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कालाष्टमी व्रत आज, इस मुहूर्त में करेंगे पूजा तो काल भैरव होंगे प्रसन्न

Kalashtami fasting today: भैरव बाबा यानी की भोलेनाथ के रूद्ररूप की पूजा के लिए वैशाख माह में कालाष्टमी का व्रत किया जाता है। इस बार यह तिथि आज यानी कि 4 मई 2021 को है। इस दिन भगवान भैरव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि कालाष्टमी का व्रत करने से जीवन में सभी तरह की समस्याओं से मुक्ति मिलती है। साथ ही भैरव बाबा की कृपा से पापी ग्रह राहु-केतु से मिलने वाले दोष भी दूर होते हैं। तो आइए जानते हैं व्रत का शुभ मुहूर्त, महत्व और कथा..

कालभैरव की आराधना करने से जीवन की सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं। लेकिन ध्यान रखें कि व्रत हमेशा शुभ मुहूर्त में ही रखा जाना चाहिए। इस बार पूजा का मुहूर्त यानी कि वैशाख मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 03 मई 2021 सोमवार को दोपहर 01 बजकर 39 मिनट से शुरू होगी। इसके बाद अष्टमी तिथि का समापन 04 मई 2021 मंगलवार को दोपहर 01 बजकर 10 मिनट पर होगा।

मान्यताओं के अनुसार कालाष्टमी के दिन ही भोलेनाथजी भैरव के रूप में प्रकट हुए थे। इस दिन को कालभैरव जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं। मान्यता है कि यदि सच्चे मन से भैरव बाबा की पूजा की जाए तो बिगड़ते कार्य बन जाते हैं। यही नहीं भैरव बाबा की कृपा से उनकी पूजा करने वाले जातकों को किसी भी तरह के भूत-पिशाच और ग्रह दोष नहीं सताते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि भैरव बाबा की पूजा करते समय मन में किसी भी तरह की छल-कपट नहीं होना चाहिए।

कालाष्टमी की एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार की बात है कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश इन तीनों में श्रेष्ठता की लड़ाई चली। इस बात पर बहस बढ़ गई, तो सभी देवताओं को बुलाकर बैठक की गई। सबसे यही पूछा गया कि श्रेष्ठ कौन है? सभी ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए और उत्तर खोजा लेकिन उस बात का समर्थन शिवजी और विष्णु ने तो किया, परंतु ब्रह्माजी ने शिवजी को अपशब्द कह दिए। इस बात पर शिवजी को क्रोध आ गया और शिवजी ने अपना अपमान समझा।

शिवजी ने उस क्रोध में अपने रूप से भैरव को जन्म दिया। इस भैरव अवतार का वाहन काला कुत्ता है। इनके एक हाथ में छड़ी है। इस अवतार को ‘महाकालेश्वरÓ के नाम से भी जाना जाता है इसलिए ही इन्हें दंडाधिपति कहा गया है। शिवजी के इस रूप को देखकर सभी देवता घबरा गए। भैरव ने क्रोध में ब्रह्माजी के 5 मुखों में से 1 मुख को काट दिया, तब से ब्रह्माजी के पास 4 मुख ही हैं। इस प्रकार ब्रह्माजी के सिर को काटने के कारण भैरवजी पर ब्रह्महत्या का पाप आ गया।

ब्रह्माजी ने भैरव बाबा से माफी मांगी तब जाकर शिवजी अपने असली रूप में आए।

भैरव बाबा को उनके पापों के कारण दंड मिला इसीलिए भैरव को कई दिनों तक भिखारी की तरह रहना पड़ा। इस प्रकार कई वर्षों बाद वाराणसी में इनका दंड समाप्त होता है। इसका एक नाम ‘दंडपाणीÓ पड़ा था।

कालाष्टमी महत्व: भगवान कालभैरव के बटुक भैरव स्वरूप भक्तों को अभय देने वाले सौम्य रूप में प्रसिद्ध है। मान्यताओं के अनुसार भगवान भैरव के भक्तों का अनिष्ट करने वालों को तीनों लोकों में कोई शरण नहीं दे सकता है। कालाष्टमी पर व्रत और पूजा आराधना करने से साधक को भय से मुक्ति प्राप्त होती है और सभी संकट आने से पहले ही दूर हो जाते हैं। इस दिन पूजा करने से रोगों से मुक्ति भी प्राप्त होती है। भगवान काल भैरव अपराधिक प्रवृति वालों के लिए भयंकर दंडनायक हैं तो वहीं भक्तों की रक्षा करने वाले हैं। इनकी पूजा करने से समस्त नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं और राहु केतु जैसे ग्रहों के बुरे दोष से भी मुक्ति मिलती है।

कालाष्टमी व्रत पूजा विधि: कालाष्टमी के दिन प्रात: जल्दी उठकर स्नानादि कर लें और भगवान कालभैरव की पूजा अर्चना करें। घर में भगवान शिव की पूजा भी कर सकते हैंं।

  • एक लकड़ी की चौकी पर शिव जी और कालभैरव भगवान की तस्वीर स्थापित करें।
  • अब गंगाजल छिड़के और फूल माला चढ़ाएं।
  • इसके बाद चौमुखी दीपक प्रज्वलित करें और तिलक करें।
  • अब कालभैरव भगवान को नारियल, इमरती, पान आदि चीजें अर्पित करें। 
  • कालाष्टमी की मुख्य पूजा रात्रि में की जाती है इसलिए पूरे दिन उपवास करें और रात्रि में पुन: कालभैरव भगवान की पूजा अर्चना करें।
  • रात्रि के समय सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें और काले तिल, उड़द आदि से पूजा अर्चना करें।
  • इस दिन कालभैरव भगवान के मंत्रों और भैरव चालीसा का पाठ करना चाहिए।
  • कुत्ते को भगवान कालभैरव का वाहन माना गया है इसलिए किसी कुत्ते को मीठी रोटी आदि खिलानी चाहिए। इससे भगवान कालभैरव प्रसन्न होते हैं और जीवन की सभी परेशानियां दूर होती हैं।

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