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जानते हो 'बजट' कैसे बनता है, एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रखना पड़ता है

जानते हो ‘बजट’ कैसे बनता है, एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रखना पड़ता है

नई दिल्ली: बजट देखने और सुनने में जितना छोटा और सरल लगता है इसकी प्रक्रिया उतनी ही बड़ी और कठिन होती है|बजट की प्रक्रिया को बेहद गुप्त रखा जाता है|सदन में पेश किए जाने से पहले इसकी एक भी जानकारी लीक नहीं हो इसके लिए तमाम तरह के कदम उठाये जाते हैं|

दरअसल, अगर बजट का कोई हिस्सा लीक हो जाए तो उसका बड़ा असर देश पर पड़ सकता है।यही कारण है कि बजट प्रक्रिया में शामिल लोगों पर भी कड़ी निगरानी रखी जाती है|जब तक बजट प्रक्रिया चलती है, इससे जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों को बाहर जाने की अनुमति नहीं होती है।अधिकारियों-कर्मचारियों का डेरा उसी ब्लॉक में हो जाता है जिस ब्लॉक में बजट की छपाई चल रही होती है|

अब यहां आपको बतादें कि वित्त मंत्रालय की प्रेस में डेप्युटी मैनेजर के पद पर तैनात कुलदीप कुमार शर्मा जब बजट की छपाई कर रहे थे तब उनके पिता का निधन हो गया था लेकिन वह घर नहीं जा पाए क्योंकि उन्होने बजट छपाई के दौरान तय नियमों को पालन किया|हालांकि, ऐसा नहीं है कि अगर वे जाना चाहते और उन्हें जाने नहीं दिया जाता…..शर्मा अगर जाना चाहते तो उन्हें जरूर जाने दिया जाता..लेकिन वह खुद नहीं गए…..उन्होने पिता के जाने का सारा दुःख अपने अंदर समेट बजट छपाई की ड्यूटी कर देश की ड्यूटी को प्राथमिकता दी|जिसके लिए वित्त मंत्रालय की ओर उनकी तारीफ की गई|तय नियमों के अनुसार, जब आज बजट पेश हो गया तब शर्मा बाहर निकले हैं ओर अपने घर पहुंचे हैं|

फोन पर बात कर सकते हैं कि लेकिन आखिरी दिनों में वो भी नहीं…..

बजट दस्तावेज बेहद गोपनीय होते हैं|बजट प्रक्रिया में वित्त मंत्री का भाषण सबसे सुरक्षित दस्तावेज होता है।जिसे बजट घोषणा से सिर्फ दो दिन पहले ही छपने के लिए भेजा जाता है।इसलिए बजट दस्तावेज की गोपनीयता के लिए आखिरी दिनों में इससे जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों को अपने परिवार से बात करने की भी इजाजत नहीं रहती है।

जब पेश होना होता बजट उससे पहले होती है कैबिनेट की बैठक …..

आपको ज्ञात होगा कि, बजट पेश करने से पहले बजट को लेकर वित्त मंत्री राष्‍ट्रपति के पास बजट पेश करने की अनुमति मांगने पहुंचता है|राष्‍ट्रपति की अनुमति के बाद वित्‍त मंत्री कैबिनेट की बैठक में शामिल होता है|इस बैठक में सरकार के सभी मंत्री भाग लेते हैं|अब समझ लो कि इतनी गोपनीयता रखी जाती है कि बैठक में शामिल होने वाले मंत्रियों के फोन तक बाहर रखवा लिए जाते हैं|सभी मंत्री बिना फोन के बैठक में हिस्सा लेते हैं|

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