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छिन गई नौकरी या मिल रही आधी तनख्वाह, ऐसे में कैसे हो घर का निर्वाह

(Written by Shiva Tiwari)

नई दिल्ली: “अरे कोरोना तूने बड़ा दुख दीनो”। जबसे कोरोनाकाल शुरू हुआ है तबसे लोगों पर इसका संकट तो है ही साथ ही अन्य कई प्रकार के संकट भी उनपर आन पड़े हैं।दरअसल, इस नामुराद कोरोना वायरस ने कई लोगों से उनके जीवनयापन का जरिया छीन लिया है।जहां नौकरी करते आ रहे कई लोगों के पास नौकरी नहीं रही है वहीं कमाई के अन्य साधन अपनाकर घर चलाने वालों की भी दुर्दशा देखने को मिल रही है।

नौकरी करने वाले कई लोगों का कुछ यूं है हाल…

बतादेंकि, जो लोग नौकरीपेशा वाले थे।यहां बात सरकारी की नहीं प्राइवेट की हो रही है।सरकारी की बात आगे करेंगे।तो बात यह है कि प्राइवेट नौकरी करने वाले कई लोगों की नौकरी उनसे छिन गई है औऱ अगर नहीं छिनी है तो दांव पर लगी है यानि उनपर छिनने की तलवार लटक रही है।इधर, अगर वह जैसे तैसे नौकरी पर टिके भी हैं तो देखा जा रहा है कि या तो उन्हें आधी तनख्वाह दी जा रही है या फिर पूरे से कम।मतलब, उनका वेतन घटा दिया गया है।ऐसे में जीवनयापन करना ऐसे लोगों को भारी पड़ रहा है।अब मान लीजिए कि अगर कोई मजबूरी में कम तनख्वाह में ही नौकरी कर रहा है और अपने घर से बाहर है, किराए के कमरे में रह रहा है तो वह किस स्थिति से गुजर रहा होगा।आप समझ सकते हैं। वह कैसे सब मैनेज करता होगा, वो तो वही जाने।और फिर वो करे तो करे क्या नौकरी कहीं मिलने को है नहीं।इसलिए सोचता है कि चलो जितना मिल रहा है उसीमें जैसे तैसे दिन काटते हैं।

अच्छे-खासे पढ़े-लिखे लोग ऐसे-ऐसे काम करने को राजी हैं….

देखने को मिल रहा है कि अच्छे-खासे पढ़े-लिखे लोग नौकरी छूट जाने से अब कुछ भी काम करने को तैयार फिर रहे हैं।जिस किसी प्राइवेट संस्थान में ये काम करते चले आ रहे थे उसने अब इन्हें रखने में हाथ खड़े कर दिए हैं यह कहकर की तनख्वाह देने को पैसे नहीं है।आपने गौर किया होगा कि पीएम मोदी यह बात कई बार कह चुके हैं कि कोई भी संस्थान अपने कर्मचारियों को नौकरी से न निकाले लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है।संस्थान धड़ल्ले से कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने में जुटे हुए हैं।जिसके बाद वह कर्मचारी कहीं ठेले पर सब्जी लगाते, या फिर कुछ और बेचते नजर आ रहे हैं।वहीं, नौकरी छूटने पर कई कर्मचारी गार्ड की या हेल्पर की नौकरी तक करने को तैयार हैं।इसमें वह कर्मचारी भी हैं जहां जब वह जिस नौकरी में थे अच्छी पोस्ट पर थे लेकिन अब क्या करें सब वक्त का करम है।मगर दुर्भाग्य की बात यह है कि गार्ड और हेल्पर की नौकरी भी मिलना मुश्किल हो रहा है।वो भी नहीं मिल रही है।

कमाने के साधनों पर भी है कोरोना का कहर…

अब अगर किसी ने कमाने का कोई अन्य जरिया अपनाया हुआ है जैसे दुकान या कुछ औऱ कर रहा है तो वह भी सन्नाटे की मार झेल रहा है।दरअसल, पहली बात की कोरोना चल रहा है ऐसे में लोग कुछ भी खरीदने से थोड़ा कतराते हैं।खासकर बाहर की खाने वाली चीजों से।और दूसरी बात यह कि लोगों के पास कोरोनाकाल में पैसों की भी कमी आ गई है।

सरकारी नौकरियों का क्या हाल है…

सरकारी नौकरी पाने के चक्कर में कई लोग बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं।असल में हो क्या रहा है कि कई सरकारी भर्ती निकलती तो हैं लेकिन उनकी भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती है।किसी न किसी कारण से भर्ती पर रोक लग जाती है।ऐसे में सरकारी नौकरी पाने की चाहत रखने वाले कई लोगों की आस पर पानी फिर जाता है और फिर वह करते हैं आंदोलन।हालांकि, कोरोनाकाल के मद्देनजर सरकारी नौकरी करने वालों की नौकरी नहीं गई है।हां ये जरूर है कि यहां भी तनख्वाह थोड़ी बहुत जरूर काटी गई है लेकिन सरकारी वालों को कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि इनकी तनख्वाह जबरदस्त होती है परंतु प्राइवेट वालों को बहुत ज्यादा फर्क पड़ता है क्योंकि इनकी तनख्वाह कम होती है और ऊपर से उसमे से जब कटने लग जाये तो क्या होगा।

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