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निगम का फैसला: मृत जानवरों के प्लांट लगाने का एजेंडा पारित

डड्डूमाजरा के डंपिंग ग्राउंड के निकट सेक्टर-25 में पुन: लगाया जाने का फैसला

चंडीगढ़। नगर निगम सदन की करीब ढाई महीने बाद शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक विवाद से नहीं बच सकी। बैठक में मृत जानवरों के प्लांट का विवादित एजेंडा पारित किया गया। स्मार्ट सिटी का यह प्रोजेक्ट पिछले वर्ष से खासा विवादित रहा था, जिसे डड्डूमाजरा के डंपिग ग्राउंड के समीप सैक्टर-25 में पुन लगाए जाने का फैसला ले लिया गया। खास बात यह है कि यहीं पर गारबेज प्लांट भी पहले से ही स्थापित है।

जिस वक्त यह एजेंडा पारित किया गया इसके विरोध में रहने वाली एरिया पार्षद फरमिला सिंह के अलावा पूर्व मेयर और पार्षद राजेश कुमार कालिया से लेकर सैक्टर-25 में कांग्रेस की एरिया पार्षद शीला फूल सिंह लिंक में नहीं थे। वह अपनी बात नहीं रख पाए और उक्त प्लांट पुन डंपिग ग्राउंड में लगाने का निर्णय ले लिया गया।

पिछले वर्ष पूर्व मेयर कालिया के कार्यकाल में मृत जानवारों के संस्कार के प्लांट की जगह सुनिश्चित किए जाने को लेकर बकायदा कमेटी गठित की गई थी, लेकिन कमेटी में एरिया पार्षद और अन्य एक पार्षद से लेकर क्षेत्र के निवासियों के भारी विरोध के बाद इसकी प्रक्रिया को रोक दिया गया था। इस बीच निगम ने औद्योगिक क्षेत्र फेस-1 में इसे लगाने का मन भी बना लिया यही वजह रही कि निगम ने औद्योगिक क्षेत्र में प्लांट का स्थापित किए जाने को लेकर इसे एजेंडे के तौर पर सदन में चर्चा के लिए पेश किया गया। बताया जाता है कि जब सदन में औद्योगिक क्षेत्र में प्लांट लगाए जाने का यह एजेंडा रखा गया तो सदस्य पार्षदों, अनिल दुबे, शक्ति प्रसाद देवशाली, विनोद अग्रवाल व जगतार सिंह ने इसका जमकर विरोध किया । जबकि पार्षद गुरप्रीत सिंह डड्डूमाजरा में प्लांट लगाए जाने का विरोध कर रहे थे।

निगम की ओर से पिछल्ले दो माह के लिए स्ट्रीट वेंडर्स को लाईसेंस फीस में दी गई छूट को सदन की मंजूरी के लिए एजेंडा लाया गया। पार्षद अनिल दुबे ने इसका विरोध किया और मांग की कि इन लोगों को दिसंबर माह तक लाईसेंस पीस से छूट दी जाये। भाजपा के ही पार्षदों ने जब उनका विरोध किया तो उन्होंने बैठक का बहिष्कार तक कने की धमकी दे डाली। अरुण सूद ने उन्हें सबकी बात सुनने की सलाह दी। इसपर निगमायुकित ने बताया कि निगम तो पहले ही दो माह की फीस माफ कर चुका है।

पार्षद दुबे ने भावुक होकर कहा कि उन गरीब लोगों को मुफ्त में खाना देकर भिखारी न बनाओ पर उन्हें काम करने दो। दुबे का विरोध उनके ही पार्टी के पार्षदों ने किया और बहुमत के चलते निर्णय लिया गया कि लाकडाउन पीरिड तक इनसे लाईसेंस फीस नहीं ली जाएगी । जो वेंडर्स शहर छोड़ कर चले गए हैं, जब तक शहर लौट कर पुन रजिस्टर नहीं कराते ,उनसे भी लाईसेंस फीस नहीं ली जाएगी।

