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लॉकडाउन-5 चाहिए, लेकिन कोरोना पर नियंत्रण भी हो

इसमें कोई दो राय नहीं होनी चाहिए कि लॉकडाउन का पांचवां चरण भी चाहिए। ऐसा इसलिए है, क्योंकि कोरोना वायरस के संक्रमण को चौथा चरण रोक नहीं पाया है, अपितु मामलों ने तमाम रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। अब केंद्र सरकार लॉकडाउन को 31 मई के बाद आगे बढ़ाने पर माथापच्ची कर रही है तो इस पर व्यापक विचार की आवश्यकता है कि आखिर बढ़ते हुए मामलों को कैसे रोका जाए? गौरतलब है कि हरियाणा समेत कई राज्यों ने दोहराया है कि लॉकडाउन को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

हालांकि ये राज्य आर्थिक गतिविधियों में व्यापक छूट चाहते हैं। केंद्रीय गृहमंत्री ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों से जहां लॉकडाउन को बढ़ाए जाने के संबंध में उनकी रणनीति जानी है, वहीं प्रधानमंत्री ने भी गृहमंत्री से चर्चा की है। देश में विपक्ष लॉकडाउन पर लगातार सवाल उठा रहा है, उसका आरोप है कि सरकार की ओर से लगाया गया लॉकडाउन विफल रहा है, ऐसे में वह अपनी अगली रणनीति का खुलासा करे। मोदी सरकार के लिए कोरोना वायरस से निपटना भारी चुनौती है, ऐसे में एकतरफ उसे इस अदृश्य शत्रु से लडऩा है, वहीं विपक्ष के हमलों का भी जवाब देना है।

यह किसी से छिपा नहीं है कि कुछ राज्यों में कोरोना वायरस से हालात बेहद खराब हैं। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों में मामले ज्यादा हैं। कई राज्य ऐसे हैं जहां अभी तो मामले कम हैं, मगर कोविड-19 का ग्राफ बढ़ रहा है। असम में पिछले चार दिन में मामले कई गुना बढ़ गए हैं। लॉकडाउन पूरी तरह खोलने से हालात कहीं अनियंत्रित न हो जाएं, इसलिए राज्य अभी थोड़ी रियायतों के साथ लॉकडाउन जारी रखना चाहते हैं। गोवा की ओर से लॉकडाउन को कम से कम 15 दिन के लिए और बढ़ाने की मांग सामने आ चुकी है।

हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री की ओर से भी लॉकडाउन बढ़ाया जाना जरूरी बताया गया है। केंद्र सरकार पर सभी राज्य सरकारों की ओर से दबाव बनाया जा रहा है। वैसे, अगर लॉकडाउन आगे बढ़ाने का फैसला हुआ तो संभव है, इस बार बहुत सारी छूट दी जा सकती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार का फोकस उन शहरों पर होगा जहां कोरोना के मामले बहुत ज्यादा हैं। इनमें दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, पुणे, ठाणे, इंदौर, चेन्नै, अहमदाबाद, जयपुर, सूरत और कोलकाता शामिल हैं। स्कूल-कॉलेज फिलहाल बंद रहने के ही आसार हैं। मेट्रो सर्विस को भी एक जून से दोबारा शुरू किया जा सकता है। इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर पाबंदी जारी रखी जा सकती है। धार्मिक स्थानों को खोला जाए या नहीं यह फैसला राज्य सरकारों पर छोड़ा जा सकता है। सेलून खुल चुके हैं, अब जिम और शॉपिंग मॉल्स वगैरह खोलने का फैसला भी राज्य सरकारों के हाथ में दिया जा सकता है।

स्कूलों को खोलने के संबंध में लगातार चर्चा हो रही है, लेकिन इनका खुलना फिलहाल मुश्किल दिख रहा है। 15 जून तक स्कूलों और कॉलेजों को बंद ही रखा जा सकता है। वैसे भी राज्य सरकारें कह चुकी हैं कि स्कूल गर्मी की छुट्टियों के बाद ही खुलेंगे। वहीं रेलवे और घरेलू फ्लाइट को सरकार पहले ही शुरू कर चुकी है। मेट्रो सर्विस को भी एक जून से दोबारा शुरू किया जा सकता है। इस बीच ऐसी भी चर्चा है कि सरकार धार्मिक स्थलों को खोल सकती हैं। धार्मिक स्थानों को खोला जाए या नहीं यह फैसला राज्य सरकारों पर छोड़ा जा सकता है। कर्नाटक सरकार पहले ही पीएम मोदी को पत्र लिखकर 1 जून से धार्मिक स्थानों को खोलने की इजाजत मांग रही है।

राज्य सरकारों का फोकस अब कंटेनमेंट जोन्स पर दिख रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने हफ्ते में छह दिन दुकानें खोलने का फैसला किया है। जम्मू-कश्मीर में शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लैक्स, रेस्तरां, स्कूल-कॉलेज, जिम को छोडकऱ बाकी सब खोलने की अनुमति दी गई है। कई धार्मिक संस्थाओं ने राज्य सरकारों से धर्मस्थल खोलने की इजाजत मांगी है मगर उसमें देरी हो सकती है। फिल्म और टीवी इंडस्ट्री भी लॉकडाउन हटाने के पक्ष में है। तेलंगाना ने कहा है कि वे केंद्र की गाइडलाइंस का वेट करेंगे। हालांकि लॉकडाउन के बावजूद, देश में कोरोना वायरस मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शुक्रवार सुबह तक के आंकड़ों के अनुसार, देश में 1.65 लाख से ज्यादा कंफर्म केस सामने आए हैं। देश में 4,706 लोगों की मौत हो चुकी है। फिलहाल करीब 90 हजार ऐक्टिव केसेज हैं। पिछले एक हफ्ते से मामलों की संख्या में उछाल देखने को मिला है। इसके पीछे प्रवासी मजदूरों के पलायन को जिम्मेदार बताया गया। जाहिर है, चुनौतियां तमाम हैं, आर्थिक गति और कारोबार को भी ध्यान में रखना है, वहीं कोरोना वायरस से भी लडऩा है, ऐसे में सरकार को बेहद सावधानी से फैसला लेना होगा।

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