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बादल पिता-पुत्र जांच कमेटी के सामने होंगे पेश

 शिअद के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व वित्तमंत्री परमजीत ढींढसा ने दी जानकारी

चंडीगढ़(वीरेंद्र सिंह)। बरगाड़ी एवं बहिबल कलां कांड में एसआईटी द्वारा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल व सुखबीर बादल को समन जारी किया गया है। इसमें कमेटी के समक्ष पूर्व सीएम बादल व उनके पुत्र सुखबीर सिंह पेश होकर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे। सुनवाई आगामी 16 नवंबर से शुरू होगी।

इस बात की जानकारी अकाली दल के चंडीगढ़ स्थित कार्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान पंजाब के पूर्व वित्तमंत्री एवं शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता परमिन्दर सिंह ढींढसा ने दी। उन्होंने बताया कि पूर्व सीएम बादल व सुखबीर सिंह सिट को सहयोग करेंगे। इसलिए अब यह तय हो गया है कि प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर अब वर्तमान सीएम द्वारा बैठायी गयी विशेष जांच समिति के समक्ष पेश होंगे और संबंधित आरोपों पर पूछे गए सवालों का जवाब भी देंगे।

लोगों से किए वादे पूरे करे पंजाब सरकार : शिअद

बता दें कि इससे पूर्व शिरोमणि अकाली दल का नेतृत्व इस मामले से पल्ला झाड़ रहा था। कि उन्होंने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की थी। इसलिए सरकार द्वारा गठित विशेष जांच समिति के समक्ष पेश होने का मतलब ही नहीं बनता। ढींढसा ने कहा कि अक्षय कुमार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि बादल परिवार और डेरा प्रमुख के साथ बैठक के मामले में उन्होंने कोई पहल नहीं की है और न ही इस बैठक के बारे में उन्हें कोई जानकारी है।

उल्लेखनीय है कि जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्टमें आरोप लगाया गया था कि अक्षय कुमार ने 20 सितंबर वर्ष 2015 को अपने फ्लैट पर सुखबीर बादल और सिरसा के डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम के मध्य मीटिंग करवाई थी। इसमें श्री तख्त श्री दमदमा साहिब के तत्कालीन जत्थेदार ज्ञानी गुरमुख सिंह भी शामिल हुए थे। उसी बैठक में गुरमीत राम रहीम की फिल्म को पंजाब में रिलीज करने का फैसला भी किया गया था।

संवाददाताओं द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में ढींढसा ने कहा कि जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट ‘बायस्ट’ हो सकती है। इसलिए अकाली दल ने इसपर सीबीआई जांच की मांग की थी। किन्तु कांग्रेस सरकार ने सिट बैठा दी।बेअदबी मामले में पुलिस द्वारा की गई गोलीबारी में प्रदर्शन कर रहे दो सिख नौजवानों की मृत्यु हो गयी थी। तत्कालीन सरकार द्वारा बैठायी जांच समिति में बादल पिता-पुत्र को क्लीनचिट दी गई थी। इसके लिए सरकार जिम्मेदार नहीं थी। किन्तु जो लोग इसके जिम्मेदार हैं, उनके विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।

परमिंदर ढींढसा ने कहा कि प्रदेश सरकार को सरकारी मुलाजिमों को डीए की चार किश्तें शीघ्र रिलीज करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के लिए कोई वेतन आयोग गठित नहीं हुआ। पौने दो वर्ष के बीच इस मामले पर कोई भी बातचीत नहीं हुई। इसके लिए मुलाजिमों को 4 हजार करोड़ रुपए के एरियर देने थे, जो नहीं दिएगए। नये वेतन आयोग गठित करने के साथ ही कर्मियों को अंतरिम राहत भी देने की जरूरत पर उन्होंने बल दिया।

उन्होंने मांग की कि सरकार लोगों से किए वायदे पूरे करे, साधन न होने की बहानेबाजी से भी सरकार बचने का बहाना ढूंढ रही है। प्रदेश में सर्व शिक्षा अभियान को भी लागू करने की मांग की गयी। उन्होंने कहा कि आगामी कुछ दिनों में प्रदेश के मुलाजम जत्थेबंदियों से भी अकाली दल बात करके किसी नतीजे पर पहुंचने का प्रयास करेगी।

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