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परिदा के दिल में दफन ‘राज’ अब आये बाहर, मनोज का अब चंडीगढ़ से जाना हुआ तो खुद को न रोक पाना हुआ

Chandigarh Manoj Parida Story: एजीएमयूटी कैडर के 1986 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनोज कुमार परिदा अब आगे चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार के पद पर अपनी सेवा नहीं देंगे| परिदा का तबादला हो गया है| केंद्र सरकार ने उन्हें चंडीगढ़ से वापस बुला लिया है| अब परिदा नेशनल अथॉरिटी केमिकल वेपन्स कन्वेंशन के चेयरमैन पद नियुक्त होंगे| यहां सेक्रेटरी रैंक पर उनकी नियुक्ति की गई है| बतादें कि, परिदा ने चंडीगढ़ में सलाहकार रहते हुए अपनी भूमिका बखूबी निभाई| उन्होने यहां रहकर अपने लम्बे प्रशासनिक सेवा अनुभव का उम्दा प्रयोग किया| इधर, अब जब मनोज परिदा चंडीगढ़ से अपनी नई नियुक्ति पर जा रहे हैं तो यहां से जाते-जाते अर्थ प्रकाश सवांददाता साजन शर्मा ने उनसे ख़ास बातचीत की| इस दौरान मनोज परिदा ने चंडीगढ़ प्रशासन में अपने कार्यकाल को तो बयां किया ही साथ ही उन्होने चंडीगढ़ और यहां रहने लोगों के प्रति अपनी सोच को भी उजागर किया| चंडीगढ़ से जा रहे परिदा ने शहर और यहां के लोगों के लिए अपने दिल में दफन राज खोल डाले| उन्होने शहर के लोगों की मुंह भर तारीफ की और शहर की सुंदरता को अद्भुत बताया|

चंडीगढ़ के लोगों में इंसानियत जिंदा, कोरोना कॉल में यह देखने को मिला…..

परिदा ने कहा कि शहर के लोग बहुत ही परोपकारी तो हैं ही, उनमें इंसानियत भी जिंदा है। कोरोना कॉल के दौरान यह बात बखूबी साबित हुई। प्रशासन की एक आवाज पर शहर की दर्जनभर संस्थाएं व आम लोग कोरोना मरीजों की मदद को आगे चले आए। यही खासियत शहर को दूसरों से अलग करती है। इसके बाद तो जैसे मिनी कोविड सेंटर खोलने का सिलसिला ही चल पड़ा। देखते देखते दानी व परोपकारी सज्जनों व गैर सरकारी संस्थाओं ने इतने बैड जुटा दिये जिसकी सोच भी नहीं सकते थे। पब्लिक सेक्टर के साथ लोगों ने प्रशासन के बराबर दूसरी व्यवस्था खड़ी कर दी। यही वजह रही कि बीमार लोगों को दूसरे शहरों की तरह दिक्कत नहीं आई। कवायद यहीं नहीं थमी। गरीब व बेसहारा लोगों के लिए शहर के लोगों ने पूरे तन मन धन से सर्वस्व न्यौछावर किया। उनके लिए खाना भी जुटाया और इसे वितरित भी किया। बहुत से लोगों की नौकरियां चली गई लेकिन भाईचारे ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भूखा न सोए। शहर के लोगों ने इसी परोपकारी व्यवहार के जरिये अपने चरित्र का परिचय दिया। यह किसी भी इंसान की बहुत बड़ी ताकत होती है। किसी दूसरे के काम आना ही उसे अन्य से अलग करता है।

चंडीगढ़ बेहद अच्छा शहर…..

