Saturday, September 21, 2019
Breaking News
Home » धर्म / संस्कृति » व्यवहार की दृष्टि से देखे तो साथ चलते हैं संकल्प और समर्पण

व्यवहार की दृष्टि से देखे तो साथ चलते हैं संकल्प और समर्पण

अगर व्यवहार की दृष्टि से देखें तो संकल्प और समर्पण, दोनों विरोधाभासी बातें लगती हैं। आप या तो संकल्प कर सकते हैं या समर्पण कर सकते हैं। युद्ध में सामने वाले ने हथियार छोड़ दिए, तो समर्पण माना जाता है। जब तक लड़ रहे थे, तब तक संकल्प से लड़ रहे थे। जब संकल्प हारा, तो समर्पण कर दिया। लेकिन अध्यात्म में संकल्प और समर्पण साथ-साथ चलते हैं।

जैसे, ‘मैं अपना तन, मन, बुद्धि, हृदय, अंत:करण, सब कुछ ईश्वर को समर्पित करता हूं। वह उसका था ही, वह उसका है ही। हे प्रभु! सब कुछ तेरा है, तू ही संभाल।, इस तरह समर्पण किया। अपनी अच्छाई, बुराई सब उसको दे दी। अपने पास सिर्फ साधना करने का एक संकल्प बचाकर रखा। ‘साधना कर पाऊं, इसके लिए मुझे शक्ति दो।Ó ऐसी प्रार्थना कर संकल्पपूर्वक साधना शुरू कर दी, क्योंकि संकल्प के बगैर साधना नहीं होती। संकल्प के बिना अध्यात्म के पथ पर चला नहीं जा सकता।

कोई कहेगा कि संकल्प की शक्ति तो मुझमें है ही नहीं। ऐसा नहीं है। संकल्प की शक्ति का बीज सब के अंदर होता है। लेकिन अगर आप उस बीज को मिट्टी में न डाल कर, उसको खाद-पानी नहीं दोगे, तो वह फूटेगा नहीं। संकल्प-शक्ति का बीज भी हम सब के चित्त में ईश्वर ने दिया है। लेकिन इसको विकसित करना पड़ता है। अगर आप इसको विकसित नहीं करते हैं, तो यह बीज रूप में ही रह जाता है। अगर विकसित हो जाए, तो यह अंकुर भी बन सकता है, पौधा भी बन सकता है, पेड़ भी हो सकता है। शुरू में ही ‘हम मोक्ष पाएंगे, ब्रह्मज्ञान पाएंगे, समाधि पाएंगे, ऐसे बड़े-बड़े संकल्प मत करना। छोटे संकल्प करो। छोटे-छोटे कदम उठाओगे तो हजारों मीलों की यात्रा भी पूरी हो जाएगी। हजारों मील चलने की शक्ति नहीं है, पर घबराओ मत! एक कदम चल सकते हो तो एक ही कदम चलो। एक-एक कदम चलते रहने से एक मील हो जाएगा। फिर धीरे-धीरे कई सौ, कई हजार मील भी चल लोगे।

आप अपनी इस संकल्प-शक्ति का उपयोग सही तरीके से कर नहीं रहे हैं, इसीलिए जीवन में इतना अधूरापन है। असल में तुम तुम नहीं, एक भीड़ हो। संकल्प तुमने किया कि ‘सुबह उठूंगाÓ, पर चूंकि संकल्प में दृढ़ता नहीं थी, संकल्प के पीछे प्रार्थना का बल नहीं था, तो निर्णय करते समय जो तुम थे, वह घड़ी का अलार्म बजते समय नहीं होते हो। वह तुम्हारा दूसरा रूप तुम्हारे ही बनाए हुए निर्णय को तोडऩे के लिए दस बहाने ढूंढ लेता है। कुछ भी करना चाहो या कुछ पाना चाहो और अगर तुम अपने मन की संकल्पशक्ति को कमजोर पाओ, तो एक प्रयोग करना। रात को होश से सोना और सुबह होश से जगना। अगर होशपूर्वक सोओगे, तो सुबह नींद से बाहर आते समय एक स्थिति ऐसी आएगी, जहां लगेगा कि न पूरे सोये हो और न पूरे जगे हो। यह जो अशरीरी होने की अनुभूति का काल होता है, इस काल में आपकी मन की शक्ति बहुत प्रचंड होती है।

रात को तुम जितना स्वप्न का जगत देखते हो, वह तुम्हारे मन ने ही रचा होता है। सुबह उठते समय मन की वही स्वप्न का जगत खड़ा कर देने की शक्ति अभी भी मौजूद होती है। इसलिए इस समय का उपयोग करते हुए तुम जो चाहो, संकल्प कर लो। यह जगत रचने की शक्ति रखने वाला मन उस संकल्प को पूरा कर देगा। संकल्प शक्ति बढ़ाने का एक उपाय यह है।

दूसरा, जब आप ध्यान करने के बाद उठोगे, उठने का मतलब यह नहीं कि शरीर से खड़े हो जाओ, उठने का मतलब मन बहिर्मुख होना शुरू हो, उस समय अपने संकल्प को प्रार्थनापूर्वक तीन बार दोहराओ। अगर तुम्हारे संकल्प में कमी होगी, तो उस कमी को तुम्हारी प्रार्थना का बल पूरा कर देगा।

भारत में संकल्प शक्ति को बढ़ाने के बहुत-से प्रयोग किए
भारत में संकल्प शक्ति को बढ़ाने के बहुत-से प्रयोग किए गए हैं, जैसे- व्रत-अनुष्ठान। ‘आज हम अन्न नहीं खाएंगे,या ‘मैं अगले आधे घंटे तक मौन रहूंगा। अगर आधा घंटा तुम मौन रह गए तो समझ लो कि उतनी संकल्प शक्ति बढ़ गई। इसी तरह धीरे-धीरे बढ़ाते-बढ़ाते पांच घंटों का, पूरे दिन का, फिर अगले दो दिन का मौन रखते हुए इसको महीनों में बदल सकोगे। संकल्प शक्ति को विकसित करने के लिए छोटे-छोटे साधन करें। अगर आप सुबह नहीं उठ पाते हो, नींद नहीं खुलती, ध्यान टूट जाता है, तो जल्दी उठने के अलार्म जैसे उपायों के साथ रात को सोने से पहले प्रार्थना भी करो, ‘प्रभु! मैं चाहता हूं कि सुबह जल्दी उठकर आपका सुमिरन करूं, ध्यान करूं। मेरी कमजोरी के कारण मैं उठ नहीं पाऊंगा, पर आप चाहें तो मैं जग जाऊंगा। ‘सुबह पांच बजे उठूंगा ऐसा तीन बार कहो और सो जाओ। तुम्हारे अंदर की चेतना सुबह-सुबह पांच मिनट पहले ही तुम्हें जगा देगी। तुम्हारे प्रार्थनापूर्वक किए गये संकल्प को कोई नहीं बदल सकता।

Check Also

पितृपक्ष में इन परिजनों को है पितृों के श्राद्ध का है पूरा अधिकार

श्राद्धकर्म के संबंध में शास्त्रों में कई सारी बाते कही गई है। इसमें विधि-विधान से …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Share
See our YouTube Channel