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महाशिवरात्रि 2020: ये चीजें भगवान शिव को अर्पित नहीं करनी चाहिए, यहां जानिए भोलेशंकर की सारी पूजा विधि
महाशिवरात्रि 2020: ये चीजें भगवान शिव को अर्पित नहीं करनी चाहिए, यहां जानिए भोलेशंकर की सारी पूजा विधि

महाशिवरात्रि 2020: ये चीजें भगवान शिव को अर्पित नहीं करनी चाहिए, यहां जानिए भोलेशंकर की सारी पूजा विधि

बड़े ही मासूम और रहमदिल हैं भगवान शिव

नई दिल्ली: बाबा भोलेशंकर बड़े ही दयालु हैं..सभी देवों में एक महादेव ही ऐसे हैं जो मात्र एक लोटा जल चढ़ा देने भर से प्रसन्न हो जाते हैं|यही नहीं भगवान शिव का स्‍वभाव इतना भोला है अगर कोई उनके दर पर स्नेह और सच्चे मन से शीश झुकाने भी पहुंच जाता है तो उसका भी कल्याण हो जाता है|इनकी महिमा का जितना भी बखान किया जाए वो कम है..अपरंपार है बाबा शिव की महिमा|

ध्यान रखें कि अगर आपको भगवान शिव का भक्त बनना हैं या हैं तो छल-कपट को त्याग कर सदैव ईमानदारी के रास्ते पर चलें क्योंकि बाबा शिव को वही भक्त पसंद हैं जो सत्य की राह पर चलते हैं|ऐसे ही भक्तों पर भोलेशंकर अपनी करुणा बरसाते हैं|

महाशिवरात्रि….इस पर्व पर भोलेनाथ की पूजा करने से मिलता हैं विशेष फल…..

महाशिवरात्रि के दिन देवों के देव महादेव शंकर भगवान की जो भी आराधना करता है उसे विशेष फल की प्राप्ति होती है उसकी सारी मनोकामनाएं भोलेनाथ पूर्ण करते हैं|बतादें कि, सावन के पूरे महीने और महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का वास धरती पर होता है|

भोलेबाबा की पूजा…..

भोलेबाबा को प्रसन्‍न करने के लिए कोई विशेष पकवान या फिर दुर्लभ वस्‍तुओं की आवश्‍यकता नहीं होती बल्कि वह आसानी से सभी स्‍थानों पर मिलने वाली सामान्‍य-सी वस्‍तुओं को अर्पित करने से प्रसन्‍न हो जाते हैं।मगर कई बार भोलेबाबा की पूजा में भक्‍तजन जाने-अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, भोलेनाथ को ऐसी-ऐसी चीजें अर्पित कर बैठते हैं जिनसे शिव खुश होने की बजाय नाराज हो जाते हैं|आप ऐसा न करें, इसलिए हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसी बातें जो भगवान शिव की पूजा करते समय ध्‍यान रखनी चाहिए|

क्या न अर्पित करें भोलेनाथ को…..

1 – केतकी का फूल…..

एक बार ब्रह्माजी व विष्णुजी में विवाद छिड़ गया कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है। ब्रह्माजी सृष्टि के रचयिता होने के कारण श्रेष्ठ होने का दावा कर रहे थे और भगवान विष्णु पूरी सृष्टि के पालनकर्ता के रूप में स्वयं को श्रेष्ठ कह रहे थे। तभी वहां एक विराट लिंग प्रकट हुआ। दोनों देवताओं ने सहमति से यह निश्चय किया गया कि जो इस लिंग के छोर का पहले पता लगाएगा उसे ही श्रेष्ठ माना जाएगा। अत: दोनों विपरीत दिशा में शिवलिंग की छोर ढूढंने निकले।

छोर न मिलने के कारण विष्णुजी लौट आए। ब्रह्मा जी भी सफल नहीं हुए परंतु उन्होंने आकर विष्णुजी से कहा कि वे छोर तक पहुँच गए थे। उन्होंने केतकी के फूल को इस बात का साक्षी बताया। ब्रह्मा जी के असत्य कहने पर स्वयं शिव वहां प्रकट हुए और उन्होंने ब्रह्माजी की एक सिर काट दिया और केतकी के फूल को श्राप दिया कि शिव जी की पूजा में कभी भी केतकी के फूलों का इस्तेमाल नहीं होगा। इस कारण केतकी के फूलों का इस्तेमाल शिव पूजन में नहीं किया जाता है।

हल्दी….

