पंजाब फिर क्यों जिंदा करे आतंकवाद - Arth Parkash
Wednesday, November 21, 2018
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पंजाब फिर क्यों जिंदा करे आतंकवाद

पंजाब फिर क्यों जिंदा करे आतंकवाद

पंजाब ने भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के वक्त जो झेला वह ऐसा इतिहास है जोकि प्रत्येक भारतीय के दिल में टीस पैदा कर देता है। इसके बाद एक और दौर आया जब खालिस्तान के नाम पर प्रदेश में आतंकवाद का ऐसा दौर चला जिसने हजारों मासूमों की जिंदगियां छीन ली और आर्थिक, सामाजिक फ्रंट पर राज्य को बहुत पीछे कर दिया। इसी दौर ने देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री की जान ले ली। इसके बाद मचे कोहराम ने फिर हजारों लोगों को मौत के मुंह में धकेल दिया वहीं उनके वारिसों की जिंदगी में अंधेरा भर दिया। आखिर इतना सबकुछ होने के बावजूद पंजाब की जनता फिर से ऐसे किसी भयावह दौर के लिए तैयार है? दरअसल, यह सवाल इसलिए पूछा जा रहा है क्योंकि सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि पंजाब में उग्रवाद को दोबारा जिंदा करने के लिए बाहरी संबंधों के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं। यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो बहुत देर हो जाएगी।

वे भारत के समक्ष खड़ी सुरक्षा चुनौतियों पर एक सेमिनार में बोल रहे थे। रावत ने कहा कि पंजाब शांतिपूर्ण रहा है, लेकिन बाहरी संबंधों के कारण राज्य में उग्रवाद को फिर से पैदा करने के प्रयास किये जा रहे है। हमें बहुत सावधान रहना होगा। हमें नहीं लगता कि पंजाब की स्थिति समाप्त हो गई है। पंजाब में जो कुछ हो रहा है, हम अपनी आंखें बंद नहीं कर सकते।सेना प्रमुख का यह बयान वाकई में चैंकाने वाला है। हालांकि पंजाब में जब-तब ऐसे इनपुट मिलते रहे हैं कि उग्रवादी संगठन देश के बाहर बैठकर यहां फिर से आतंकी कार्रवाईयों को अंजाम देने की तैयारी में रहते हैं। लेकिन इतने पुरजोर तरीके से इनके बारे में बात नहीं की जाती। वैसे, जम्मू-कश्मीर में आतंक का जो दौर चल रहा है, और सेना आतंकियों को वहां जो टक्कर दे रही है, उससे पड़ोसी देश पाकिस्तान की दाल नहीं गल पा रही है। ऐसे में उसका निशाना देश के अन्य राज्य हो सकते हैं, संभवतया पंजाब उसकी सूची में सबसे पहले हो।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने भी इस मसले को उठाया है कि पंजाब में उग्रवाद को पुनर्जीवित किये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने इस संबंध में विदेश में चल रही गतिविधियों का जिक्र किया है। उनका कहना था कि ‘जनमत संग्रह 2020’ के मकसद से ब्रिटेन में खालिस्तान समर्थक रैली का आयोजन किया गया है। दरअसल, क्षेत्रवाद हमेशा से भारत की कमजोरी रहा है। विभिन्नताओं का देश भारत कब एक प्रांत और प्रदेश के लोगों की जागीर बन जाता है पता ही नहीं चलता। पंजाब में हम यह देख चुके हैं, इसके बाद अब महाराष्ट्र में एक कौम के ही होने की आवाज उठती है और पूरा देश अशांत हो जाता है। बदले हुए आर्थिक-सामाजिक दौर में क्या यह संभव है कि एक प्रदेश सिर्फ उस प्रदेश के मूल निवासियों की ही रिहायश हो?

वास्तव में राजनीति की चैसर बैठाने वालों और खुराफाती दिमाग के लोगों की यह साजिश होती है। देश जब बाहरी खतरों से जूझ रहा है, तब आंतरिक सुरक्षा को कमजोर करने वाली ताकतों को भी मुंहतोड़ जवाब दिये जाने की जरूरत है। हालांकि जनरल रावत का यह कहना सारगर्भित है कि आतंरिक सुरक्षा देश की बड़ी समस्याओं में से एक है, लेकिन सवाल यह है कि हम समाधान क्यों नहीं ढूंढ पाए हैं, क्योंकि इसमें बाहरी संबंध हैं। उग्रवाद को सैन्य बल से नहीं निपटाया जा सकता। इसके लिए एक ऐसा दृष्टिकोण अपनाना होगा जिसमें सभी एजेंसियां, सरकार, नागरिक प्रशासन, सेना और पुलिस एकीकृत तरीके से काम करें। जाहिर है वे इसके सैन्य समाधान से पहले राजनीतिक-सामाजिक समाधान की भी बात कर रहे हैं।

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