Wednesday, September 18, 2019
Breaking News
Home » संपादकीय » छत्रपति को मिला ‘पूरा सच’

छत्रपति को मिला ‘पूरा सच’

‘जर्नलिज्म एक सीरियस बिजनेस है जो सच्चाई को रिपोर्ट करने की इच्छा को सुलगाता है। किसी भी ईमानदार और समर्पित पत्रकार के लिए सच को रिपोर्ट करना बेहद मुश्किल काम है।सीबीआई की विशेष अदालत के जज की फैसले के वक्त टिप्पणी।

आखिरकार सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम का पूरा सच उजागर हो गया। इस पूरे सच ने न केवल उसे उम्रकैद की सजा दिला दी है, अपितु पूरी दुनिया के सामने उसके शैतानी चेहरे के पीछे की हकीकत भी प्रकट हो गई है। इस दौरान पुलिस और राजनीति का वह घालमेल भी जाहिर हो गया है, जिसकी चर्चा तो हमेशा होती है लेकिन उसकी सच्चाई कभी-कभार ही प्रकट होती है। पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने निर्भिक पत्रकारिता के सिरमौर रामचंद्र छत्रपति की हत्या के दोष में पहले ही 20 साल की कैद काट रहे डेरामुखी को उम्रकैद की सजा सुनाकर इस बात को साबित कर दिया है कि भले ही देर हो लेकिन न्याय मिलता जरूर है। इस फैसले से न केवल पत्रकारिता समाज बल्कि वे सभी पीडि़त हर्षोल्लास से भर गए हैं जोकि न्याय पाने की आस में जिंदगी काट रहे हैं।

गौरतलब है कि अदालत ने पत्रकार छत्रपति की हत्या में डेरामुखी के अलावा उसके तीन गुर्गों को भी उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह फैसला अपने आप में दुर्लभ है। हालांकि अदालत ने जिस बात की गंभीरता को समझा है वह यह है कि किस प्रकार एक निर्भिक पत्रकार को सच उजागर करने से रोकने के लिए उसको मौत के घाट उतार दिया गया। आखिर दुनिया इस पर नहीं चलती कि आप प्रभावशाली हो तो एक अकेले लेकिन संसाधनों की नजर से कमजोर व्यक्ति का जीवन नष्ट कर दें। हरएक को कानूनसम्मत तरीके से जीने और अपनी बात कहने का हक है। छत्रपति यही कर रहे थे, उन्होंने डेरे में चल रहे साध्वियों के यौन शोषण का मामला अपने अखबार में उजागर किया और डेरा मुखी की नजरों में आ गए। रामचंद्र छत्रपति कितने बड़े दिलेर थे, इसका अंदाजा इसी बात से हो जाता है कि एक सांध्यकालीन अखबार जिसके मालिक के पास मामूली बजट हो, उसके पास न कोई राजनीतिक या उद्योगपति का संरक्षण हो, वह सिरसा में रहते हुए ही एक अत्यंत प्रभावशाली और अरबों रुपये की संपत्ति के स्वामी डेराप्रमुख की सच्चाई उजागर कर रहे थे।

मालूम हो, इस मामले की सच्चाई उजागर होने में 16 साल लग गए। साल 2014 में यह केस सुनवाई के लिए कोर्ट में पहुंचा। इसके बाद पिछले 5 साल में इसकी 141 बार सुनवाई हुई। पुलिस ने इस मामले को कितने हल्के में लिया था, यह शायद इसी वजह से हुआ कि न्याय को इतने वर्ष लग गए। पुलिस डेरा प्रमुख के दबाव में रही, अब पत्रकार छत्रपति के बेटे अंशुल ने आरोप लगाया है कि हरियाणा के एक पूर्व सीएम और पंजाब के एक मौजूदा कैबिनेट मंत्री ने समझौता कराने की कोशिश की थी। इससे साबित होता है कि डेरामुखी ने अपने बचाव में क्या-क्या नहीं किया। यह उस राजनीतिक और धर्म के नाम पर अरबों की संपत्ति पर कुंडली मारे डेरामुखियों के गठजोड़ का भी खुलासा है जोकि अपने प्रभाव से गलत को भी सही ठहराने में लगे रहते हैं। गौरतलब है कि अंशुल ने मीडिया के सामने कहा है कि एक हरियाणा की एक बड़ी पार्टी के नेता ने आकर उनकी मां से कहा था- जो चला गया उसे छोड़ो। बस अपने दोनों बेटों का ध्यान रखो। आगे दुश्मनी बढ़ी तो नुकसान उनका ही होगा।

गौरतलब है कि डेरामुखी गुरमीत के पाप का घड़ा अभी और भरना बाकी है। उसके खिलाफ तीन और मामले चल रहे हैं। इनमें डेराप्रबंधक रणजीत सिंह मर्डर, 400 साधुओं को नपुंसक बनाने और डेरा अनुयायी फकीर चंद हत्याकांड के केस शामिल हैं। साध्वियों के यौन शोषण मामले में सजा काट रहे डेरामुखी की यह सजा खत्म होगी तो छत्रपति हत्याकांड के दोष में उम्रकैद की सजा शुरू हो जाएगी। अन्य मामलों में भी यह तय है कि घिनौने अपराधों के लिए उसे कड़ी सजा मिलेगी। यह सजाएं अपराधियों के दिलों में खौफ पैदा करेंगी और उन लोगों को सुकून देंगी जिन्होंने वर्षों तक एक आतताई के साये में जीवन गुजारा है।- न्याय की जय हो! सच्ची पत्रकारिता जिंदाबाद!

Check Also

यातायात कानून में संशोधन वक्त की मांग

किसी हादसे में घायल होने या मौत होने के बाद अक्सर कहा जाता है, काश! …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Share
See our YouTube Channel