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सेहत का ध्यान: अगर आप हैं मुंह के छालों से परेशान, तो यह खबर है आपके काम की

मुंह में छाले होना एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या है. अधिकतर मामलों में कुछ दिनों में ये अपने आप ही ठीक हो जाते हैं। लेकिन कईं लोग अक्सर होने वाले मुंह के छालों से परेशान रहते हैं. इनमें बहुत दर्द भी होता है और कईं बार ये समस्या इतनी गंभीर हो जाती है कि बोलने और खाने में भी परेशानी होती है. वैसे 25-35 वर्ष के आयुवर्ग के लोगों को ये समस्या अधिक होती है, लेकिन ऐसा नहीं है किसी को किसी भी उम्र में मुंह में छाले नहीं हो सकते हैं|

मुंह में छालों की समस्या क्या है?

मुंह के छालों को मॉउथ सोर्स या मॉउथ अल्सर्स भी कहते हैं. ये छोटे-छोटे छाले होते हैं, जो मुंह के मुलायम उतकों या मसूड़ों पर पर विकसित हो जाते हैं, कईं बार जबान या तालू के नीचे भी विकसित हो जाते हैं. ये संक्रामक नहीं होते हैं, लेकिन इनमें तेज दर्द हो सकता है, जिससे खाने और बोलने में परेशानी हो सकती है. ये अधिकतर गोल या अंडाकार होते हैं, इनका केंद्र सफेद या पीला होत है और इनकी बार्डर लाल होती है. छाले विकसित होने से एक या दो दिन पहले जलन या झुनझुनी महसूस हो सकती है. गंभीर अल्सर के कारण खाने-पीने में काफी परेशानी होती है, बोलने में भी दर्द होता है. इनके साथ तेज बुखार भी आ सकता है. दर्द तंत्रिकाओं के कारण होता है, जो मुख गुहा के सतह की सबसे बाहरी परत पर होती है, जो एक खुला और अल्सरयुक्त गड्ढा बनने से एक्सपोज हो जाती हैं|

लक्षण

अधिकतर मामलों में, मुंह के छालों से थोड़ा लालपन और दर्द की समस्या होती है, विशेषरूप से खाते और पीते समय. इसके कारण छालों के आसपास जलन या झुनझुनी की संवेदना महसूस होती है. मुंह में इनके आकार, गंभीरता और स्थिति के आधार पर खाना, पीना, निगलना, बोलना या सांस लेना कठिन होता है. छाले, फोलों में भी बदल सकते हैं. निम्न लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं. रैशेज हो जाना, जोड़ों में दर्द, डायरिया, बुखार आना.

मुंह के छालों के कारण

मुंह के छाले कईं कारणों से होते हैं दैनिक जीवन की मामूली गलतियों से लेकर गंभीर बीमारियों के कारण. आमतौर पर, मुंह के छाले विकसित हो सकते हैं, अगर बोलने या खाना खाने में आपके होंठ, जीभ या गाल कट जाएं.

अत्यधिक गर्म चीज खाने या पीने से मुंह जल जाए.
मुंह के डेंचर या ब्रेसेस से जलन अनुभव होना.
अत्यधिक रगडक़र दांत साफ करना, या कड़े ब्रश वाले टूथब्रश इस्तेमाल करना.
बैक्टीरिया, वाइरस और फंगस का संक्रमण.
कॉफी का अधिक मात्रा में सेवन.
तंबाकू चबाना.
कभी-कभी, मुंह में छाले इनके परिणाम स्वरूप या इनकी प्रतिक्रिया में भी हो सकते हैं.
दवाईयों के साइट इफेक्ट्स, जिंजिवाइटिस, रेडिएशन एंड कीमोथेरेपी। ऑटो इम्यून डिसआर्डर. कैंसर, एड्स या हाल में हुए अंग प्रत्यारोपण के कारण इम्यून तंत्र का कमजोर हो जाना. तनाव या बीमारी के कारण इम्यून तंत्र का कमजोर हो जाना. हार्मोन के स्तर में परिवर्तन. विटामिनों की कमी, जैसे कि फोलेट, बी12 और विटामिन सी. आंतों से संबंधित समस्याएं जैसे क्रोहन डिसीज या इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस).

