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ग्रोथ लौटेगी, मेड इन इंडिया और मेड फॉर फॉरेन अब देश की जरुरत

सीआईआई के कार्यक्रम में इकोनॉमी पर बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

कहा-संकट के समय आत्मविश्वास की वजह देश का टैलेंट व टेक्नोलॉजी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इंडस्ट्री एसोसिएशन सीआईआई के 125 वर्ष पूरे होने पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इंडस्ट्री के लोगों से ज्यादातर इकोनॉमी पर बात की। थीम थी- ‘गेटिंग ग्रोथ बैक’। इस दौरान कुछ नई तो कुछ पुरानी बातें हुईं। मोदी ने भरोसा जताया कि भारत की ग्रोथ फिर से लौटेगी।लॉकडाउन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो 5 बातें पहली बार कहीं उनमें भारत

लॉकडाउन को पीछे छोड़कर अनलॉक फेज-1 में एंटर कर चुका है। इस फेज में इकोनॉमी का बहुत बड़ा हिस्सा खुल चुका है। आठ दिन के बाद और काफी हिस्सा खुल जाएगा। यानी ‘गेटिंग ग्रोथ बैक’ की शुरुआत हो चुकी है।

दूसरे उन्होंने इकोनॉमी को मजबूत करना प्रमुख प्राथमिकता बताते हुए कहा कि ‘हमें लोगों का जीवन भी बचाना है और अर्थव्यवस्था को भी संभालना है। कोरोना के खिलाफ इकोनॉमी को फिर से मजबूत करना, ये हमारी प्रमुख प्राथमिकता है। मैं तो ‘गेटिंग ग्रोथ बैकÓ से आगे बढ़कर कहूंगा कि यस…वी आर गेटिंग ग्रोथ बैक।’

प्रधानमंत्री मोदी पहले भी देश में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने की बात करते रहे हैं, लेकिन इस बार थोड़े अलग अंदाज में बोले। उन्होंने कहा- वल्र्ड इज लुकिंग फॉर ए रिलाएबल पार्टनर। भारत में इसकी क्षमता है। इंडस्ट्री को इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहिए। ग्लोबल एक्सपोर्ट में हमारा शेयर काफी कम है। उद्योग संगठनों को देश की इंडस्ट्री और बाजार को ज्यादा से ज्यादा ग्लोबल बनाने में मदद करनी है। अब जरूरत है कि देश में ऐसे प्रोडक्ट बनें जो मेड इन इंडिया हों, मेड फॉर फॉरेन हों।

उन्होंने कहा देश को आत्मनिर्भर बनाना उद्योग संगठनों की जिम्मेदारी है। आप एक कदम बढ़ाएंगे तो सरकार चार कदम बढ़ाकर आपकी मदद करेगी। प्रधानमंत्री के नाते आपको इसका भरोसा देता हूं। आत्मनिर्भर भारत का मतलब है कि हम और ज्यादा मजबूत होकर दुनिया की इकोनॉमी के साथ इंटीग्रेटेड हों और सर्पोटिव बनें।

सरकार आज ऐसे पॉलिसी रिफॉर्म भी कर रही है जिनकी देश ने उम्मीद भी छोड़ दी थी। लोगों ने मान लिया था कि ये नहीं हो सकता, अब ऐसी चीजें हो रही हैं। एग्रीकल्चर सेक्टर में आजादी के बाद जो नियम बने उनमें किसानों को बिचौलियों के हाथों में छोड़ दिया गया था। किसानों के साथ हो रहे अन्याय को दूर करने की इच्छाशक्ति हमारी सरकार ने दिखाई।

कानून में बदलाव के साथ अब किसानों को उनके अधिकार मिलेंगे। वे जहां चाहें, जिसे चाहें और जब चाहें अपनी फसल बेच सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भर भारत पैकेज के फायदे गिनते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था पर कोरोना के असर को देखते हुए सरकार ने पिछले महीने 20 लाख करोड़ रुपए का आत्मनिर्भर भारत पैकेज घोषित किया था। इसमें आरबीआई की घोषणाएं भी शामिल थीं। साथ ही सरकार ने कोयला सेक्टर को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोलने जैसे इकोनोमिक रिफॉर्म के फैसले भी लिए थे। मोदी ने इन फैसलों से होने वाले फायदे भी गिनाए।

200 करोड़ तक के सरकारी टेंडर में विदेशी कंपनियों को मौका नहीं

मोदी ने कहा- एमएसएमई सेक्टर की लाखों यूनिट का देश की जीडीपी में करीब 30त्न योगदान है। एमएसएमई की परिभाषा स्पष्ट करने की मांग उद्योग जगत लंबे समय से कर रहा था। ये मांग भी पूरी हो चुकी है। एमएसएमई सेक्टर के करोड़ों साथियों को लाभ हो, इसके लिए 200 करोड़ रुपए तक की सरकारी खरीद में ग्लोबल टेंडर को खत्म कर दिया है।

कोल माइनिंग में प्राइवेट सेक्टर को एंट्री

“कोयले के भंडारण में भारत दुनिया का तीसरा बड़ा देश है। आप जैसे बिजनेस लीडर हों, उस देश में बाहर से कोयला आए, उसकी वजह क्या है? आप भी जानते हैं और हम भी जानते हैं कि कभी सरकार तो कभी नीतियां रुकावट बन रही थीं, लेकिन अब कोल सेक्टर में कमर्शियल माइनिंग की इजाजत दे दी गई है।ड़ रुपए से ज्यादा की आर्थिक मदद कर चुके हैं।”

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