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चंडीगढ़ के मोनू की पहली बार कैसे हुई कोरोना पीड़ित होने के बाद भी दोनों फेफड़ों की ट्रांसप्लांट सर्जरी, देखें

चंडीगढ़, 15 सितम्बर: कोरोना इंसान पर कैसे प्रहार करता है ये आप लोग जानते ही होंगे | गले की खराश से शुरू होते होते सर दर्द, बुखार, और साँस न ले पाना ये सब कोरोना के लक्षण है | इसमें स्थिति तब बिगड़ती है जब कोरोना पीड़ित साँस नहीं ले पाता | फेफड़े काम करना बंद क्र देते है | अब ऐसी बीमारी के बीच अगर फेफड़ों के जान लेवा रोग से कोई व्यक्ति पीड़ित हो और इसके साथ ही उसे कोरोना जैसी बीमारी भी हो तो उसका बच पाना कितना मुश्किल हो जाता है |

एक ऐसा ही मामला चंडीगढ़ में आया है | चंडीगढ़ में रहने वाले 32 वर्षीय रिज़वान उर्फ मोनू को फेफड़ों के जानलेवा रोग से जूझना पड़ रहा था, जिसे मेडिकल भाषा में सारकॉयडोसिस कहते हैं | मोनू के कोरोना पॉज़िटिव होने के कारण केस और मुश्किल हो गया था |

हैदराबाद के एक अस्पताल में फेफड़ों के एक गंभीर रोग से जूझ रहे मरीज़ को नई ज़िंदगी दी गई, डॉक्टरों ने उसके दोनों फेफड़े ट्रांसप्लांट कर के उसे नयी जिंदगी दी | मोनू को ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है |

कोरोना की बीमारी के बीच सारकॉयडोसिस से जूझ रहे रिज़वान के दोनों फेफड़े पूरी तरह खराब हो चुके थे | डॉक्टरों के पास सिर्फ ट्रांसप्लांट का ही विकल्प बचा था | हैदराबाद के कृष्णा इंस्टीट्यूट में उसका इलाज चल रहा था लेकिन नए फेफड़ों के इंतज़ार में दिन गुजरते जा रहे थे |

इस मुसीबत के साथ दोहरा संकट तब हुआ, जब फेफड़ों की बीमारी के साथ ही, रिज़वान कोरोना पॉज़िटिव भी पाया गया था | डॉ. संदीप अटवार ने उसका इलाज किया, जब उसकी हालत बिगड़ रही थी. और इसी दरमियान एक संयोग ने नई उम्मीद दी |

मोनू को नई ज़िंदगी देने वाले डॉ. अटवार द्वारा बताया गया की मोनू के लिए फेफड़े कोलकाता से मिले, जब वहां मृत एक व्यक्ति के फेफड़े रिज़वान से मैच हुए | इसके बाद, कोलकाता से एयरलिफ्ट के ज़रिये फेफड़े हैदराबाद मंगाए गए |

ऐसी सर्जरी में 24 साल का अनुभव रखने वाले डॉ. अटवार ने कहा कि यह बेहद उलझी हुई सर्जरी थी क्योंकि एक नहीं बल्कि दोनों ही फेफड़ों को ट्रांसप्लांट किया जाना था | यहां गलती की गुंजाइश नहीं थी | इसके बावजूद डॉक्टर ने इस तकरीबन असंभव काम को संभव कर दिखाया |

भारत में यह पहली बार है जब किसी मरीज़ के दोनों फेफड़ों का ट्रांसप्लांट किया गया है | अब डॉक्टर रिज़वान को अगले छह हफ्तों तक मॉनिटर करेंगे. डॉ. अटवार अपने ​करियर में 12 हज़ार से ज़्यादा सर्जरी को अंजाम दे चुके हैं, जिनमें फेफड़ों, दिल और आर्टिफिशियल ट्रांसप्लांट सर्जरी शामिल हैं |

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