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आरोपियों को प्रमोशन देने का आरोप, एडवाइजर से शिकायत

चंडीगढ़। एजूकेशन डिपार्टमेंट ग्रुप-डी इम्प्लाईज यूनियन और यूटी कैडर एजूकेशन इम्प्लाईज यूनियन के सदस्यों ने वीरवार को एडवाइजर मनोज परिदा को शिक्षा विभाग में प्रमोशन के नाम पर धांधली होने का आरोप लगाते हुए शिकायती पत्र दिया है। यूनियन के लीडरों में रंजीत मिश्रा और सवर्ण सिंह कम्बोज ने प्रशासक को पत्र देकर बताया कि शिक्षा विभाग ने पंजाब सिविल सर्विस रूल्स को तोड़कर चितरंजन सिंह और इन्दीवर कौर की डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (डीपीसी) करके रेगुलर कर दिया है। बताया गया कि इन दोनों के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज है। यहीं इन दोनों के खिलाफ विजिलेंस में भी शिकायत दर्ज है। इसकी जानकरी होने के बाद भी शिक्षा सचिव और डीएसई ने नियमों को दरकिनार करके और सलाहकार को गुमराह कर इन प्रिन्सिपलों की डिपाटमेंटल प्रमोशन कमेटी ने हस्ताक्षर करवा लिए।

एजूकेशन डिपाटमेंट ग्रूप-डी इम्प्लाईज यूनियन, यूटी कैडर एजूकेशन और यूटी कैडर एजूकेशन इम्प्लाईज यूनियन के सदस्यों ने बताया कि शिकायती पत्र को संज्ञान में लेते हुए एडवाजर ने उन्हें भरोसा दिया है कि अगर प्रिन्सिपलों पर केस दर्ज है, तो जांच कराकर दोषी अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।यूनियन के प्रधान रंजीत मिश्रा ने कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारी ग्रुप डी कर्मचारियों से पूछताछ करते हैं, लेकिन वे आरोप में फंसे प्रिंसिपल को गुपचुप तरीके से रेगुलर कर दिया गया है। यूटी कैडर एजुकेशन इंप्लाइज यूनियन के प्रधान स्वर्ण सिंह कंबोज ने कहा कि आरोप में फंसे दोषी प्रिंसिपल चितरंजन सिंह और इंदरबीर कौर की डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (डीपीसी) तुरंत रद्द करते हुए इसमें दोषी अफसरों के खिलाफ एडवाइजर से कार्रवाई की मांग की है।

प्रशासन ने अपील का एक और मौका दिया

चंडीगढ़। चंडीगढ़ स्मॉल फ्लैट स्कीम.2006 में बायोमेट्रिक सर्वे के बाद भी जिन लोगों को मकान नहीं मिले थे और उनकी अपील अपीलेट अथोरिटी के पास पेंडिंग थी उनको प्रशासन ने एक मौका और दिया है। प्रशासन ने नोटिफिकेशन जारी कर इस स्कीम में संशोधन कर इसे चंडीगढ़ स्मॉल फ्लैट ;संशोधन स्कीम.2019 किया है। इस स्कीम के लिए सेक्रेेटरी एस्टेट कम फाइनेंस सेक्रेटरी को अपीलेट अथोरिटी बनाया गया है। प्रशासक ने इसमें संशोधन कर अपीलेट अथोरिटी के फैसले पर सुनवाई के लिए एक मौका और दिया है। इसके तहत यह कैंडीडेट अपीलेट अथोरिटी के आदेशों को रिव्यू करने के लिए एडवाइजर टू एडमिनिस्ट्रेटर कम रिवीजनल अथोरिटी के पास जा सकते हैं। इसके लिए 30 दिन का समय रहेगा। साथ ही रिवीजनल अथोरिटी पूरे मामले को सुनने के बाद अपीलेट अथोरिटी के फैसले को सही मान सकते हैंए उससे अलग राय रख सकते हैं और पलट भी सकते हैं। प्रशासक ने संशोधन के बाद उन्हें यह अधिकार दिए हैं। इस स्कीम के तहत अब मलोया में फ्लैट आवंटित किए जाने हैं। इनमें ऐसे केसों को भी सुनवाई के बाद फ्लैट मिल सकते हैं।

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