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हरियाणा सरकार का फैसला: कैदियों को तीन माह की सजा माफी

सात साल की सजा वाले कैदियों को मिलेगी आठ सप्ताह की पैरोल

बंदियों को मिलेगी 60 दिन तक की जमानत

65 वर्ष से अधिक आयु के कैदियों को मिलेगा पैरोल व फरलो का लाभ

चंडीगढ़। कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के बाद हरियाणा सरकार ने कैदियों को तीन माह की सजा माफ करने का फैसला किया है। जेल में अच्छे आचरण वाले कैदी बंदियों को उनकी योग्यता अनुसार पंजाब जेल मैनुअल में वर्णित प्रावधान के अनुसार दो महीने तक महानिदेशक कारागार तथा एक महीने तक जेल अधीक्षक द्वारा विशेष माफी दी जाएगी। साथ ही उन्होंने बताया कि यह माफी गंभीर अपराधों में सजायाफ्ता कैदी बंदियों को नहीं दी जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जस्टिस राजीव शर्मा, माननीय न्यायधीश पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट एवं कार्यकारी चेयरमैन, हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्षता में वीडियो कांफ्रैंसिंग के माध्यम से बैठक हुई। जिसमें जेल विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजय वर्धन और महानिदेशक कारागार हरियाणा के. सेलवारज समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
हरियाणा के जेल मंत्री चौधरी रणजीत सिंह ने बैठक के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि जो कैदी पहले से ही पैरोल या फरलो पर जेल से बाहर है उनकी चार सप्ताह की विशेष पैरोल बढ़ाई जाएगी। जिन कैदियों ने एक पैरोल या एक फरलो शांतिपूर्ण व्यतीत करके समय पर जेल में वापसी की थी उन्हें भी छह सप्ताह की विशेष पैरोल दी जाएगी। 
उन्होंने बताया कि जिन कैदियों की आयु 65 वर्ष से अधिक है और वह एक से अधिक केसों में संलिप्त नहीं है और अधिक मात्रा में मादक पदार्थ के केस या धारा 379 बी, पोस्को एक्ट, बलात्कार, एसिड अटैक जैसे मामले में सजायाफ्ता नहीं है, उन्हें भी अच्छे आचरण के आधार पर छह सप्ताह की विशेष पैरोल दी जाएगी। लेकिन इसमें विदेशी कैदियों को शामिल नहीं किया गया है।
जेल मंत्री ने बताया कि जिन कैदियों की सजा सात वर्ष से अधिक नहीं है तथा कोई भी केस अदालत में लंबित नहीं है। उनके लिए भी जेल में अच्छा आचरण होने पर छह से आठ सप्ताह तक की विशेष पैरोल का प्रावधान रखा गया है।
बैठक में कैदियों के साथ-साथ हवालाती बंदियों के लिए भी जमानत पर रिहा करने का प्रावधान रखा गया है। रणजीत सिंह के अनुसार सात वर्ष तक की सजा के अपराध में बंद हवालातियों को शर्तों के आधार पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश या मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा जमानत पर रिहा किया जाएगा या फिर 45 से 60 दिन तक की अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाएगा।

गिरफ्तारियों से पहले जेलों में बनाया जा रहा है स्थान

जेल मंत्री रणजीत सिंह ने कहा की कोरोना जैसी महामारी को देखते हुए हरियाणा की जेलों में भी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हंै। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जेल में बंद कैदियों के स्वास्थ्य का पूरा ख्याल रखा जाए। रणजीत सिंह ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए कैदियों और बंदियों के लिए मानवीय आधार पर बड़े फैसले लिए गए हैं ताकि जेलों में कैदियों के दबाव को कम किया जा सके और एहतियातन किसी भी स्थिति में लॉ एंड ऑर्डर का पालन करते हुए अगर प्रसाशन द्वारा गिरफ्तारियां होती है तो उनके लिए जेलों में जगह की उपलब्धि को सुनिश्चित किया जा सके।

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