गौरवमयी है भारतीय संस्कृति के बलिदानियों का इतिहासःराज्यपाल
Monday, August 20, 2018
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गौरवमयी है भारतीय संस्कृति के बलिदानियों का इतिहासःराज्यपाल

गौरवमयी है भारतीय संस्कृति के बलिदानियों का इतिहासःराज्यपाल

शिमला: राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि भारतीय संस्कृति के बलिदानियों का इतिहास गौरवमयी रहा है। वह ऐसे दिवाने थे, जिन्होंने न अपनी, न अपने परिवार की चिंता की, बल्कि वह देश व हमारे लिए कुर्बान हो गए ताकि हम स्वतंत्र हो सकें। बलिदानियों के इस इतिहास में पझौता गोलीकांड के क्रांतिकारियों का नाम भी दर्ज है, जिन्हें हम नमन करते हैं।
पझौता गोलीकांड की हीरक जयंती समारोह का आयोजन
राज्यपाल आज सिरमौर जिले के उपमण्डल राजगढ़ के अन्तर्गत हाब्बन में पझौता गोलीकाण्ड के 75 वर्ष पूरा होने पर आयोजित हीरक जयंती समारोह के अवसर पर जनसमूह को संबोधित कर रहे थे।राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि वैद्य सूरत सिंह हिमाचल प्रदेश के गौरव हैं। वह एक महान क्रांतिकारी योद्धा थे, जिन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलन कर इस क्षेत्र में स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी नायक बने। हमें ऐसे महान योद्धा पर गर्व होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि समूचे क्षेत्र में वैद्य सूरत सिंह का विशेष सम्मान था, यही वजह है कि वह क्षेत्र से निर्विरोध चुनाव जीते। वह सभी के प्रेरणा प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि पझौता गोलीकांड के 55 स्वतंत्रता सेनानियों को कालापनी की सजा सुनाई गई। वैद्य सूरत सिंह उन 9 व्यक्तियों में एक थे, जिन्होंने गोलीकांड का नेतृत्व किया। स्वतंत्रता सेनानियों के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि क्रांतिकारियों का इतिहास पढ़कर आज भी रौंगटे खड़े हो जाते हैं, जिनपर अंग्रेजों ने कितना जुल्म किया। वह जानते थे कि उनकी मौत निश्चित है और वह स्वतंत्रता का सुख भी नहीं देख पाएंगे। फिर भी, वह दिवाने होकर अंग्रेजों के जुल्म सहन करते रहे और मातृभूमि के लिए अपनी शहादत दी।
राज्यपाल ने महान क्रांतिकारी वीर सावरकर और पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के देशप्रेम को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने सुख के लिए नहीं बल्कि हमारे सुख के लिए बलिदान का रास्ता चुना। इसी तरह पझौता आंदोलनकारियों पर भी काफी जुल्म ढाए गए। हमें इन महान क्रांतिकारियों से प्रेरणा लेनी चाहिए और अपनी संस्कृति और भारतीयता पर गर्व करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पिछले पौने तीन वर्षों से उन्होंने राज्य में कुछ सामाजिक बिन्दुओं पर अभियान आरम्भ किए, जिनमें नशामुक्त हिमाचल, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, समरसता, जल संरक्षण, साक्षरता अभियान, स्वच्छता और शून्य लागत प्राकृतिक कृषि व गौ पालन शामिल है।
आचार्य देवव्रत ने कहा कि प्रदेश सरकार के सहयोग से राज्य में शून्य लागत प्राकृतिक कृषि को व्यापक तौर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। हमारी कोशिश रहेगी कि वर्ष 2022 तक राज्य को प्राकृतिक कृषि राज्य घोषित करने के प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि रसायनिक खेती का इतिहास मात्र 30-40 साल पुराना है, जबकि भारतीय कृषि का इतिहास दुनिया में सबसे पुराना है। अधिक उत्पाद के लालच में हमने जमीन की उर्वरा शक्ति को कम कर दिया, पर्यावरण दूषित कर दिया और उत्पाद जहरयुक्त कर दिए। उन्होंने भारतीय नस्ल की गाय के पालन से प्राकृतिक कृषि करने का आग्रह किया तथा कहा कि एक देसी गाय से 30 एकड़ भूमि पर कृषि की जा सकती है। उन्होंने प्राकृतिक कृषि से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी भी दी।राज्यपाल द्वारा इस अवसर पर स्वतंत्रता सेनानी परिवार के सदस्यों को सम्मानित किया, जिनमें वैद्य सूरत सिंह की धर्मपत्नी श्रीमती सुनैहरो देवी भी शामिल थीं।
पझौता स्वतंत्रता सेनानी समाज कल्याण समिति के अध्यक्ष  जयप्रकाश चौहान ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा पझौता आंदोलन से संबंधित विभिन्न घटनाओं और वैद्य सूरत सिंह, स्वतंत्रता सेनानियों तथा अन्य शहीदों को याद किया और संक्षिप्त में इतिहास की जानकारी दी। उन्होंने इस पझौता क्षेत्र में पझौता स्वतंत्रता सेनानियों की याद में स्मारक विकसित करने के लिए राज्यपाल से आग्रह किया।

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