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Peasant movement : कृषि कानूनों के खिलाफ विदेशी साजिश हैरान करने वाली है। एक देश के निजी मामले में दखल किसी भी प्रकार से उचित नहीं ठहराया जा सकता है।

कोरोना अभी मरा नहीं, खतरा बरकरार

Corona not dead yet, threat continues: बीते वर्ष इन्हीं दिनों में भारत में कोरोना वायरस की आहट मिलने लगी थी, चीन में इस खतरनाक वायरस के प्रसार के बाद दुनिया के देश इस महामारी की जानकारी जुटाने लगे थे। इसके बाद के हालात भारत समेत पूरा विश्व जानता है। दुनिया का बीता वर्ष जिस संकट और त्रासदी में बीता है, वह न भूलने वाला वक्त है।

जाहिर है, कोरोना वायरस की वजह से लगे लॉकडाउन ने जहां गहरी आर्थिक मार दी है, वहीं हजारों जिंदगियों को असमय उनके परिजनों से छीन लिया है। कोरोना वायरस अब नियंत्रण में दिख रहा है, लेकिन यह भी डरावना तथ्य है कि अब लोग लापरवाही बरत रहे हैं, जिसकी वजह से वायरस के नए केस सामने आने लगे हैं। देश में कोरोना वैक्सीन भी लगाई जा रही है, लेकिन तथ्य यह है कि अनेक जगह वैक्सीन लगवाने के लिए लोग आगे नहीं आ रहे।

ऐसे में तय लक्ष्य से बहुत पीछे यह कार्य चल रहा है। देश में कोरोना संक्रमण का विस्फोट महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा फूटा था और राज्य में हालात बेहद चिंताजनक हो गए थे। हालांकि इस वर्ष फिर यहां संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। राज्य में पिछले एक हफ्ते से नए मरीजों के मिलने की गति में 200 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है। यही कारण है कि 7 दिन से लगातार एक्टिव केस की संख्या में वृद्धि दर्ज की जा रही है। इन आंकड़ों से साफ है कि राज्य में कोरोना की तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि समय रहते इस पर काबू नहीं पाया गया तो हालात और खराब हो सकते हैं। पूरे देश के हालात समझें तो वीरवार को कुल 12,826 नए मरीज मिले हैं। इनमें से 10,489 ठीक हुए और 86 संक्रमितों ने जान गंवाई। देश में बीते वर्ष मार्च के बाद से अब तक कोरोना के 1.09 करोड़ केस सामने आ चुके हैं। इनमें से 1.06 करोड़ मरीज ठीक हो चुके हैं। 1.56 लाख ने जान गंवाई है, जबकि 1.36 लाख का इलाज चल रहा है।

कोरोना संक्रमण ऐसी महामारी है, जिसका इलाज अभी भी तलाशा नहीं जा सका है। पूरी दुनिया में कोरोना की प्रतिरोधक वैक्सीन तैयार करने का काम जारी है, भारत ने दो वैक्सीन निर्मित की हैं, हालांकि विपक्ष एवं जनसामान्य इन पर भरोसा नहीं कर रहा। विपक्ष का आरोप तो यह तक रहा है कि इन वैक्सीन को जल्दबाजी में हरी झंडी दिखाई गई ताकि मोदी सरकार इन्हें अपनी ख्याति के लिए इस्तेमाल कर सके। हालांकि विशेषज्ञों की राय है कि भारत में निर्मित वैक्सीन सुरक्षित और प्रतिरोधी क्षमता विकसित करने में सक्षम है। देश ने इन वैक्सीन को दूसरे जरूरतमंद देशों को भी भेजा है।

