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चंडीगढ़ में बड़े धूम धाम से निकाली गयी भगवान जगन्नाथ यात्रा, जानें पूरी कथा

चंडीगढ़, 23 जून: कोरोना वायरस महामारी के चलते सेक्टर 31 के भगवान जगन्नाथ मंदिर से रथ यात्रा मंदिर से लेकर प्रांगण तक निकाली गई | इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में चंडीगढ़ प्रशासक के एडवाइजर, मनोज कुमार परीदा मौजूद थे |

आपको बता दें की सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार ज्यादा भीड़ इकट्ठा करना या ज्यादा लंबी यात्रा करना संभव नहीं था इसलिए यह यात्रा मंदिर के प्रांगण तक ही निकली गयी | यात्रा में कम से कम लोगों को शामिल किया गया | कोरोना काल के दौरान चंडीगढ़ में ये होने वाला यह पहला धार्मिक समारोह मनाया गया | जिसमे सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखा गया | यात्रा में मंदिर के पुजारियों समेत कमेटी के ही मेंबर मौजूद थे | भगवान जगन्ननाथ यात्रा की रस्मों को निभाते हुए यात्रा को पूर्ण किया गया |

 

आखिर क्यों निकली जाती है इतनी भव्य यात्रा

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जगन्नाथ रथ यात्रा क्यों निकलती है इसके पीछे भक्तों और विद्वानों के अलग-अलग मत हैं। एक आधुनिक मत के अनुसार कहा जाता है कि राजा रामचन्द्रदेव ने यवन महिला से विवाह कर जब इस्लाम धर्म अपना लिया तो उनका मंदिर में प्रवेश निषेध हो गया था तब उनके लिए ही यह यात्रा निकाली जाने लगी क्योंकि वे जगन्नाथ जी के अनन्य भक्त थे।
जबकि रथ यात्रा के पीछे का पौराणिक मत यह है कि स्नान पूर्णिमा यानी ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन जगत के नाथ श्री जगन्नाथ पुरी का जन्मदिन होता है। उस दिन प्रभु जगन्नाथ को बड़े भाई बलराम जी तथा बहन सुभद्रा के साथ रत्नसिंहासन से उतार कर मंदिर के पास बने स्नान मंडप में ले जाया जाता है।

 

108 कलशों से उनका शाही स्नान होता है। फिर मान्यता यह है कि इस स्नान से प्रभु बीमार हो जाते हैं उन्हें ज्वर आ जाता है।
तब 15 दिन तक प्रभु जी को एक विशेष कक्ष में रखा जाता है। जिसे ओसर घर कहते हैं। इस 15 दिनों की अवधि में महाप्रभु को मंदिर के प्रमुख सेवकों और वैद्यों के अलावा कोई और नहीं देख सकता। इस दौरान मंदिर में महाप्रभु के प्रतिनिधि अलारनाथ जी की प्रतिमा स्थपित की जाती हैं तथा उनकी पूजा अर्चना की जाती है।
15 दिन बाद भगवान स्वस्थ होकर कक्ष से बाहर निकलते हैं और भक्तों को दर्शन देते हैं। जिसे नव यौवन नैत्र उत्सव भी कहते हैं। इसके बाद द्वितीया के दिन महाप्रभु श्री कृष्ण और बडे भाई बलराम जी तथा बहन सुभद्रा जी के साथ बाहर राजमार्ग पर आते हैं और रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकलते हैं।

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