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डाउन सिंड्रोम से प्रभावित बच्चों ने लगाए पौधे

नई पहल का उद्देश्य बच्चों को अपने पर्यावरण की देखभाल के लिए प्रोत्साहित करना था

चंडीगढ़ । वल्र्ड डाउन सिंड्रोम सेलिब्रेशन के एक हिस्से के रूप में, चंडीगढ़ डाउन सिंड्रोम सोसाइटी, (सीडीएसएस) जेनेटिक सेंटर जीएमसीएच और गवर्नमेंट रिहैबिलिटेशन इंस्टीट्यूट फॉर इंटेलेक्चुअल डिसएबिलिटीज (ग्रिड) ने डाउन सिंड्रोम दिवस के मौके पर बच्चों द्वारा अलग अलग जगह पर पौधे लगाने के एक विशेष अभियान का आयोजन किया।

कार्यक्रम का उद्घाटन प्रो. बी.एस. चवन, डायरेक्टर प्रिंसिपल, जीएमसीएच ने किया। इस अवसर पर उपस्थित अन्य विशेषज्ञों में प्रोफेसर प्रीति अरुण, ज्वाइंट डायरेक्टर, ग्रिड, डॉ. गुरजीत कौर, डॉ. रवि गुप्ता, एमएस और डॉ. वसीम अहमद, असिस्टेंट प्रोफेसर, ग्रिड भी शामिल थे। विश्व डाउन सिंड्रोम दिवस 2019 की थीम ‘लीव नो वन बिहाइंडÓ थी और यह कार्यक्रम डाउन सिंड्रोम वाले सभी बच्चों और उनके देखभाल करने वालों एकजुट करने के लिए था। इस दिवस को एक समर्पित गमले में पौधे लगाने के एक अभिनव दृष्टिकोण के माध्यम से सार्थक किया गया। इन गमलों को सीडीएसएस द्वारा प्रदान किया गया था और बच्चों ने अपने माता-पिता के साथ नामित गमले में पौधे लगाए थे जो बच्चे के नाम पर थे।

माता-पिता से कहा गया कि वे अपने बच्चों को पौधे की देखभाल के लिए प्रोत्साहित करें ताकि वे प्रकृति से जुड़े और उसके संरक्षण के लिए अपने दायित्व को समझें। कार्यक्रम के दौरान प्रो.चवन ने माता-पिता को विकलांगता की रोकथाम के प्राथमिक उद्देश्य के साथ 2007 में जेनेटिक स्क्रीनिंग सेंटर शुरू करने के लिए अपने दृष्टिकोण के बारे में बताया। डॉ. गुरजीत कौर ने जेनेटिक सेंटर में किए जा रहे नवजात और प्रसव पूर्व जांच कार्यक्रम के आंकड़े साझा किए। उन्होंने कहा कि जन्म के पूर्व जांच कार्यक्रम के माध्यम से, जेनेटिक सेंटर गुणसूत्र (क्रोमोजोमल) और न्यूरल ट्यूब विकारों के लिए गर्भवती महिलाओं की जांच कर रहा है और 45,852 गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग की गई है और डाउन सिंड्रोम के 24 मामलों और न्यूरल ट्यूब विकार के 37 मामलों की पहचान की गई है।
सभी नए जन्मों को तीन विकारों के लिए जांचा जाता है, जैसे जन्मजात यानि जन्मजात हाइपोथायरायडिज्म (सीएच), ग्लूकोज-6-फॉस्फेट डिहाइड्रोजनेज (जी6पीडी) की कमी और जन्मजात एड्रेनल हाइपरप्लासिया (सीएएच) और जेनेटिक सेंटर ने 75,544 शिशुओं की जांच की और सीएच के 51 मामलों, जी6पीडी के 770 मामले, और सीएएच के 8 मामलों की पहचान की।

2015 में, कार्यक्रम का विस्तार यूटी चंडीग? के अन्य प्रमुख अस्पतालों में भी किया गया जिनमें जीएमसीएच-32 के अलावा जीएमएसएच-16, सिविल अस्पताल मनीमाजरा, सिविल अस्पताल 45 और 22 शामिल हैं। डॉ.प्रीति अरुण,जेडी, ग्रिड और डॉ. वसीम अहमद, जनरल सैक्रेटरी, सीडीएसएस ने बच्चों के माता-पिता को बताया कि ग्रिड डीएस से प्रभावित 57 बच्चों के लिए शुरुआती इंटरवेंशन, विशेष शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। सीडीएसएस का ब?ा उद्देश्य ‘चंडीग? डाउन फ्री एंड फ्रैंडली सिटी’ बनाना है। ये सोसायटी इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जेनेटिक सेंटर, जीएमसीएच और ग्रिड के साथ सक्रिय रूप से काम कर रही है।

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