मासूम के पास अब न मां का आंचल और न पिता का साया - Arth Parkash
Thursday, March 21, 2019
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मासूम के पास अब न मां का आंचल और न पिता का साया

मासूम के पास अब न मां का आंचल और न पिता का साया

यह उन दोनों की प्रेम कहानी का दुखद अंत था। प्रियंका के मासूम बेटे की जिंदगी खराब हो गई। न उसे मां का आंचल नसीब हुआ और न पिता का साया। उसके परिवार की स्थिति तो और भी खराब हो गई, क्योंकि प्रियंका, क्लब में डांस के जरिये अपने परिवार का पेट पालने वाली एक मात्र कमाऊ सदस्य थी। उधर, संदीप की पत्नी और बच्चे भी बेसहारा हो गए। दुष्कर्म मामले में जेल से जमानत पर बाहर आया संदीप, हत्या के बाद आखिर पुलिस से बचने के लिए कितना और कहां तक भाग सकता था …? -सुमित्रा की रिपोर्ट

युवती पर दाग दी गोलियां

धांय… धांय… अचानक उसने अपने पास खड़ी युवती पर पांच गोलियां दाग दीं। गोलियां उसकी गर्दन और पेट में लगीं। युवती के शरीर से खून के फव्वारे निकलने लगे और वह कटे पेड़ की तरह जमीन पर गिर पड़ी। उसकी उम्र बाईस-तेईस साल रही होगी। गोलियां चलने की आवाज़ सुन कर पास ही खड़ी कार में बैठा युवक बाहर आ गया, जबकि उसके साथ बैठी एक अन्य युवती कार से नीचे नहीं उतरी। इस दौरान गोलियां चलाने वाले युवक ने जमीन पर गिरी युवती का मोबाइल छीना और अपने साथी के साथ गाड़ी में बैठ कर फरार हो गया।

मौसम सर्दी का था और सुबह के इंतजार में थोड़ी दूरी पर बैठे लोग आग से अपने हाथ सेंक रहे थे। गोलियों की आवाज़ सुन कर वे भी उधर ही आ गए, जहां वह युवती गिरी पड़ी थी। उन्हीं लोगों में से किसी ने फोन से पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर सबसे पहले अंतिम सांसें गिन रही युवती को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका|

यह मामला हरियाणा में गुरुग्राम के डीएलएफ फेज-एक पुलिस थाने का था। घटना गुरुग्राम में फरीदाबाद रोड खुशबू चौक की थी। तारीख थी 19 जनवरी 2019। जांच पड़ताल शुरू होने पर पुलिस को जानकारी मिली कि मरने वाली युवती का नाम प्रियंका था और वह क्लब डांसर थी। क्लब में आने वालों के मनोरंजन के लिए फि़ल्मी गानों की धुन पर रंग-बिरंगे छोटे कपड़े पहन कर थिरकती थी। क्लब आने वाले शराब के सुुरूर में उसका डांस देख कर अपना दिल थाम लेते थे। मनचलों के बीच खुद को सुरक्षित रखना उसके लिए लगातार मुश्किल होता जा रहा था।

संदीप से मिली सुरक्षा से खुश थी प्रियंका : इसी क्लब में एक बाउंसर था। संदीप नाम का यह बाउंसर प्रियंका को सुरक्षा देता था। उसने कई बार प्रियंका की मदद की। क्लब में उसे देर हो जाती थी। रात में अकेली लड़की के लिए घर जाना थोड़ा मुश्किल भी होता है। ऐसे में अगर कोई मदद कर दे तो उसकी तरफ आपका ध्यान आकृष्ट होना स्वाभाविक है। प्रियंका के परिवार के लोग क्लब में नाचने की उसकी इस नौकरी से बिल्कुल भी खुश नहीं थे। उसके पिता की मौत हो चुकी थी। प्रियंका के घर में उसकी कई बहनें और एक भाई था, जबकि कमाने वाली वह अकेली थी।

संदीप ने जब प्रियंका को सुरक्षा दी तो उसे लगा कि इससे शादी करके घर बसाया जा सकता है। इस दौरान दोनों में नजदीकियां बढ़ीं और वे एक-दूसरे के हो गए। संदीप फरीदाबाद जिले के तिगांव गांव का रहने वाला था। उसने प्रियंका को भरोसा दिलाया कि वह जल्दी ही उससे शादी कर लेगा। इसके बाद वे लिव इन में रहने लगे। एक दिन प्रियंका को पता चला कि वह गर्भवती है तो उसने संदीप पर शादी के लिए दबाव बढ़ा दिया। संदीप बात को टाले जा रहा था। इससे प्रियंका को शक होने लगा कि संदीप ने उसकी जिंदगी से खिलवाड़ करने के इरादे से तो संबंध नहीं बनाये थे?

