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उत्तराखंड में 70 साल बाद चारधाम ‘छड़ी यात्रा’ शुरू

हरिद्वार। उत्तराखंड में चार धाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमनोत्री के लिए 70 साल बाद ‘छड़ी यात्रा’ शुरु होगी और प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत शनिवार को हरी झंडी दिखाकर इस यात्रा काे रवाना करेंगे।

अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता तथा श्रीदूधेश्वर मठ गाजियाबाद के श्रीमहंत नारायण गिरि ने बताया कि छड़ी यात्रा की मुख्यमंत्री कल पूजा अर्चना करेंगे और उसके बाद यात्रा चार धाम के लिए रवाना कर दी जाएगी। छड़ी यात्रा पांच नवंबर को समाप्त होगी।

उन्होंने बताया कि इस यात्रा में होने वाले खर्च का दो फीसदी सरकार वहन करेगी। यात्रा का शेष खर्च परिषद से जुड़े 13 अखाडे तथा अन्य संगठन करेंगे। निरंजनी अखाडे ने यात्रा के लिए पांच लाख रुपए की सहायता दी है। इसी तरह से अन्य कई अखाड़े तथा धार्मिक और सामाजिक संगठन इसमें योगदान दे रहे हैं। इस यात्रा में यात्री को सारी सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने बताया कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ऐसे लोगों को चार धाम यात्रा पर ले जाना है जो इन धामों की यात्रा करने से असमर्थ हैं।

प्रवक्ता ने कहा कि पहले यह यात्रा कुमायूं के बागेश्वर जूना अखाड़े के बैजनाथ मंदिर से शुुुरू होकर तिब्बत होते हुए कैलाश के लिए निकलती थी। तिब्बत देश में तब दलाई लामा इसका सत्कार करते थे और कैलाश के महंत इस यात्रा की पूरी व्यवस्था करते और उसके बाद वह उत्तराखंड के चार धाम के लिए रवाना करते थे। इससे पहले अखाड़े परिषद के महामंत्री हरी गिरि महाराज ने बताया कि यह यात्रा लंबे समय से बंद थी जिसे फिर से शुरू किया जा रहा है और अब यह पहली बार हरिद्वार से शुरू होगी। बागेश्वर से चलने वाली यह यात्रा करीब 11 सौ वर्ष पुरानी है और इसका उद्देश्य ऐसे लोगों को यात्रा करवाना है जो यात्रा तो करना चाहते थे मगर गरीबी के कारण यात्रा नहीं कर पाते। ऐसे लोगों को छड़ी यात्रा में मुफ्त यात्रा करवाई जाती थी। ऐसी ही यात्रा अमरनाथ छड़ी यात्रा और हिमाचल में भी होती है।

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