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कोविड-19 महामारी मे रखे बुजुर्गो का ख्याल : मनीषी श्रीसंतमुनि वनय कुमार

कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया मे आतंक मचा रखा है हर किसी की जुंबा पर बस एक ही नाम है लेकिन कुछ जीवन मे बदलाव से कोविड-19 महामारी पर काबू पाया जा सकता है। लेकिन जो सबसे खास बात सामने आ रही है कि अपने बुजुर्गो का ख्याल व उनकी सेहत के प्रति चेतन रहना है।

क्योकि वृक्ष जितना मर्जी पुराना हो जाए लेकिन उसे छाया आंगन मे सदा ही सुखदायी ही रहती है। इसलिए अपने बुजुर्गों बड़ों का सदा ख्याल रखे उनसे आर्शीवाद प्राप्त करते रहे। वो परिवार बहुत ही खुशनसीब होते जहां बडे बुजुर्गो का आदर सम्मान होता है और छोटो को सदा बडो का समय समय पर आर्शीवाद मिलता रहता है। आर्शीवाद वह शब्द है जिसका कोई मोल नही है। ये शब्द मनीष संत मुनिश्री विनय कुमार जी आलोक ने कहे।

मनीषीसंत ने कहा आशीर्वाद एक गुप्त मानसिक कवच की तरह सदा हमारे साथ रहता है। हमें गुप्त रूप से उससे बड़ी प्रेरणा मिलती रहती है। वह हमारी शक्ति का छिपा हुआ एक शक्ति केंद्र है। अत: हमें महान कार्य करने से पूर्व आशीर्वाद ग्रहण करना चाहिए। विद्वानों, तपस्वियों तथा प्रशस्त आप्तजनों का जीवन नि:स्वार्थ होता है। वे समाज का हित चिंतन ही किया करते हैं। मन और वचन से सबकी भलाई ही चाहते हैं। उन्हें किसी से व्यक्तिगत लाभ नहीं उठाना होता।

इसलिए उनका शक्तिशाली मस्तिष्क प्रबल विचार तरंगें फेंका करता है। वे सबके विषय में शुभ कल्पनाएं ही किया करते हैं। फलस्वरूप उनके आशीर्वाद में अद्भुत फलदायिनी शक्ति होती है। मनीषीसंत ने आगे कहा जो व्यक्ति या स्थिति आपको अप्रिय लगती है उसे नकारात्मक ढंग से देखने के बजाय सकारात्मकता के साथ देखें। जो बात आपको बहुत ज्यादा परेशान कर रही है उससे अलग सोचने या कुछ नया करने का प्रयास करें। उन लोगों के साथ वक्त बिताए जो आपको अच्छा सोचने के लिए प्रेरित करते हों या जिनके साथ वक्त बिताना अच्छा लगता हो। एक्सरसाइज करें क्योंकि यह आपको किसी भी बुरे खयाल से निकलने में मदद करती है।

आपके भीतर हर उस चीज के लिए प्रेम की भावना है, जो आप देखते हैं और जो नहीं देखते हैं। इसका मतलब है कि आपने पसंद और नापसंद के द्वैत को खत्म कर दिया है। इसका मतलब है कि अब आपके लिए ठीक है और ठीक नहीं है का कोई अस्तित्व नहीं रहा। आपके लिए हर चीज ठीक है। आशीर्वाद प्राप्त करना, भारत की एक पुरानी परंपरा है। विद्वानों, तपस्वियों और प्रशस्त आप्तजनों से ईष्टसिद्धि के लिए शक्ति और कल्याण के लिए आशीर्वाद प्राप्त करना, भारत की एक पुरानी परंपरा है। आशीर्वाद एक प्रकार की शुभ कल्पना है।

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