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आध्‍यात्‍मिक गुरु श्री श्री रविशंकर
आध्‍यात्‍मिक गुरु श्री श्री रविशंकर

राम जन्मभूमि विवाद को लेकर श्री श्री रविशंकर ने कहा- मध्यस्थता एक सर्वोत्तम पहल

मध्यस्थता की पूरी कार्यवाही कैमरे में कैद होगी लेकिन मीडिया इसकी रिपोर्टिंग नहीं कर सकेगा

नई दिल्ली: ज्ञात रहे कि सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद अयोध्या विवाद मामले को सुलझाने के लिए तीन सदस्यीय समिति द्वारा मध्यस्थता का आदेश दिया है|जिसमें मध्‍यस्‍थता के लिए श्री श्री रविशंकर, श्रीराम पंचू और जस्‍टिस एफएम इब्राहिम खलीफुल्‍ला का नाम चुना गया है|इस समिति के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एफ.एम.आई कलीफुल्ला होंगे|एक हफ्ते में मध्‍यस्‍थता की प्रक्रिया फैजाबाद से शुरू करनी होगी|वहीँ 8 हफ्ते में मध्‍यस्‍थता पूरी करनी होगी|जहां 4 हफ्ते में मध्‍यस्‍थता की प्रगति रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को देनी होगी|हालांकि फाइनल रिपोर्ट के लिए कोर्ट ने 8 हफ्ते का समय दिया है।

उधर कोर्ट के इस आदेश के बाद अयोध्या मामले के मध्यस्थता पैनल में शामिल होने पर आध्‍यात्‍मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने कहा, मुझे लगता है कि यह देश के लिए अच्छा होगा, मध्यस्थता ही एकमात्र रास्ता है|बतादे कि आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर इससे पहले भी व्यक्तिगत स्तर पर अयोध्या मामले को सुलझाने की पहल कर चुके हैं लेकिन कामयाबी नहीं मिली। इसके अलावा, वह कश्मीर में शांति के लिए भी व्यक्तिगत तौर पर पहल कर चुके हैं। श्री श्री रविशंकर सामाजिक और सांप्रदायिक सौहार्द से जुड़े कार्यक्रमों के लिए भी जाने जाते हैं।

श्री श्री का कहना है, “सबका सम्मान करना, सपनों को साकार करना, सदियों के संघर्ष का सुखांत करना और समाज में समरसता बनाए रखना – इस लक्ष्य की ओर सबको चलना है।”

कौन हैं श्री श्री रविशंकर…..यहां जानिए उनका जीवन परिचय ….

आपको बतादे कि श्री श्री रविशंकर का जन्म भारत के तमिलनाडु राज्य में 13 मई 1956 को हुआ था|उनके पिता का नाम व वेंकट रत्नम् था जो भाषाकोविद् थे और उनकी माता श्रीमती विशालाक्षी एक सुशील महिला थीं|आदि शंकराचार्य से प्रेरणा लेते हुए उनके पिता ने उनका नाम ‘रविशंकर’
रखा था|रविशंकर शुरू से ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे|मात्र चार साल की उम्र में वे श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ कर लेते थे|बचपन में ही उन्होंने ध्यान करना शुरू कर दिया था|बतादे कि रविशंकर पहले महर्षि महेश योगी के शिष्य थे|उनके पिता ने उन्हें महेश योगी को सौंप दिया था| अपनी विद्वता के कारण रविशंकर महेश योगी के प्रिय शिष्य बन गए|बताया जाता है कि फीजिक्स में अग्रिम डिग्री उन्होंने 17 वर्ष की आयु में ही ले ली थी|

आर्ट ऑफ लीविंग के संस्थापक भी हैं श्री श्री रविशंकर…

1982 में श्रीश्री रविशंकर ने आर्ट ऑफ लिविंग फाउण्डेशन की स्थापना की थी|यह शिक्षा और मानवता के प्रचार प्रसार के लिए सशुल्क कार्य करती है और लोगों को सामाजिक समर्थन प्रदान करती है| 1997 में ‘इंटरनेशनल एसोसिएशन फार ह्यूमन वैल्यू’ की स्थापना की, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर उन मूल्यों को फैलाना है जो लोगों को आपस में जोड़ती है| श्रीश्री रवि शंकर विश्व स्तर पर एक आध्यात्मिक नेता एवं मानवतावादी धर्मगुरु के रूप में जाने जाते हैं| उनके भक्त उन्हें आदर से प्राय: “श्री श्री” के नाम से पुकारते हैं|

भारत सरकार द्वारा 2016 में पद्मविभूषण से किया जा चुका है सम्मानित ….

श्री श्री रविशंकर के देश में करोड़ों प्रशंसक हैं| कुल 151 देशों में श्री श्री की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग की ब्रांच हैं|इसके अलावा श्री श्री की फार्मेसी और स्वास्थ्य केंद्र भी हैं| मीडिया रिपोर्ट के अनुसार श्रीश्री की कुल संपत्ति 1000 करोड़ रुपये है| नवंबर 2017 में उन्होंने योगगुरु बाबा रामदेव की तरह ही ‘श्री श्री तत्वा’ ब्रांड नाम से रिटेल बाजार में उतरने की बात भी कही थी| वहीँ गुरु रविशंकर वेद विज्ञान विद्यापीठ, श्री श्री सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज, श्री श्री कालेज और आयुर्वेदिक साइंस एंड रिसर्च, श्री श्री मोबाइल एग्रीकल्चरल इनिसिएटीव्स और श्री श्री रूरल डेवलेपमेंट ट्रस्ट चलाते हैं। श्रीश्री को भारत सरकार ने 2016 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया था।

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