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lucknow versha verma story

इस बेटी को दुआ और सलाम: जब लाश को ठुकरा रहे उसके अपने तो यह बेटी दे रही अंतिम मुकाम

lucknow versha verma story : कोरोना वायरस लोगों पर ऐसा कहर बनके टूटा है कि दिल को चीर देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं| किसी के इलाज की शुरुवात नहीं हो पा रही है तो कोई इलाज पाकर भी दवाइयों और ऑक्सीजन की कमी से बेहाल नजर आ रहा है| जहां इनके अपने इसके लिए दर-दर मारे फिर रहे हैं| वहीं, इन तस्वीरों के बीच से एक तस्वीर ऐसी भी सामने आ रही है जो सबसे ज्यादा व्यथित कर रही है| वो यह है कि बहुत से लोग अपनों को कोरोना होने पर उनसे दूरी बना ले रहे हैं| साथ ही दुर्भाग्यवश उनकी मौत हो जाने पर उनका अंतिम संस्कार करने से भी कतरा रहे हैं| यह एक बड़ी पीड़ा है| अब बताओ जब अपने देखभाल नहीं करेंगे तो कौन करेगा? जब अपने मुंह मोड़ लेंगे तो मरने के बाद अंतिम विदाई कौन देगा…जहां इन्हीं हालातों को देखते हुए एक बेटी आगे आई है| जो कि सबके लिए एक बड़ी मिसाल है| इस बेटी के लिए दुआ है और इसे सलाम है जो कि गैर होकर भी अनेक मृतकों को उनके अंतिम मुकाम तक पहुंचा रही है|

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लखनऊ की है बेटी…बनी है चर्चा का विषय…

इंसानियत की मूरत बेटी का नाम वर्षा वर्मा है| वर्षा वर्मा अब सिर्फ एक परिवार की नहीं पूरे लखनऊ की बेटी बन गई हैं| उनके लिए अब कोई गैर नहीं रहा है| अरे अपने क्या करेंगे जो इस वक्त वर्षा वर्मा कर रही हैं| बतादें कि, लखनऊ की वर्षा वर्मा एक समाज सेविका हैं और ‘एक कोशिश ऐसी भी’ नाम की संस्था चलाती हैं| हालतों के मद्देनजर इसी ‘एक कोशिश ऐसी भी’ के तहत वर्षा वर्मा ने मृतकों के लिए शव वाहन इंतजाम किया है| शव वाहन का पूरा खर्च वर्षा वर्मा की संस्था उठा रही है| मृतकों को मोक्षद्वार ले जाने के लिए कोई पैसा नहीं लिया जा रहा है| ये सेवा निशुल्क है| खुद वर्षा वर्मा इस काम में आगे हैं| वह स्वयं लाशों को उठाने पहुँचती हैं| जैसे ही वर्षा वर्मा को पता लगता है कि कहीं लाश पड़ी है और उसे कोई ले जाने वाला नहीं है उसके अपने गायब हैं तो वह उस लाश को मोक्षद्वार छोड़ने का काम करती हैं| इसके साथ इन लावारिस लाशों का वर्षा वर्मा अंतिम संस्कार भी करवा रही हैं| अब क्या करें जब लाश के अपनों ने मुंह फेर रखा है| इसके अलावा वर्षा वर्मा उनके लिए शव वाहन लेकर हाजिर हैं जो गरीब हैं जिनको शव वाहन नहीं मिल पा रहे|

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बतादें कि, हमारे यहां कहा जाता है कि महिलाएं श्मशान नहीं जातीं, ऐसे में वर्षा वर्मा का श्मशान जाना चर्चा का केंद्र बना है। वर्षा वर्मा का कहना है कि जब उन्हें पता चला कि कई लोग ऐसे हैं जो कोरोना वायरस से डर से अपनों की लाशें को छोड़ दे रहे हैं तो और कई गरीब परिवारों को शव ले जाने के लिए वाहन तक नहीं मिल रहा तो उन्होंने यह कदम उठाने का मन बनाया| वर्षा का कहना है कि रोते बिलखते लोगों को देख उनसे रहा नहीं गया…वह देख रही थीं की किस प्रकार शव वाहन के इन्तजार में लोगों के आंसू सूखे जा रहे हैं| जहाँ अगर ऐसी स्थिति में उनकी तरफ से कुछ मदद हो जाये तो इससे अच्छा क्या है| वर्षा ने एक किराए की वैन ली हुई है और उसकी सीट ऐंबुलेंस जैसी करके उसे शव वाहन बना दिया है| अब वह इस वाहन में शव ढोती है। लोगों को इसकी जानकारी पहुंचाने के लिए वैन में निशुल्क शव वाहन लिखवाया हुआ है और साथ ही अपना संपर्क नंबर भी लिखा है|

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लोग क्या कहते हैं…..

लोगों का कहना है कि वर्षा तुम पर गर्व है| कोरोना के इस समय में बेटे तक कोरोना का शिकार अपने मां-पिता का अंतिम संस्कार नही कर रहे हैं। ऐसे में तुम वाहन में शव लेकर श्मशान तक पहुंचा रही हो.. और कहते हैं कि बेटियों को श्मशान नही जाना चाहिए…. ईश्वर हर घर में एक ऐसी बेटी दे।

देखें तस्वीरें….

 

 

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