अमृता हॉस्पिटल में ए.एम.आर नैक्स्ट 2025: ड्रग रज़िस्टैंस के खतरे से निपटने के लिए एकजुट हुए विशेषज्ञ

AMR Next 2025 at Amrita Hospital

AMR Next 2025 at Amrita Hospital

फरीदाबाद। दयाराम वशिष्ठ: AMR Next 2025 at Amrita Hospital: अमृता हॉस्पिटल में आयोजित ए.एम.आर नैक्स्ट 2025 सम्मेलन में राष्ट्रीय और वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बढ़ते एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (ए.एम.आर) के खतरों से निपटने के लिए एकजुटता दिखाई। दो दिवसीय इस सम्मेलन में विज्ञान, नीति निर्माण, और स्वास्थ्य क्षेत्र के नेताओं ने ए.एम.आर की चुनौती को समझने और इसके समाधान के लिए एकजुट प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।

केंद्रीय राज्य मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने उद्घाटन सत्र में कहा, "भारत में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस से निपटना अत्यंत आवश्यक है। हमने वन हेल्थ के सिद्धांतों के साथ एक नेशनल एक्शन प्लान तैयार किया है, जो मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य को एकीकृत करने की दिशा में है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने प्रयोगशालाओं की क्षमता बढ़ाई है और परीक्षण विधियों को मानक बनाया है, जिससे त्वरित प्रतिक्रिया की संभावना बढ़ी है।

डॉ. संजीव सिंह, मेडिकल डायरेक्टर, अमृता हॉस्पिटल, ने कहा, "ए.एम.आर का स्वास्थ्य प्रणाली पर गहरा असर हो रहा है। मरीजों की मृत्यु दर बढ़ रही है और उपचार की लागत में वृद्धि हो रही है। हमें सहयोग और अनुसंधान को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।"

इस सम्मेलन में प्रोफेसर एलिसन होम्स ने कहा, "ए.एम.आर एक वैश्विक खतरा है, जिसका सामना एक मजबूत अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से ही किया जा सकता है।" वहीं, डेविड प्राइस ने जोर दिया कि "सिर्फ सहयोग के जरिए ही हम एंटीमाइक्रोबियल उपयोग में सुधार कर सकते हैं।"

ए.एम.आर के कारण और चुनौतियाँ

भारत में ए.एम.आर के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण हैं, जिसमें संक्रामक बीमारियों का अत्यधिक भार, अनियंत्रित एंटीबायोटिक का उपयोग, और अपर्याप्त डायग्नोस्टिक पर्यवेक्षण शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ए.एम.आर का विकास इसी गति से जारी रहा, तो यह न केवल मरीजों के स्वास्थ्य को प्रभावित करेगा, बल्कि यह राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी भारी बोझ डालेगा।

आईसीएमआर द्वारा जारी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ई.कोली के खिलाफ सेफ्टाज़िडाईम की प्रभावशीलता में सुधार हुआ है, लेकिन कार्बापेनेम्स और कोलिस्टिन के प्रति बढ़ता रेजिस्टेंस चिंता का विषय है।

सम्मेलन के उद्देश्य

इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत में नीति निर्माण, निगरानी और इनोवेशन में तेजी लाना है। कई सत्रों में डायग्नोस्टिक, एंटीमाइक्रोबियल सुपरविजन, और नीतियों में तालमेल पर चर्चा होगी। इसके अलावा, डिजिटल स्वास्थ्य, तीव्र डायग्नोस्टिक, और संक्रमण से बचाव के लिए विकसित हो रही तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

इस सम्मेलन में भाग लेने वाले विशेषज्ञों ने एकजुट होकर ए.एम.आर से निपटने के लिए एक ठोस रणनीति बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

निष्कर्ष

ए.एम.आर की चुनौती को निपटने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदम महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इसे केवल सरकारी प्रयासों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसके लिए एक व्यापक रणनीति की आवश्यकता है, जिसमें सभी stake-holders की भागीदारी हो। इस सम्मेलन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जो भविष्य में ए.एम.आर के प्रभाव को कम करने में सहायक होगा।

भारत की स्वास्थ्य प्रणाली को स्थिर करने और ए.एम.आर की चुनौतियों का सामना करने के लिए एकजुटता एवं सहयोग की आवश्यकता है, ताकि सभी के लिए एक स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।