आमतौर पर हल्दी का इस्तेमाल महिलाओं की सुंदरता को बढ़ाने के लिए किया जाता है। लेकिन भगवान शिव तो वैसे ही सुंदर है। जिसके कारण भगवान शिव के प्रतीक शिवलिंग पर हल्दी नही चढाई जाती है।

तुलसी….

शिव पुराण के अनुसार जालंधर नाम का असुर भगवान शिव के हाथों मारा गया था। जालंधर को एक वरदान मिला हुआ था कि वह अपनी पत्नी की पवित्रता की वजह से उसे कोई भी अपराजित नहीं कर सकता है। लेकिन जालंधर को मरने के लिए भगवान विष्णु को जालंधर की पत्नी तुलसी की पवित्रता को भंग करना पड़ा। अपने पति की मौत से नाराज़ तुलसी ने भगवान शिव का बहिष्कार कर दिया था। जिस कारण तुलसी नहीं अशुभ माना जाता है।

कुमकुम…

इसे सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है जबकि भगवान शिव वैरागी हैं। इसलिए शिवलिंग में कुकुम न चढ़ाए।

टूटे हुए चावल..

टूटा हुआ चावल अपूर्ण और अशुद्ध होता है। इसलिए शिवलिंग में हमेशा अक्षत यानी साबूत चावल अर्पित किया जाना चाहिए।

तिल…..

शास्त्रों के अनुसार तिल भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ था। इसलिए इसे शिवलिंग में नहीं अर्पित किया जाता है।

शंख जल…..

भगवान शिव ने शंखचूड़ नाम के असुर का वध किया था। शंख को उसी असुर का प्रतीक माना जाता है जो भगवान विष्णु का भक्त था। इसलिए विष्णु भगवान की पूजा शंख से होती है लेकिन शिव की पूजा नहीं की जाती है।

नारियल पानी……

शिव जी की पूजा नारियल से होती है लेकिन नारियल पानी से नहीं।भगवान शिव को नारियल तो चढ़ा सकते हैं लेकिन नारियल का पानी नहीं चढ़ाना चाहिए| इससे धन की हानि होती है क्योंकि शिवलिंग पर चढ़ाई जाने वाली सारी चीज़ें निर्मल होनी चाहिए यानि जिसका सेवन ना किया जाए। नारियल पानी देवताओं को चढ़ाये जाने के बाद ग्रहण किया जाता है इसीलिए शिवलिंग पर नारियल पानी नहीं चढ़ाया जाता है।इसके अलावा नारियल देवी लक्ष्मी का भी प्रतीक माना जाता है जिनका संबंध भगवान विष्णु से है इसलिए शिव जी को अर्पित करना अशुभ माना जाता है।

ऐसे न लगाएं भगवान शिव की परिक्रमा….

मंदिर में भगवान के दर्शन करने के बाद परिक्रमा बेहद जरूरी माना जाता है, अन्‍यथा भगवान के दर्शन पूर्ण नहीं माने जाते। मगर भगवान शिव के मंदिर में याद रखें कि आधी करके वापस लौट जाएं। परिक्रमा हमेशा शिवलिंग के बाईं ओर से शुरू करें और जहां से भगवान को चढ़ाया जल बाहर निकलता है, वहां तक जाकर वापस आ जाएं और फिर विपरीत दिशा में जाकर जलाधारी के दूसरे सिरे तक आकर परिक्रमा को पूरा करें।जल स्‍थान को नहीं लांघना चाहिए|मान्‍यता है कि जहां से शिवलिंग पर चढ़ा जल बाहर निकलता है वहां ऊर्जा और शक्ति का परम भंडार होता है। इस स्‍थान को लांघने से फैल फैलने पर वीर्य या रज और इनसे जुड़ी शारीरिक क्रियाओं पर ऊर्जा बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए इस स्‍थान को लांघा नहीं जाता है। इसलिए परिक्रमा करते समय इस बात का ध्‍यान जरूर रखें।