जाहिर है, किसी दवा को इस्तेमाल करने की इजाजत उसके परीक्षण और तमाम मापदंडों पर खरा उतरने के बाद ही दी जाती है। ऐसे में यह स्वाभाविक रूप से ऐसी वैक्सीन लेना प्रत्येक नागरिक के लिए सुरक्षित ही रहेगा। देश में श्रेणी बनाकर वैक्सीन लगाई जा रही है, हालांकि मेडिकल पेशे से जुड़े लोग भी इन वैक्सीन पर आशंका जता रहे हैं। बावजूद इसके यह सुखद तथ्य है कि देश में वैक्सीन हासिल करने वालों का आंकड़ा 1 करोड़ के पार हो गया है।

अब तक 1 करोड़ 1 लाख 88 हजार से ज्यादा हेल्थ केयर और फ्रंट लाइन वर्कर्स को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। इतने लोगों तक वैक्सीन पहुंचाने में 34 दिन लगे। अब तक 62 लाख से ज्यादा हेल्थ केयर वर्कर्स और 31 लाख से ज्यादा फ्रंटलाइन वर्कर्स का वैक्सीनेशन हो चुका है। 4.64 लाख हेल्थ केयर वर्कर्स ऐसे भी हैं जिन्हें वैक्सीन की दूसरी डोज भी लग चुकी है। भारत दुनिया का 5वां देश है, जहां अब तक सबसे ज्यादा लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है। अमेरिका में 5 करोड़, चीन में 4 करोड़, यूरोपियन यूनियन में 2 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाई गई है। पूरी दुनिया में अब तक 18 करोड़ 84 लाख से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाई गई है।

पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों में कोरोना की फिर आमद चिंताजनक है। पंजाब में निकाय चुनाव में जिस प्रकार कोरोना संबंधी प्रोटोकॉल टूटे हैं, यह उस वजह से ही हुआ है कि बीते आठ दिन के अंदर दो हजार से ज्यादा पॉजिटिव केस सामने आ चुके हैं। राज्य में स्कूल खोले जा चुके हैं और अब यहां सामान्य हालात जैसे हो रखे हैं। अचरज इस बात का है कि न मास्क जरूरी समझा जा रहा है और न ही सामाजिक दूरी। कोरोना का खौफ पूरी तरह हवा हो चुका है।

बठिंडा में 12 छात्रों समेत 273 पॉजिटिव मिले हैं। राज्य में 10 लोगों की मौत भी हो चुकी है। हरियाणा में बेशक हालात पंजाब जैसे नहीं हैं, लेकिन यहां भी फिर से कोरोना के मरीज सामने आने लगे हैं। क्या यह कोरोना महामारी के लौटने के संकेत तो नहीं हैं। बीते वर्ष एक-दो मरीज से ही पूरे देश में संक्रमण फैला था, जिसके बाद हालात बद से बदतर होते चले गए। जाहिर है, यह समय बेहद सावधानी बरतने का है, लेकिन आजकल जिस प्रकार सार्वजनिक स्थलों, कार्यालयों, स्कूल, कॉलेज, धार्मिक स्थलों, बाजार, पार्कों और अन्य जगह कोरोना प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, वह बेहद गंभीर और घातक मामला है।

कोरोना अभी भी गया नहीं है और मास्क, सामाजिक दूरी, सेनेटाइजेशन आदि इससे बचाव के उपाय हैं। जब तक एक भी मरीज बाकी है, तब तक इस महामारी से निजात मिलने की नहीं सोची जा सकती। कोरोना वैक्सीन लगवाने वाले लोगों को बेशक संक्रमण की जानकारी नहीं मिल रही है, लेकिन जिन्हें अभी तक यह वैक्सीन नहीं लगी है, वे संक्रमित लोगों के संपर्क में आकर प्रभावित हो सकते हैं। महाराष्ट्र के एक जिले में तो फिर से लॉकडाउन लगा दिया गया है, ऐसे हालात देश के दूसरे राज्यों में भी हो सकते हैं। बेहतर यही है कि हम कोरोना से बचें और दूसरे लोगों की भी इससे रक्षा करें। यह तभी होगा जब हम कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते रहेंगे। वैक्सीन लगने के भी यह जरूरी है।

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