तो डॉक्टर से संपर्क करें

आसामान्य रूप से बड़े (इंच से बड़े) हो जाएं. बार-बार छाले हो जाएं, पुराने ठीक न हो, उसके पहले नए हो जाएं. दो से अधिक सप्ताह तक रहें. तेज दर्द हो. खाने या पीने में बहुत परेशानी हो. छालों के साथ तेज बुखार.

उपचार

मामूली छाले, प्रकृतिक रूप से 10-15 दिन में अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन अगर ये 3 सप्ताह तक हील नहीं हों तो फिर उपचार की आवश्यकता पड़ती है. उपचार समस्या की गंभीरता के आधार पर किया जाता है. सूजन और दर्द को कम करने के लिए माउथ वॉश, पेस्ट, क्रीम या जेल दिए जाते हैं. अगर मुंह में होने वाले छालों का कारण मिनरल्स और विटामिन्स की कमी है तो फोलेट (फॉलिक एसिड), विटामिन बी6, बी12 या जिंक के सप्लीमेंट्स लेना जरूरी हो जाता है. अगर ये किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के कारण है, तो दवाईयां दी जाती हैं और दूसरी जरूरी उपचार किए जाते हैं. जब मुंह के छाले, माउथ कैंसर के कारण है, तो सबसे पहले बायोप्सी की जाती है, इसके पश्चात सर्जरी या कीमोथेरेपी की जरूरत पड़ती है.

रोकथाम

कोई एक तरीका नहीं है जिससे आप मुंह के छालों से बच सकते हैं, क्योंकि ये कईं कारणों से होते हैं. लेकिन कईं उपाय हैं जो इनसे बचने में सहायता कर सकते हैं जैसे कि-
गर्म और मसालेदार भोजन का सेवन न करें. इससे प्रभावित क्षेत्र में जलन और चुभन हो सकती है.
स्वस्थ्य और पोषक भोजन का सेवन करें, जो विटामिन बी, सी और जिंक से भरपूर हों.
माउथ अल्सर में बैक्टीरिया का संक्रमण तेजी से होता है, इसलिए अपने मुंह को साफ रखें, एंटी
बैक्टीरियल मॉउथ वॉश का इस्तेमाल करें.
ऐसे टूथपेस्ट का इस्तेमाल न करें जिसमें कड़े रसायन जैसे सोडियम लॉरेल सल्फेट होता है.
अपने तनाव के स्तर को कम करें, ऐसी गतिविधियां करके जो आपको रिलैक्सिंग लगें जैसे योगा, ध्यान या एक्सरसाइज.

गर्म, मसालेदार, नमकीन, खट्टी और अत्यधिक शूगर वाले खाद्य पदार्थों से दूर रहें.
तंबाकू और सुपारी का सेवन न करें.
अपनी डाइट में ताजे फलों और कच्ची सब्जियों को जरूर शामिल करें. एअरेटेड ड्रिंक्स का सेवन न करें.
हार्ड फूड्स की बजाय सॉफ्ट फूड्स खाएं. अपने भोजन में ताजे दही, छाछ, पनीर और दूसरे डेयरी उत्पादों को शामिल करें.
ढेर सारा पानी पिएं.

घरेलु उपाय

कुछ घरेलु उपाय हैं जिनके द्वारा दर्द में आराम मिलता है, घाव तेजी से भरता है, छालों पर बर्फ लगाएं, इससे आराम मिलेगा.
मुलायम ब्रश से धीरे-धीरे ब्रश करें, ऐसे पेस्ट का इस्तेमाल करें जिसमें झाग अधिक नहीं बनते हैं. छालों पर बैकिंग सोडा और पानी का पतला पेस्ट लगाएं. नारियल के तेल में शहद मिलाकर लगाएं, दोनों में एंटी बैक्टीरियल विशेषताएं होती हैं. हल्दी में एक चम्मच ग्लिसरीन मिलाकर छालों पर लगाएं. थोड़ा सा नारियल चबा लें. छालों पर सिर्फ शहद भी लगा सकते हैं, ये नमी बनाए रखता है, जख्म नहीं होने देता और नये उतकों के विकास की प्रक्रिया को भी तेज कर देता है. डॉ. राहुल अग्रवाल, सलाहकार, ईएनटी विशेषज्ञ, मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल वैशाली उमेश कुमार सिंह

-डॉ. राहुल अग्रवाल , सलाहकार, ईएनटी विशेषज्ञ, मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल वैशाली

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