गोवर्धन पूजा स्पेशल : जाने क्या है इस पूजा का महत्व और क्यों मनाया जाता है ये त्योहार - Arth Parkash
Wednesday, November 21, 2018
Breaking News
Home » Photo Feature » गोवर्धन पूजा स्पेशल : जाने क्या है इस पूजा का महत्व और क्यों मनाया जाता है ये त्योहार
गोवर्धन पूजा स्पेशल : जाने क्या है इस पूजा का महत्व और क्यों मनाया जाता है ये त्योहार

गोवर्धन पूजा स्पेशल : जाने क्या है इस पूजा का महत्व और क्यों मनाया जाता है ये त्योहार

चंडीगढ़: कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा मनाया जाता है। यह त्योहार दिवाली के एक दिन बाद मनाया जाता है।दिवाली अपने साथ अनेक त्योहारों को लाता है। दिवाली के पहले धनतेरस होता है तो बाद में गोवर्धन पूजा और भाई दूज। इस साल गोवर्धन पूजा 8 नवंबर को है। इस दिन का अपना एक खास महत्व भी होता है।

कैसे करें गोवर्धन पूजा……..

गोवर्धन पूजा के दिन विशेष रूप से गाय-बैलों को भी सजाया जाता है। जिनके पास गाय होती है, वह गायों को प्रात: स्नान करा कर, उन्हें कुमकुम, अक्षत, फूल-मालाओं से सजाते हैं। इसके साथ ही गोवर्धन को गोबर से बना कर पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन गायों की सेवा करने से आपका कल्याण होता है।

गोवर्धन को गोबर से बनाकर इसमें रुई और करवे की सीके लगाकर पूजा की जाती है। गोबर पर खील, बताशे ओर शक्कर के खिलौने चढाये जाते है। इसके बाद शाम को रोज इनके सामने दीपक जलाया जाता है।

गोवर्द्धन और अन्नकूट पूजा की तिथि और शुभ मुहूर्त……

प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 7 नवंबर 2018 को रात 09 बजकर 31 मिनट से।
प्रतिपदा तिथि समाप्‍त: 8 नवंबर 2018 को रात 09 बजकर 07 मिनट तक।
गोवर्द्धन पूजा का प्रात: काल मुहूर्त: 08 नवंबर 2018 को सुबह 06 बजकर 39 मिनट से 08 बजकर 52 मिनट तक।
गोवर्द्धन पूजा का सांयकालीन मुहूर्त: 08 नवंबर 2018 को दोपहर 03 बजकर 28 मिनट से शाम 05 बजकर 41 मिनट तक।

क्यों मानते है ये त्योहार…..

कहा जाता है कि एक बार भगवान श्री कृ्ष्ण अपनी गोपियों और ग्वालों के साथ गाय चरा रहे थे। गायों को चराते हुए श्री कृ्ष्ण जब गोवर्धन पर्वत पर पहुंचे तो गोपियां 56 प्रकार के भोजन बनाकर बड़े उत्साह से नाच-गा रही थीं। जब उन्होनें गोपियों से पूछा कि यह क्या हो रहा है तो उन्हें बताया गया कि सब देवराज इन्द्र की पूजा करने के लिए किया जा रहा है। देवराज इन्द्र प्रसन्न होने पर हमारे गांव में वर्षा करेंगे, जिससे अन्न पैदा होगा। इस पर भगवान श्री कृष्ण ने समझाया कि इससे अच्छे तो हमारे पर्वत है, जो हमारी गायों को भोजन देते हैं।

ब्रज के लोगों ने श्री कृ्ष्ण की बात मानी और गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी प्रारम्भ कर दी। जब इन्द्र देव ने देखा कि सभी लोग मेरी पूजा करने के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा कर रहे है तो उन्हें बिल्कुल अच्छा नहीं लगा। इन्द्र गुस्से में आ गए और उन्होंने मेघों को आज्ञा दी कि वे गोकुल में जाकर खूब बरसे, जिससे वहां का जीवन अस्त-व्यस्त हो जाए।

अपने देव का आदेश पाकर मेघ ब्रजभूमि में मूसलाधार बारिश करने लगें। ऐसी बारिश देख कर सभी भयभीत हो गए ओर दौड़ कर श्री कृ्ष्ण की शरण में पहुंचे। श्री कृ्ष्ण ने सभी को गोवर्धन पर्वत की शरण में चलने को कहा। जब सब गोवर्धन पर्वत के निकट पहुंचे तो श्री कृ्ष्ण ने गोवर्धन को अपनी कनिष्का उंगली पर उठा लिया। सभी ब्रजवासी भाग कर गोवर्धन पर्वत की नीचे चले गए।

ब्रजवासियों पर एक बूंद भी जल नहीं गिरा। यह चमत्कार देखकर इन्द्रदेव को अपनी गलती का अहसास हुआ और वह श्री कृ्ष्ण से क्षमा मांगने लगे। सात दिन बाद श्री कृ्ष्ण ने गोवर्धन पर्वत नीचे रखा। इसके बाद ब्रजबासी हर साल गोवर्धन पूजा करने लगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Share