'सिर कट सकता है, झुक नहीं सकता': TMC से बगावत करने वालीं काकोली घोष का ममता बनर्जी पर तीखा हमला, दर्द और बगावत की पूरी इनसाइड स्टोरी

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'My head can be severed, but it will not bow'

नई दिल्ली। 'My head can be severed, but it will not bow'..... पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में बागवत की बयार चल रही है। पहले विधायकों ने बगावत की और अब सांसदों ने भी बगावत करते हुए बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन किया है। लोकसभा सांसद काकोली घोष की अगर मानें तो टीएमसी के 20 सांसदों ने एनडीए का समर्थन किया है।

इस बीच उन्होंने कहा है, "मेरा सिर कट जाएगा लेकिन झुकेगा नहीं। मैंने बहुत सह लिया। मैं 2011 में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यहां नहीं आई हूं। मैं यहां 40 साल से संघर्ष कर रही हूं और जैसा कि मैंने कहा, ऐसे लोगों की बातों का मुझ पर कोई असर नहीं होता।"

'मैं तब भी उनके साथ थी जब वह सत्ता में नहीं थीं'

उन्होंने आगे कहा, "हालात लगातार बिगड़ते गए हैं और मैं 40 साल से ममता बनर्जी के साथ रही हूं। वह मेरी गाइड, मेरी मेंटर और मेरी नेता रही हैं और मैं तब भी उनके साथ थी जब वह सत्ता में नहीं थीं। मैंने 2009 से पहले पांच चुनाव लड़े और हारे। इसलिए यह कहना बेकार है कि मैंने इसलिए उनका साथ छोड़ दिया क्योंकि वह पश्चिम बंगाल में सत्ता में नहीं हैं। ऐसा नहीं है।"

'पश्चिम बंगाल में उम्मीद के मुताबिक काम नहीं हुआ'

लोकसभा सांसद ने कहा, "मैं उनके साथ तब भी थी जब वह सत्ता में नहीं थीं। लेकिन उस समय एक ऐसी नीति थी जो पश्चिम बंगाल राज्य के गरीब लोगों के हित में थी लेकिन पिछले 3-4 सालों में काम उम्मीद के मुताबिक नहीं हुआ है। राज्य का विकास उम्मीद के मुताबिक नहीं हुआ है। कई तरह की वित्तीय गड़बड़ियां सामने आई हैं, जो अब साबित भी हो रही हैं।"

उन्होंने कहा, "शिक्षा, स्वास्थ्य और फिल्म इंडस्ट्री जैसे अलग-अलग सेक्टर पूरी तरह से ठप हो गए हैं। कानून-व्यवस्था भी ठीक नहीं थी। सरकारी अधिकारियों पर कुछ नेताओं की मनमानी के हिसाब से काम करने का बहुत ज्यादा दबाव था, जो किसी राज्य के विकास के लिए सही माहौल नहीं है।"

काकोली घोष ने कहा, "अब जनता के फैसले ने यह साबित कर दिया है जो मैं आपको बताने की कोशिश कर रही हूं। इसलिए हम राज्य के विकास, राष्ट्रीय हित और देश की सुरक्षा के लिए काम करना चाहते हैं। इसीलिए हम अलग से काम करना चाहते हैं।"

'20 सांसद अलग होने वाले हैं'

उन्होंने बताया, "हम 20 सांसद हैं जिन्होंने स्पीकर से अलग बैठने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया है। हम पश्चिम बंगाल के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करेंगे। साथ ही, हम पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल में फैली अराजकता, कुशासन और बेरोजगारी के खिलाफ हैं।"

टीएमसी सांसद ने कहा, "हमने उन्हें (लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को) पत्र सौंप दिया है। जब उन्हें समय मिलेगा तो वे खुद हमें बुलाएंगे। मैंने कहा कि लोकसभा में हम सभी बीस सांसद ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं। मैंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार की कई योजनाएं पूरे देश में लागू की गई हैं, लेकिन बंगाल में उन्हें लागू नहीं किया गया है। हमें उन योजनाओं को उन वोटरों तक पहुंचाना है जिन्होंने हमें चुना है।"

उन्होंने यह भी कहा, "कोई डरा-धमका नहीं रहा है। आप खुद देख सकते हैं, मैं यहां अकेली बैठी हूं। कहां है डराने-धमकाने वाली बात? हम सभी 20 सांसदों ने बैठकर (पत्र पर) हस्ताक्षर किए।"

'आगे क्या होगा बाद में पता चलेगा'

काकोली घोष ने कहा, "आगे क्या होगा, यह तो बाद में पता चलेगा। फिलहाल, क्या यह काफी नहीं है कि हम बंगाल और देश के लिए काम करना चाहते हैं और भारत को सुरक्षित रखना चाहते हैं? यह एक अहम मुद्दा है। हमारे लिए देश का मुद्दा सबसे ऊपर है।"

जब उनसे पूछा गया कि क्या ममता बनर्जी ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने कहा, "उस तरफ से किसी ने भी संपर्क करने की कोशिश नहीं की।"

उन्होंने आगे कहा, "जब मैं जिला अध्यक्ष थी और चुनाव के नतीजे खराब रहे तो मैंने व्यक्तिगत जिम्मेदारी ली यह सोचकर कि शायद मैंने अपना काम ठीक से नहीं किया और पद छोड़ दिया। उसके बाद भी, किसी ने मुझसे मुलाकात नहीं की और न ही फोन किया। मुझे बस किनारे कर दिया गया। ऐसा लगा जैसे उन्होंने किसी को मुझ पर भौंकने के लिए छोड़ दिया हो। मैं 40 साल से ममता बनर्जी के साथ हूं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे ऐसा दिन भी देखना पड़ेगा जब वह किसी को मुझे गालियां देने के लिए कहेंगी।"