पारिवारिक कलह से इनेलो टूट के कगार पर - Arth Parkash
Wednesday, November 21, 2018
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पारिवारिक कलह से इनेलो टूट के कगार पर

पारिवारिक कलह से इनेलो टूट के कगार पर

आखिरकार इनेलो में वह हो गया जिसकी आशंका थी। महज दो महीने के अंदर पार्टी में एक हलचल ने भूचाल का रूप ले लिया है। पार्टी के सांसद दुष्यंत चौटाला और इनसो के प्रेजिडेंट दिग्विजय चौटाला को निष्कासित कर दिया गया। संभव है यह कार्रवाई पार्टी सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला की सहमति के बगैर नहीं हुई होगी। एक परिवार फिर से बिखर गया है और विभिन्न राजनीतिक दल जहां इनेलो की फूट का फायदा उठाने को आतुर हैं, वहीं पार्टी के अंदर भी पक्ष और विपक्ष में विभाजन हो गया है। ज्यादातर युवा नेता सांसद दुष्यंत चौटाला के साथ जाने की घोषणा करते हुए पार्टी की सदस्यता से त्यागपत्र दे रहे हैं, हालांकि नेता विपक्ष अभय चौटाला ने दावा किया है कि एक भी कार्यकर्ता ने त्यागपत्र नहीं दिया। उन्होंने सांसद दुष्यंत चौटाला की ओर से उन्हें निष्कासन का पत्र नहीं मिलने पर कहा है कि वे तथ्यों को छिपा रहे हैं।

गोहाना में इनेलो की रैली से शुरू हुआ घमासान अब पूरी तरह से सड़क पर आ गया है। आखिर राजनीतिक मतविभाजन रिश्तों पर भारी पड़ा है। पिछले दिनों सांसद दुष्यंत की मां और विधायक नैना चौटाला ने पार्टी के अंदर चल रही राजनीति पर तीखी टिप्पणियां की थी, उसके बाद यह तय था कि दूसरा गुट ऐसा कोई कदम उठाएगा जोकि अति समझा जाएगा। पार्टी से दुष्यंत चौटाला के निष्कासन की रूपरेखा संभव है बहुत पहले तय हो गई हो, क्योंकि सांसद अपना संसदीय क्षेत्र हो या फिर पार्टी का मंच, हमेशा सक्रिय रहे हैं। उन्होंने पार्टी के दूसरे नेताओं की तुलना में अलग छवि बनाई है। राजनीति आगे बढ़ते रहने का नाम है, नई संभावनाओं के दरवाजे यहां निरंतर खुलते और बंद होते रहते हैं।

पार्टी से निष्कासन के बाद अब सांसद दुष्यंत चौटाला और उनके समर्थकों के अगले कदम का इंतजार किया जा रहा है। इस बीच पार्टी के नेशनल सेक्रेटरी और सांसद दुष्यंत के पिता अजय चौटाला 14 दिन की फरलो पर जेल से बाहर आ रहे हैं। यह सब जानना चाहते हैं कि आखिर वे किसकी तरफ जाएंगे, वे अपने बेटे का पक्ष का लेंगे या फिर पार्टी को एकजुट रखने की कोशिशों के तहत मतभेद खत्म कराने का प्रयास करेंगे। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इतिहास अपने आप को दोहरा रहा है। एक गुट नहीं चाहता कि दूसरा आगे बढ़े, लेकिन दूसरे गुट के युवा तुर्क अपना हिस्सा मांग रहे हैं। अगर इनेलो दोफाड़ होता है, तो इसका फायदा संभव है किसी गुट को नहीं मिलेगा। चुनाव सिर पर हैं और जनता सब देख रही है, अगर राजनीतिक मतभिन्नता इसकी वजह होती तो समझा जाता लेकिन यहां निहित स्वार्थ की छाया ज्यादा पैर पसारे नजर आती है। ऐसे में सवाल पूछा जाएगा कि अगर एक परिवार एक होकर नहीं रह सकता तो फिर पार्टी को एकजुट कैसे रखा जाएगा?

सांसद दुष्यंत चौटाला के भाजपा में जाने के भी कयास लगाए जा रहे हैं, हालांकि भाजपा नेता कह चुके हैं कि अच्छे नेताओं का स्वागत है। जाहिर है, दुष्यंत के अब तक के रिकॉर्ड, बेशक उन्होंने दवा खरीद घोटाले में स्वास्थ्य मंत्री पर ही आरोप लगाए हैं, के बावजूद भाजपा उन्हें स्वीकार करने को तैयार बैठी है। अगर ऐसा होता है तो आम चुनाव में हिसार लोकसभा सीट जोकि पिछले चुनाव में इनेलो ने जीती थी, पर भाजपा की कामयाबी की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। वैसे मुख्यमंत्री ने कहा है कि वे किसी परिवार के खत्म होने का फायदा उठाने की सोच नहीं रखते, लेकिन राजनीति में संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। इनेलो में उठा यह बवंडर क्या रूप लेगा, यह सभी की दिलचस्पी का विषय है, हालांकि पारिवारिक कलह से पार्टी में टूट का यह एकमात्र उदाहरण नहीं है, इससे पहले भी इनेलो इसका दंश झेल चुका है।

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