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बुढ़ापे में बीमारियों से कराह रहे थे, दोनों को दे दी मौत

नई दिल्ली: जिंदगी में बुढ़ापा वो दौर होता है जब अपने-पराए सब साथ छोड़ने लग जाते हैं और अगर कोई साथ पकड़ता है तो वो है सिर्फ बीमारी।बीमारी बुढापा में बड़ा साथ देती है।कहने का अर्थ ये है कि बुढ़ापे में नानाप्रकार की बीमारियां घेर लेती हैं जो बड़ा तंग करती हैं असहन कष्ट देती हैं।इस दौरान ये बीमारियां एक ऐसे भी मोड़ पर लाके खड़ी कर देती हैं जब मौत पसंद आने लगती है।अब आप सोच रहे होंगे कि हम आपको ये ज्ञान क्यों दे रहे हैं।दरअसल, ऐसा ही कुछ दो बेजुबान जानवरों के साथ हुआ है जिनकी कहानी जब आप सुनेंगे तो स्तब्ध रह जाएंगे।

बात है अमेरिका के लॉस एंजिलेस जू की।यहां एक बूढ़े शेर और शेरनी को मौत दे दी गई है।एनीमल हेल्थ केअर और जू स्टाफ ने बूढ़े शेर और शेरनी को मौत की नींद सुलाया है।दोनों को साथ इसलिए मारा गया क्योंकि दोनों को एक दूसरे का साथ बड़ा पसंद था और हरदम दोनों साथ ही रहते थे या यूं कहें कि दोनों में गहरा प्यार था।जू में जबसे ये एक-दूसरे से मिले थे तबसे अबतक इनको कभी भी अलग-अलग नहीं देखा गया।शेर का नाम ह्यूबर्ट था और शेरनी का नाम कलीसा।

21 साल की दोनों की उम्र…कई दर्दनाक बीमारियों से जूझ रहे थे…

बताते हैं कि, ह्यूबर्ट और कलीसा दोनों की उम्र 21 साल हो चुकी थी जो कि शेर प्रजाति में बुढ़ापे की उम्र होती है।जहां बुढ़ापे की वजह से दोनों को बड़ी खतरनाक और दर्दनाक बीमारियों ने घेर रखा था।दोनों को इलाज से कोई आराम नहीं मिल पा रहा था और इनकी स्थिति बेहद दयनीय होती जा रही थी।इन्हें असहाय दर्द था जिसे बेजुबान होने के चलते ये व्यक्त नहीं कर सकते थे।इनकी पीड़ा देख कर रोना आता था।इसलिए इन्हें इनकी पीड़ा से मुक्त करने का एक बड़ा मुश्किल फैसला लिया गया जो था इनकी जिंदगी को समाप्त करना।क्योंकि अब मौत ही इन्हें इनके असहनीय कष्ट से उभार सकती थी।

ह्यूबर्ट और कलीसा यहां-यहां जन्मे थे…

जू स्टाफ बताता है कि, Hubert शिकागों के Lincoln पार्क जू में पैदा हुआ था।जबकि Kalisa सीएटल के वुडलैंड पार्क जू से आई थी।साल 2014 में जब उन्हें लॉस एंजिलेस जू में ट्रांसफर किया गया तो दोनों मिले थे।तब से दोनों एक दूसरे के होकर जी रहे थे।दोनों जू की शान थे।इनके प्यार से चिड़ियाघर भी खूबसूरत रहा लेकिन बढ़ती उम्र में इन्हें बीमारियां लग गईं और इनकी हेल्थ गिरती चली गई।ये बिल्कुल लजमर हो गए,इनका इलाज किया गया लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ।हमसे इनका दर्द देखा नहीं गया और इसलिए हमने मज़बूरीबस इन्हें मारने का बीड़ा उठाया ताकि इन्हें इनके दर्द और बीमारियों से आजादी मिल जाये।

जीवित रहते दोनों हर वक्त साथ रहे, इसलिए अब बिछड़े न…

जू स्टाफ के मुताबिक, वैसे भी बीमारी से दोनों को मर जाना था।इनके बचने की कोई उम्मीद नहीं थी।दोनों को साथ में मारने का एक कारण यह भी रहा कि जीवित रहते दोनों हर वक्त साथ रहे और अब मरते समय बिछड़े न क्योंकि आगे चलकर बीमारी से अगर दोनों की अलग अलग मौत होती तो एक के मरने पर एक को विरह बर्दास्त नहीं होती और उसके बीमारी के साथ याद में घुट घुटकर प्राण निकलते।जहां यह देखना हमारे लिए और कठिन हो जाता।

यह जोड़ी हमेशा याद रहेगी…

जू स्टाफ ने कहा कि हम इस लाजवाब जोड़ी को जीते जी भुला नहीं पाएंगे।वैसे कोई शेर या शेरनी की औसत उम्र 20 से 25 साल होती है लेकिन वह जी सिर्फ 12 से 17 साल ही पाते हैं लेकिन यह जोड़ी पूरे 21 साल जीई जो बुढ़ापे के चरम पर थी।यह वास्तव में दिल से दुःखद है कि हमें इस प्रतिष्ठित जोड़ी को अलविदा कहना पड़ा।ये जोड़ी हमारे इतिहास का एक सकारात्मक हिस्सा रहेगी।

लोगों ने जब यह जाना तो वह नाराज हुए…

लोगों को जब ये पता चला कि, शेर और शेरनी को ऐसे मार दिया गया है तो उनमें नाराजगी नजर आई।लोगों ने लिखा- इन्हें प्राकृतिक तौर पर क्यों नहीं मरने दिया गया ? यह दुखद है।हालांकि इनमे से जब कुछ लोगों ने शेर और शेरनी के दर्द को देखते हुए सोचा तो वह शांत हो गए।

जब ठीक थे तो ऐसे थे ह्यूबर्ट और कलीसा…बेहद सुंदर…

Posted by Shiva Tiwari

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