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देहरादून में जहरीली शराब से मौत के मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

नैनीताल। देहरादून में जहरीली शराब से हुई सात लोगों की मौत के मामले को शुक्रवार को उच्च न्यायालय ने गंभीरता से लेते हुए सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। इस मामले में अगली सुनवाई 04 नवंबर को होगी।

मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी की युगलपीठ ने आज इसी साल 06 फरवरी को रूड़की में जहरीली शराब से हुई 45 लोगों की मौत के मामले को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता प्रमोद शर्मा की ओर से एक प्रार्थना पत्र दायर कर राजधानी देहरादून में 19 सितम्बर को हुई मौतों के मामले को उठाया गया और मृतकों के परिजनों को जल्द मुआवजा देने की मांग अदालत से की गयी।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता नमन काबोंज की ओर से देहरादून के आबकारी अधिकारी को भी निलंबित करने की मांग की गयी है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि सरकार ने जांच लंबित होने के नाम पर हरिद्वार के निलंबित आबकारी अधिकारी को बहाल कर दिया है। याचिकाकर्ता की ओर से सरकार के कदम का विरोध किया गया और अदालत से मांग की कि सरकार के आदेश को निरस्त किया जाये।

श्री कांबोज ने बताया कि युगलपीठ ने प्रार्थना पत्र में उठाये गये तीनों बिन्दुओं पर सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही इस मामले की सुनवाई के लिये 04 नवम्बर की तिथि मुर्रर की है।

उल्लेखनीय है कि राजधानी देहरादून में विगत 19 सितम्बर को जहरीली शराब का मामला सामने आया था। इस हादसे में कथित रूप से सात लोगों की मौत हो गयी थी जबकि छह लोग बीमार हो गये थे। इस मामले के प्रकाश में आने के बाद त्रिवेन्द्र सरकार विरोधियों के निशाने पर आ गयी थी। साथ ही सरकार की काफी किरकिरी भी हुई थी। इस मामले को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भी गंभीरता से लिया था और उसी के बाद मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी हो पायी थी।

इससे पहले भी इसी साल 06 फरवरी को हरिद्वार के रूड़की में जहरीली शराब का वीभत्स घटनाक्रम सामने आया था। इसमें कुल 45 लोग मारे गये थे जबकि 32 लोग गंभीर बीमार हो गये थे। सरकार इस हादसे के बाद हरकत में आयी थी और कुछ लोगों को निलंबित कर दिया था। श्री कांबोज ने बताया कि जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद ही सरकार ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख और गंभीर रूप से बीमार को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी है।

इस मामले को काशीपुर निवासी प्रमोद शर्मा की ओर से उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर चुनौती दी गयी थी। याचिका में दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने और मृतकों के परिजनों एवं बीमार लोगों को आर्थिक सहायता देने की मांग की गयी थी।

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