'चंडीगढ़ की आवाज' ने किया पीपीपी मॉडल का विरोध, 14 को एडवायजरी काउंसिल की मीटिंग में होनी है चर्चा - Arth Parkash
Tuesday, February 19, 2019
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‘चंडीगढ़ की आवाज’ ने किया पीपीपी मॉडल का विरोध, 14 को एडवायजरी काउंसिल की मीटिंग में होनी है चर्चा

‘चंडीगढ़ की आवाज’ ने किया पीपीपी मॉडल का विरोध, 14 को एडवायजरी काउंसिल की मीटिंग में होनी है चर्चा

चंडीगढ़। शहर के सरकारी स्कूलों की प्राइमरी स्तर की कक्षाओ में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए एक प्रस्ताव के तहत पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से सरकारी स्कूलों को निजी संस्थाओ और ट्रस्ट को देने का फैसला लगभग तय है और इस प्रस्ताव पर आगामी 14 फरवरी को एडवाइजरी काउंसिल की मीटिंग में चर्चा होनी है। अध्यापकों ने आगामी 14 फरवरी को एडवाइजरी काउंसिल की मीटिंग में इस मुद्दे के पास होने पर विरोध करने का निश्चय किया है और चंडीगढ़ की आवाज पार्टी अध्यापकों का पूर्ण समर्थन करेगी। यह जानकारी चंडीगढ़ की आवाज पार्टी के अध्यक्ष अविनाश शर्मा ने दी।

अविनाश सिंह शर्मा के अनुसार, ‘अध्यापकों से बात करने पर पता चला है कि चंडीगढ़ में शिक्षा के गिरते स्तर के लिए सरकारी स्कूलों में बच्चो के अनुपात में अध्यापको की कम संख्या यानि शिक्षको की कमी ज्यादा जिम्मेवार है। आज से 15-20 साल पहले चंडीगढ़ के स्कूल भारत में शिक्षा के स्तर पर नंबर एक थे लेकिन लगातार बढ़ती जनसंख्या के अनुपात में अध्यापको की कमी और काम के बोझ के कारण, शिक्षा का स्तर गिरने से ये नॉर्थ जोन में ही सबसे निचले स्तर पर आ गए हैं।

उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन पहले से अध्यापको की कमी के बारे में अवगत है लेकिन बीजेपी के इशारे पर ये चंडीगढ़ में सरकारी टीचर्स की भर्ती नही करना चाहते और बीजेपी एक सोची-समझी रणनीति के तहत सरकारी स्कूलों का निजीकरण कर अपने चहेतों को सरकारी संस्थानों का कब्जा देना चाहती है और इसकी शुरुआत चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से निजी संस्थाओ और ट्रस्ट को देकर की जा रही है।

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