरान चीन ने दूसरे मोर्चों पर भी नरमी दिखाई है। हालांकि केंद्र …

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कुटिल चीन क्या सुधर गया?

Peasant movement : कृषि कानूनों के खिलाफ विदेशी साजिश हैरान करने वाली है। एक देश के निजी मामले में दखल किसी भी प्रकार से उचित नहीं ठहराया जा सकता है।

Has devious China improved?: क्या चीन सुधर चुका है? यह सवाल पूछा जाना चाहिए। हालांकि इसका जवाब देते हुए हां नहीं कहा जाना चाहिए। चीन की चाल भारत बखूबी जानता है और अब पूरी दुनिया जान चुकी है। उसका सच यह है कि हमेशा सच्चाई को छिपाते रहो, फिर चाहे वह दुनिया हो या फिर उसके अपने निवासी। दरअसल, चीन …

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कोरोना अभी मरा नहीं, खतरा बरकरार

Peasant movement : कृषि कानूनों के खिलाफ विदेशी साजिश हैरान करने वाली है। एक देश के निजी मामले में दखल किसी भी प्रकार से उचित नहीं ठहराया जा सकता है।

Corona not dead yet, threat continues: बीते वर्ष इन्हीं दिनों में भारत में कोरोना वायरस की आहट मिलने लगी थी, चीन में इस खतरनाक वायरस के प्रसार के बाद दुनिया के देश इस महामारी की जानकारी जुटाने लगे थे। इसके बाद के हालात भारत समेत पूरा विश्व जानता है। दुनिया का बीता वर्ष जिस संकट और त्रासदी में बीता है, …

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जेब से फिसलते पेट्रोल-डीजल के रेट

Peasant movement : कृषि कानूनों के खिलाफ विदेशी साजिश हैरान करने वाली है। एक देश के निजी मामले में दखल किसी भी प्रकार से उचित नहीं ठहराया जा सकता है।

Petrol-diesel rates: इस सवाल का जवाब हर कोई जानना चाहता है कि आखिर देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर ब्रेक क्यों नहीं लग रहे। कीमतों पर लगातार जारी इजाफा आम और खास सभी उपभोक्ताओं को चुभ रहा है। पिछले दो महीनों में लगातार कुछ-कुछ अंतराल में ईंधन तेलों की कीमतों में लगातार वृद्धि ने कोरोना काल में लगे …

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आंदोलनजीवियों से बचना ही होगा

Peasant movement : कृषि कानूनों के खिलाफ विदेशी साजिश हैरान करने वाली है। एक देश के निजी मामले में दखल किसी भी प्रकार से उचित नहीं ठहराया जा सकता है।

Must avoid movement: राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसद में बयान जहां अनेक भ्रांतियों को दूर करने वाला है, वहीं उन्होंने अपनी सरकार और भाजपा पर लग रहे लांछनों को भी दूर करने का प्रयास किया है। कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन की आवाज बने सिख समाज के संबंध में प्रधानमंत्री का इतने स्पष्ट शब्दों में …

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बंगाल को है परिवर्तन की चाह

Peasant movement : कृषि कानूनों के खिलाफ विदेशी साजिश हैरान करने वाली है। एक देश के निजी मामले में दखल किसी भी प्रकार से उचित नहीं ठहराया जा सकता है।

Bengal wants change: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल और असम के अपने दौरे में यह जता दिया है कि भाजपा इन राज्यों में कितनी प्रबल इच्छा से चुनावी जंग लड़ रही है। एक राजनेता का मूल धर्म अपनी पार्टी और विचारधारा को आगे बढ़ाने का होता है, ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा नेताओं के उस अभियान को और तेज …

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किसान आंदोलन पर विदेशी बयान क्यों

Peasant movement

Peasant movement : कृषि कानूनों के खिलाफ विदेशी साजिश हैरान करने वाली है। एक देश के निजी मामले में दखल किसी भी प्रकार से उचित नहीं ठहराया जा सकता है। ताज्जुब तो इस बात का है कि भारत सरकार जोकि निर्वाचित सरकार है और जिसने संसद में कानूनों को पारित कराया है, को इस तरह से पेश किया जा रहा …

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जहरीली शराब : एसआईटी के नाम पर खानापूर्ति !

हरियाणा में कोरोना की वजह से लगे लॉकडाउन के दौरान शराब घोटाले की जांच के लिए गठित की गई एसईटी की जांच रिपोर्ट जिस प्रकार धूल का गुब्बार ही साबित हुई, उसी प्रकार राज्य में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में गठित की गई एसआईटी भी अपनी राह भटक गई। आखिर गृहविभाग की ओर से गठित की गई …

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म्यांमार में लोकतंत्र का दमन

लोकतंत्र एक धर्म की भांति है, जिसका निर्वाह बेहद आसान भी है और मुश्किल भी। यह विडम्बना ही है कि म्यांमार जोकि लोकतांत्रिक स्वरूप के लिए जद्दोजहद करता आया है, अब फिर सेना के नियंत्रण में आ गया है। पूरे विश्व में जब लोकतांत्रिक रवायतों का पालन मानवाधिकार बन गया है, तब सेना का इस प्रकार का आचरण आलोचना का …

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किसान आंदोलन हुआ अप्रासंगिक

kisaan aandolan

kisaan aandolan : कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन की हकीकत ने देश को झकझोर दिया है। अब हालात ऐसे हैं कि जिस भी जगह किसान धरने-प्रदर्शन पर बैठे हैं, वहां पूछा जा रहा है कि यह क्या बला है? जन संवेदनाओं के साथ जनसहानुभूति खो चुके आंदोलन को लेकर अगर अब किसान नेता रोने-धोने का अभिनय करके जहां-तहां बैठे …

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