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Wednesday, November 21, 2018
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सीबीएसई ने प्राइवेट स्कूलों के नियमों में किया बड़ा बदलाव

सीबीएसई ने प्राइवेट स्कूलों के नियमों में किया बड़ा बदलाव

 घोषित फीस के ज्यादा स्कूल नहीं करेगा चार्ज, स्कूलों को लेनी होगी ऑनलाइन फीस

चंडीगढ़(सौरव खंडूरी)। प्राइवेट स्कूल अब खुद की कोई मनमानी नहीं कर पाएंगे। इसके लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने प्राइवेट स्कूलों के नियमों में बदलाव किया है। नए बदलाव के अनुसार जहां पर अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी वहीं पर प्राइवेट स्कूलों का काम बढ़ जाएगा। पहले जहां पर स्कूल की मान्यता के लिए मात्र सीबीएसई की टीम को ही संतुष्ट करना पड़ता था अब उसके स्थान पर जिला शिक्षा अधिकारी को संतुष्ट करना होगा और यह चैकिंग किसी भी समय डीईओ कर सकेगा। जिसके बाद स्कूलों को अब हर समय अपडेट रहना होगा।

सत्र के बीच में नहीं होगी फीस बढ़ोतरी

फीस की घोषणा सत्र शुरू होने से पहले ही कर दी जाती है। सत्र के बीच में यदि कोई स्कूल किसी प्रकार की फीस में बढ़ोतरी करता है तो उस पर भी जिला शिक्षा अधिकारी कार्रवाई कर सकता है। फीस बढ़ोतरी में किसी प्रकार का कोई हिडिन चार्ज नहीं लिया जा सकेगा।

मान्यता देने संबंधी नियमों में बदलाव

सीबीएसई ने स्कूल को मान्यता देने संबंधी अपने नियमों में बदलाव किया है। सीबीएसई ने शैक्षणिक गुणवत्ता की निगरानी के लिए आधारभूत ढांचे के ऑडिट की जिम्मेदारी राज्यों पर छोड़ दी है। अब मान्यता देने की प्रक्रिया पूरी तरीके से ऑनलाइन हो गई है, इसकी शुरुआत इसी सत्र से हो गई है। स्कूलों को अपने स्कूल की पूरी जानकारी ऑनलाइन करनी होगी।

वर्दी और पुस्तकें निश्चित दुकान से खरीदने के लिए बाध्य किया तो रद होगी मान्यता

अभिभावक की दिक्कतों व शिकायतों को दूर करने के लिए सीबीएसई ने एफिलीएशन के नए बायलॉज तैयार किए गए हैं। इस नए नियम के तहत स्कूल यूनिफार्म और किताबें निर्धारित दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। स्कूल यदि इन नियमों का उल्लंघन करते हैं तो सीबीएसई उनकी मान्यता रद्द कर देगा। उल्लेखनीय है कि शहर में इस समय 74 प्राइवेट स्कूल मौजूद है। जिनमें एक लाख के करीब बच्चे पढ़ाई कर रहे है। यह बच्चे चंडीगढ़ के अलावा पंचकूला और मोहाली से भी संबंध रखने वाले है। मान्यता देने से जुड़े उप कानून 1998 में बने थे और अंतिम बार 2012 में उनमें बदलाव किया गया था।

सीबीएसई की तरफ से जारी फरमानों को मानने का स्कूलों को कोई फर्क नहीं है। स्कूल पहले भी नियमों के अनुसार कार्य कर रहे थे। फीस पहले भी ऑनलाइन ली जा रही है और जहां तक बात मान्यता की है तो वह डीईओ से कराने में कोई हर्ज नहीं है।
 -एचएस मामिक प्रेसिडेंट, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन

 

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