निगम सदन ने निर्णय लिया कि जिन लोगों ने लाकडाउन से पहले कम्युनिटी सेंटर की बुकिंग कराई पर समारोह नहीं कर पाये निगम उनकी राशि वापिस करेगा। यह राशि करीब 65,98,420 रुपये है। इसपर निगम ने 10,07,077 लाख जीएसटी भी अदा किया है। सदन ने निर्णय लिया कि निगम लोगों से जीएसटी नहीं काटेगा और उनकी पूरी राशि वापिस करेगा। निगम सरकार से रिफंड लेने के प्रयास करेगा।

डेफर नहीं हो सका, 20 जून तक कंपनी को स्थान देना है

इस एजंडे के कुछ पार्षद डैफर भी करना चाहते थे पर निगमायुक्त ने स्पष्ट कर दिया कि 20 जून तक कंपनी को स्थान देना है और निगम पहले ही आश्वासन दे चुका है कि इस प्लांट को लगाने की औपचारिकताएं 31 मार्च तक पूरी कर ली जायेगी पर लाकडाऊन के कारण वह नहीं हो पाया। अब अगर इस एजंडे पर निर्णय नहीं लिया जाता है तो निगम को जुर्माना भी लग सकता है।

फरमिला-कालिया ने किया फैसले का विरोध

वहीं, एरिया पार्षद फरमिला और राजेश कुमार कालिया ने इस एजेंडा का विरोध किया है। फरमिला ने कहा कि उस वक्त कनेक्टीवटी नहीं हो पा रही थी , इसलिए वह अपनी बात नहीं रख पाई, यही बात पूर्व मेयर कालिय ने भी दोहराई। जबकि एरिया पार्षद फरमिला ने सवाल उठाया कि इस तरह के संवेदनशील एजेंडे जिसका अतीत में विरोध हो चुका है आखिर क्यों वीडियो कांफ्रेंस के जरिए एजेंडे में लाए गए ? उन्होंने कहा कि ऐसे एजेंडे के लिए विशेष बैठक बुलाई जानी चाहिए। दूसरी ओर पार्षद कालिया ने कहा कि मेयर कार्यकाल के फैसलों को आखिर क्यों पलटा जा रहा है और यह कौन लोग कर रहें है उनका पहले की तरह आज •ाी विरोध रहेगा वह डड््डूमाजरा निवाासियों के साथ हैं।

निगम के फैसले का फिर से हो सकता है विरोध

भले ही निगम मृत जानवारों के प्लांट को लेकर अपने पुराने फैसले पर वापस लौट गया हो, लेकिन इस क्षेत्र के निवासी एक बार फिर से इसका विरोध कर सकते हैं। निगम चाहे स्मार्ट प्रोजेक्ट की वजह लाख दावों के साथ आश्वस्त करें लेकिन अगर इस प्लांट के किसी •ाी तरह का दुषप्रभाव केवल डड््डूमाजरा तक सीमित नहीं होगा बल्कि सैक्टर-39, 30,41, 42 से लेकर 38, 38 वेस्ट, से लेकर 36,37, धनास, 24,25 ,23 से लेकर 14,15 और आसपास के क्षेत्र तक को अपनी जद में ले सकता है इस पहलू पर ना तो निगम ध्यान दे रहा और ना ही इन सैक्टरों के एरिया पार्षद । गारबेज प्लांट की निष्क्रीयता का उदाहरण सबके सामने हैं।

लाक डाउन पीरियड तक स्ट्रीट वेंडर्स की लाइसेंस फीस हुई माफ

वहीं बैठक में चर्चा के दौरान लाकडाऊन पीरियड तक स्ट्रीट वेंडर्स की लाईसेंस फीस माफ करने, इस अवधि के दौरान जिन लोगों ने कम्युनिटी सेंटर सकी बुकिंग कराई थी उनकी राशि वापिस करने और दो पार्किंग के ठेकेदारों की लाईसेंस फीस कम करने का निर्णय लिया गया।

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