प्रियंका को यह भी चिंता थी कि अगर उसने बिना शादी के बच्चे को जन्म दिया तो परिवार और समाज क्या कहेगा? ऐसे में वह किसी को भी मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगी। चिंता में डूबी प्रियंका के सामने अब तक की जिंदगी के सारे दृश्य तैर गए। कैसे पिता की मौत के बाद मां और भाई-बहनों के साथ वह करनाल से गुरुग्राम आई थी? कैसे परिवार का पेट पालने के लिए नौकरी की खातिर जगह-जगह मारी-मारी फिरती रही थी? कैसे फिर बार क्लब में डांसर की नौकरी मिली? कैसे संदीप से नजदीकियां बढ़ीं और जिंदगी की नई शुरुआत होने से पहले ही कैसे सब कुछ खाक में मिलता नजर आ रहा है?

… और फिर टूट गया प्रियंका का दिल : उस समय तो प्रियंका का दिल ही टूट गया, जब उसे पता चला कि संदीप पहले से ही न केवल शादीशुदा है, बल्कि उसके बच्चे भी हैं। उसे गुस्सा आना स्वाभाविक था। प्रियंका की करनाल में रहते शादी हो गई थी, लेकिन पति से नहीं निभ पाई तो उसने तलाक ले लिया था। संदीप के शादी के लिए ‘हां’ बोलने पर वह जितनी खुश हुई थी, उसके शादीशुदा होने की बात का पता लगने पर उतनी ही दुखी थी। क्या करे, क्या न करे? उसे कुछ सूझ ही नहीं रहा था।

आखिर में उसने संदीप को सबक सिखाने का फैसला लिया और सेक्टर-50 के पुलिस थाने में दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज करा दी। पुलिस ने संदीप को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। प्रियंका ने एक बेटे को जन्म दिया और जैसे-तैसे समय बिताने लगी। बेटा आठ महीने का हो गया। इस बीच संदीप को जमानत मिल गई। जेल से बाहर आने के बाद उसने फिर प्रियंका से संपर्क किया। अपनी गलती मानी और एक बार दोबारा भरोसा दिलाया कि वह उससे शादी कर लेगा। प्रियंका उसकी बातों में आ गई। एक बार फिर दोनों साथ-साथ बाहर आने-जाने लगे।

संदीप ने प्रियंका की मां को भी यकीन दिला दिया कि वह शादी करने को तैयार है, बशर्ते दुष्कर्म का मामला वापस ले लिया जाए। उसकी मां इस बात के लिए मान भी गई। अगले कुछ दिन में मामले की तारीख थी। संदीप चाहता था कि गवाही के दौरान प्रियंका अपने बयान बदल दे और फिर केस वापस ले ले। उसने यह भी वादा किया कि अपनी पत्नी से तलाक भी ले लेगा। वह बच्चे को पिता का नाम देने के लिए भी राजी था। केस वापस लेने के लिए उसने प्रियंका पर लगातार दबाव बनाने की कोशिश की। प्रियंका उलझन में थी। एक तरफ उसे फिर से अपना घर बसता नजर आ रहा था, लेकिन मन में कहीं यह आशंका भी थी कि संदीप धोखा तो नहीं दे देगा?

घूमाने के बहाने लिया प्रियंका को साथ : प्रियंका को घुमाने के बहाने संदीप ने उसे अपने साथ लिया। कार में उसके साथ उसका एक दोस्त और एक अन्य युवती भी थी। कई घंटे तक वह गाडी को सड़कों पर इधर-उधर घुमाता रहा। बीच-बीच में वह प्रियंका से केस वापस लेने और अदालत में बयान बदलने के लिए आग्रह करता रहा। एक-दो जगह उन्होंने कार रोक कर कुछ खाया-पीया भी।

जब संदीप ने फिर उसे केस वापस लेने के लिए कहा तो उसने साफ़ शब्दों में कह दिया, ‘मैं ऐसा नहीं कर सकती। तुमने मुझे धोखा दिया है। मेरी जिंदगी बर्बाद की है। मैं बिन ब्याही मां बन गई। किसी को मुंह दिखाने लायक भी नहीं रही। किसी हालत में केस वापस नहीं लूंगी।अब संदीप को भी गुस्सा आ गया था। दोनों के बीच पहले कहा-सुनी हुई और फिर गाली गलौच भी।

संदीप ने पूछा, ‘तो यह तुम्हारा आखिरी फैसला है? एक बार फिर विचार कर लो। ना करना, तुम्हारे लिए ठीक नहीं होगा। क्या तुम मेरी बात नहीं मानोगी? प्रियंका भी परेशान हो चुकी थी। उसे भी क्रोध आ गया। उसने कहा, ‘मेरी जिंदगी में बचा ही क्या है? ज्यादा से ज्यादा क्या कर लोगे? मेरी जान ही लोगे ना? प्रियंका इतना ही कह पाई थी कि संदीप ने अपनी जेब से पिस्टल निकाली और उस पर तड़ातड़ पांच गोलियां दाग दीं। प्रियंका जमीन पर गिरी और उसकी सांसें उखड़ गईं। प्रियंका को तो मुक्ति मिल गई, लेकिन संदीप को अपनी ही गलती से खड़ी की गई परेशानियों से कब मुक्ति मिलेगी, मिलेगी भी या नहीं, कोई नहीं जानता!

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