मनोज परिदा ने चंडीगढ़ की खट्टी मीठी यादों के बारे पूछने पर कहा कि शहर अपने आप में खूबसूरत शहर है। जो यहां रह रहे हैं वह खुशनसीब हैं। एक हरे-भरे शहर को लोग भी बखूबी संभाले हैं। इसे संजो कर रखना भी अपने आप में बड़ी बात है। यहां की ज्यादातर जनसंखया पढ़ी लिखी है। अपना अच्छा बुरा बखूबी समझती है तो प्रशासन या अफसरों को उनके उठाए सवालों का जवाब भी देना पड़ता है। लोग विभिन्न मसलों पर अपने सुझाव भी भेजते हैं। व्यापारी वर्ग व इंडस्ट्री से जुड़े लोग बहुत ही सक्रिय हैं। प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कई मसलों पर खड़े होते रहे। यह जिंदादिल शहर की मिसाल है। उन्होंने कहा कि यहां प्रशासक वीपी सिंह बदनौर की देखरेख में काम करने का बिलकुल खुला मौका मिला। किसी तरह का राजनीतिक दखल नहीं रहा। शहर का विकास करने की पूरी कोशिश की।

कूड़े का पहाड़ चंडीगढ़ में अच्छा नहीं लगता…..

परिदा के अनुसार डड्डूमाजरा के वेस्ट प्लांट वाले मसले को वह जल्द से जल्द सुलझाना चाहते थे ताकि लोगों को सुकून मिले। वहां जो वेस्ट का पहाड़ लगा है, उसे ठीक करने में अभी समय लगेगा। इस पर काम चल रहा है। वहीं शहर के गारबेज का भविष्य में बेहतर तरीके से डिसपोजल हो, इसको लेकर विस्तृत योजना पर काम करने की इच्छा थी। जहां तक उपलब्धि का सवाल है तो कोरोना कॉल के चलते विकास का ज्यादा समय तो नहीं मिल पाया लेकिन फिर भी लोगों से जुड़े मुद्दे सुलझाने की पूरी कोशिश की| कोरोना काल में करीब 1500 से ज्यादा परिवारों को उनका खुद का घर मुहैया कराया। 1200 करोड़ की लागत से सैक्टर 52 में करीब 27-28 एकड़ जमीन खाली करवाई गई। यहां भविष्य में शहर के लिए बेहतरीन सुविधा संपन्न अस्पताल, कनवेंशन सेंटर या कालेज इत्यादि बन सकता है।

चंडीगढ़ में उनके कार्यकाल में कई चीजें ये भी हुईं…..

स्मार्ट सिटी के तहत बाइक शेयरिंग प्रोजेक्ट शुरू हुआ। एजूकेशन के क्षेत्र में कई मुकाम हासिल किये। मेडिकल कालेज में 50 सीटें बढ़ी। पीजीआई को भी विस्तार के लिए अतिरिक्त जगह दी गई। चंडीगढ़ की हेल्थ व एजूकेशन व्यवस्था को लेकर परिदा ने कहा कि यह अपने आप में बेहतरीन है। जीएमसीएच 32, जीएमएचएस 16 और सबसे प्रमुख पीजीआई और पीयू जैसे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खयाति के संस्थान हैं जो इसकी विरासत हैं।

एक नजर………..

चंडीगढ़ में एडवाइजर का कार्यकाल तीन साल का होता है। लेकिन परिदा का उनका कार्यकाल पूरा होने से पहले ही तबादला कर दिया गया है। अभी कुछ महीने परिदा के कार्यकाल में बाकि थे| बता दे कि, परिदा ओडिसा राज्य से संबंध रखते हैं| परिदा ने अपनी प्रशासनिक सर्विस में कई बड़े और महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवा दी है| 1985 बैच के आईएएस अधिकारी परिमल राय के चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार पद से जाने के बाद परिदा चंडीगढ़ में आये थे और प्रशासक के सलाहकार नियुक्त हुए थे| चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार बनने से पहले परिदा दिल्ली में केजरीवाल सरकार में अहम पद पर कार्यरत रहे| वहीँ दिल्ली में आने से पहले मनोज परिदा पंडुचेरी के मुख्य सचिव के पद पर अपनी सेवा दे रहे थे|

वीडियो यहां भी देख सकते हैं….

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