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नवजोत सिंह सिद्धू कृषि सुधार बिलों के विरोध में किसानो के साथ मैदान में उतरे

पंजाब, 23 सितम्बर: कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू संसद में कृषि सुधार बिलों को पारित करने के खिलाफ किसानों के विरोध के समर्थन में विरोध प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर उतर चुके है ।
पंजाब में सत्ताधारी कांग्रेस पहले से ही विधेयक का विरोध कर रही है | किसानों, आढ़तियों और कारोबारियों की आशंका को लेकर नवजोत सिंह सिद्धू आज किसानो के साथ आये है |

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का घटक शिअद ने कृषि से जुड़े विधेयकों को किसान विरोघी बताया है | शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने कहा, “देश के कुछ राज्यों ने आईटी सेक्टर का विकास किया तो कुछ ने पर्यटन का विकास किया, लेकिन पंजाब ने कृषि का बुनियादी ढांचा तैयार किया है | इस विधेयक से पंजाब के किसानों, आढ़तियों, व्यापारियों और मंडी में काम करने वाले मजदूरों से लेकर खेतिहर मजदूरों को नुकसान होगा” बादल ने विधेयकों को किसान विरोधी बताते हुए कहा, “मैं इस विधेयक का पुरजोर विरोध करता हूं” शिअद प्रमुख ने कहा कि पंजाब ने देश को अनाज उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बनाया है |

उन्होंने कहा कि एक किलो चावल के उत्पादन में 5,000 लीटर पानी की जरूरत होती है और पंजाब के किसान अपना पानी त्याग कर देश के लिए अनाज पैदा करता है | उन्होंने कहा कि पंजाब में पूरी दुनिया में सबसे अच्छी मंडी व्यवस्था है, इस विधेयक के पारित होने के बाद चरमरा जाएगी | आईएएनएस को मिली जानकारी के अनुसार, शिअद के राजग से अलग होने के बारे में अभी फैसला नहीं हुआ है |

किसानो को इस विधेयक से आखिर क्या समस्या है ?

कृषि से जुड़े विधेयकों का पंजाब में काफी विरोध हो रहा है क्योंकि किसान और व्यापारियों को इससे एपीएमसी मंडियां समाप्त होने की आशंका है | यही कारण है कि प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दलों ने कृषि विधेयकों का विरोध किया है |

आखिर क्या है ये विधेयक

कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2020 में कहा गया है कि किसान अब एपीएमसी मंडियों के बाहर किसी को भी अपनी उपज बेच सकता है, जिस पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, जबकि एपीएमसी मंडियों में कृषि उत्पादों की खरीद पर विभिन्न राज्यों में अलग-अलग मंडी शुल्क व अन्य उपकर हैं | पंजाब में यह शुल्क करीब 4.5 फीसदी है | लिहाजा, आढ़तियों और मंडी के कारोबारियों को डर है कि जब मंडी के बाहर बिना शुल्क का कारोबार होगा तो कोई मंडी आना नहीं चाहेगा | वहीं, पंजाब और हरियाणा में एमएसपी पर गेहूं और धान की सरकारी खरीद की जाती है | किसानों को डर है नये कानून के बाद एमएसपी पर खरीद नहीं होगी क्योंकि विधेयक में इस संबंध में कोई व्याख्या नहीं है कि मंडी के बाहर जो खरीद होगी वह एमएसपी से नीचे के भाव पर नहीं होगी |

 

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