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आचार संहिता के चलते नगर निगम के विकास कार्य रुके!

26 वार्डों के वार्ड फंड में 12.35 करोड़ का प्रावधान

चंडीगढ़ (वीरेन्द्र सिंह)। नगर निगम चंडीगढ़ में फंड क्रंच के चलते इस समय शहर के विकास कार्य रुके पड़े हैं। इसका मुख्य कारण है कि विगत अप्रैल माह से यहां चुनाव आचार संहिता लागू है। यह मई के अंत तक चलेगी।

वैसे यदि देखा जाए तो नगर निगम चंडीगढ़ के मेयर को विकास कार्यों हेतु वर्ष में 2 करोड़ रुपये के फंड का विशेष प्रावधान है। इस फंड को वह किसी अन्य वार्डों के आवश्यक विकास कार्यों के लिए खर्च कर सकता है। इसी प्रकार एमसी के सीनियर डिप्टी मेयर 60 लाख रुपये जबकि डिप्टी मेयर को 55 लाख रुपये खर्च करने का प्रावधान है।

बता दें कि इन राशियों में सीनियर डिप्टी मेयर के वार्ड फंड से 40 लाख रुपये के अलावा 20 लाख रुपये अतिरिक्त मिलते हैं। इसी प्रकार डिप्टी मेयर को भी अपने 40 लाख रुपये वार्ड फंड के अलावा 15 लाख रुपये अलग से मिलता है। इन पैसों को वह विकास कार्यों के लिए खर्च कर सकते हैं। एमसी की यह सबसे बड़ी त्रासदि रही है कि एक तो इस बार मेयर का चुनाव भी विलंब से हुआ उसके पश्चात फरवरी मार्च तक देश में होने वाले संसदीय चुनाव के मद्देनजर शेष समय हो हल्ला में ही निकल गया।

महीने में एक बार होने वाली सदन की बैठक में यदि कोई प्रस्ताव पारित भी हुआ तो निगमायुक्त के शहर से बाहर होने के चलते उन संबंधी टेंडरिंग आदि नहीं हो पाई। क्योंकि कमिश्नर के पास ही बजट का विशेष अधिकार होता है। इसका प्रमुख कारण यह है कि नगर निगम के कार्यकारी अधिकार कमिश्नर के पास ही होते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि कमिश्नर की सहमति के बगैर एक भी पैसा खर्च नहीं किया जा सकता।

31 मार्च 2019 के बाद से ही समूचे देश में चुनाव आचार संहिता लागू है, जो मासांत तक चलेगी। इसके बाद भी यदि शहर की संसदीय सीट सत्ताधारी पार्टी भाजपा की झोली में जाती है तो निगम के विकास फंड में कुछ बढ़ौतरी भी हो सकती है। क्योंकि चंडीगढ़ निगम का अपना निजी फंड कुछ भी नहीं है। एमएचए के अंतर्गत इसका सारा खर्च और फंड दिल्ली से ही आता है। किन्तु यदि पासा पलट गया और नगर सांसद का चुनाव कांग्रेस या किसी और पार्टी का प्रत्याशी जीत गया तो स्थिति कुछ भिन्न होगी। यदि केंद्र में ‘भाजपा नीत’ राजग की सरकार बनी तो विकास कार्यों के लिए मिलने वाले खर्च में कटौती भी हो सकती है। ऐसे में शहर में विकास कार्यों के लिए ऊपर वाला ही मालिक है।

उल्लेखनीय है कि एमसी के कुल 26 वार्डों और मेयर एवं सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर को मिलने वाले अतिरिक्त फंड को मिलाकर कुल 12.35 करोड़ रुपये विकास कार्यों के लिए मिलता है। यह पैसे 1 वर्ष की समयावधि के भीतर खर्च करना होता है।

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