इस तरह से न चढ़ाएं प्रसाद……

भगवान शिव के मंदिर में जब आप शिवलिंग पर प्रसाद चढ़ाएं तो इस बात का ध्‍यान रखें कि प्रसाद को कभी शिवलिंग के ऊपर न रखें। मान्‍यता है कि शिवलिंग के ऊपर रखा गया प्रसाद ग्रहण नहीं किया जाता है और ऐसा होने पर पूजा में दोष लगता है।

इस वक्‍त न चढ़ाएं जल……

भगवान शिव के मंदिर में यदि आप शाम के वक्‍त दर्शन करने जा रहे हैं तो शाम के वक्‍त जल न चढ़ाएं। शास्‍त्रों के अनुसार शाम का पहर शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए उपयुक्‍त नहीं होता है। जलाभिषेक सुबह की पूजा में करने का विधान है|

क्या अर्पित करें…..भगवान भोलेनाथ को खुश करने के लिए आप उन्हें भांग-धतूरा, दूध, चंदन, और भस्म चढ़ा सकते हैं।कहा जाता है कि भोलेनाथ की पूजा करने से वही नही बल्कि सारे भगवान ख़ुश हो जाते हैं।

पूजा- पहले शिवलिंग पर जल चढ़ाएं फिर पचांमृत (दूध, घी, दही, शहद और शक्कर) अर्पित करें फिर दूध से स्नान कराएं।एक बार फिर जल से शिवलिंग का स्नान कराएं।शिवलिंग को चंदन का तिलक करें, फल, फूल, चंदन, बिल्व पत्र, धतूरा, धूप व घी का दीप अर्पित करें।ओम नम: शिवाय मंत्र का अधिक से अधिक जाप करें।

1- भांग…

औघड़-अविनाशी शिव को भांग चढ़ाने से हमारी कमियां और बुराइयां दूर होती हैं|

2- शहद

भोलेनाथ को शहद चढ़ाने से हमारी वाणी में मिठास आती है\

3-चंदन

शिवजी को चंदन चढ़ाने से हमारा व्यक्तित्व आकर्षक होता है. इससे हमें समाज में मान-सम्मान और यश मिलता है.

4- घी

भगवान शंकर पर घी अर्पित करने से हमारी शक्ति बढ़ती है|

5- दही

दही चढ़ाने से स्वभाव गंभीर होता है और जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होने लगती है|

6- दूध

शिव-शंकर को दूध अर्पित करने से स्वास्थ्य हमेशा अच्छा रहता है और बीमारियां दूर होती हैं|ध्यान रखें कि उबले हुए दूध से शिवलिंग का अभिषेक ना करें|शिवलिंग का अभिषेक सदैव कच्चे दूध से करना चाहिए|

7इत्र

शिवलिंग पर इत्र लगाने से विचार पवित्र और शुद्ध होते हैं. इससे हम जीवन में गलत कामों के रास्ते पर जाने से बचते हैं|

8-केसर

शिवलिंग पर केसर अर्पित करने से हमें सौम्यता मिलती है|

9- चीनी (शक्कर)

महादेव का शक्कर से अभिषेक करने से सुख और समृद्धि बढ़ती है. ऐसा करने से मनुष्य के जीवन से दरिद्रता चली जाती है|

10- जल

मंत्रों का उच्चारण करते हुए शिवलिंग पर जल चढ़ाने से हमारा स्वभाव शांत और स्नेहमय होता है|शिवलिंग का अभिषेक सदैव ठंडे जल से करना चाहिए|

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