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CM कैप्टन का ऐलान, पंजाब में 'CAB' के लिए कोई जगह नहीं

CM कैप्टन का ऐलान, पंजाब में ‘CAB’ के लिए कोई जगह नहीं

नई दिल्ली: पंजाब प्रदेश के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) का विरोध किया है|मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) को संविधान के खिलाफ बताया है|मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा कि पंजाब में नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) को लागू नहीं किया जायेगा|

मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) ने सीएबी व नेशनल रजिस्टर फॉर सिटीजन (एनआरसी), दोनों को गलत करार देते हुए कहा कि पंजाब में इनके लिए कोई स्थान नहीं है|कैप्टन ने कहा कि पंजाब किसी भी हालत में सीएबी व नेशनल रजिस्टर फॉर सिटीजन (एनआरसी)को पंजाब में पैर नहीं पसारने देगा|मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के अनुसार, एनआरसी की तरह नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) लोकतंत्र की भावना के विपरीत है|

गौरतलब है कि भारत-पाकिस्तान सीमा का एक लंबा हिस्सा सीमावर्ती राज्य पंजाब से लगता है| भारत से पाकिस्तान जाने व पाकिस्तान से भारत आने का सबसे प्रमुख रास्ता भी पंजाब से ही होकर जाता है व इसी रास्ते पाकिस्तान से सैकड़ों हिंदू शरणार्थी भारत आए हैं|

अमरिंदर सिंह की राह पर केरल, पश्चिम बंगाल के भी मुख्यमंत्री…..

इसी प्रकार, केरल और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों ने भी ऐलान करते हुए कहा कि वह भी अपने राज्यों में CAB नहीं लागू करेंगे|केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन (Pinarai Vijayan) ने कहा है कि केरल CAB को स्‍वीकार नहीं करेगा। विजयन ने इस संशोधन को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार भारत को धार्मिक आधारों पर बांटने की कोशिश कर रही है।

वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (जो कि इस बिल की विरोधी रही हैं) ने खड़गपुर में कहा, मेरे शासन में यह बिल राज्य में लोगों पर लागू नहीं पाएगा|CAB से डरने की जरूरत नहीं है|हम आपके साथ हैं| जब तक हम यहां हैं कोई इसे आप पर नहीं थोप सकता|

राष्ट्रपति ने भी किए बिल पर हस्ताक्षर…….

बता दें इस बिल को अब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी अपनी मंजूरी दे दी है|जिसके बाद नागरिकता संशोधन बिल अब कानून बन चुका है।बतादें कि, लोकसभा और राज्यसभा में बिल के पास होने के बाद इस बिल को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंजूरी दी है|इस बिल पर राष्ट्रपति कोविंद ने गुरुवार देर रात हस्ताक्षर कर दिए हैं|

नागरिकता कानून, 1955 में संबंधित संशोधन हो गया है|इस बिल के कानून बन जाने के बाद अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए गैर मुस्लिम शरणार्थियों – हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता आसानी से मिल जाएगी|बांग्लादेश-अफगानिस्तान और पाकिस्तान से आए हुए हिंदू-जैन-बौद्ध-सिख-ईसाई-पारसी शरणार्थी आसानी से भारत की नागरिकता हासिल कर पाएंगे।

बतादें कि, इस बिल को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले लोकसभा और फिर राज्यसभा में पेश किया था।कई घंटों की तीखी बहस के बाद ये बिल लोकसभा और राज्यसभा दोनों में पास हो गया था|

कई जगह बिल का विरोध……

नागरिकता संशोधन बिल को लेकर अलग-अलग जगह विरोध भी हो रहा है।

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